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Mathura News: फूलों से बने शेषनाग पर विराजे ठाकुर श्रीबांकेबिहारी लाल
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वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी और उनके भक्तों के बीच प्रेम और भक्ति का ऐसा रिश्ता है जिसमें वह भाव से सोने चांदी के आभूषणों को ठाकुरजी को अर्पित करते रहे हैं। कुछ वर्ष पहले सावन के सोमवार को चांदी से जड़ित विशाल शेषनाग पर ठाकुरजी विराजे थे लेकिन इस बार फूलों से तैयार किए गए शेषनाग पर ठाकुरजी ने भक्तों को दर्शन दिए।
सावन के पहले सोमवार को जहां वृंदावन में शिवालयों में धूम रही तो वहीं ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए भी भक्तों का सैलाब उमड़ा। ठाकुरजी को नीले रंग की भव्य पोशाक पहनाई गई। उनके सिंहासन के पीछे फूलों का शेषनाग बनाया गया, जिस पर ठाकुर जी को विराजित किया गया।
ठाकुरजी के शेषनाग पर दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। यहीं कुछ लोगों ने कहा कि पहले तो ठाकुर जी चांदी के शेषनाग पर विराजे थे लेकिन इस उन्हें फूलों पर विराजमान किया गया। इससे पूर्व जगन्नाथ रथयात्रा में ठाकुरजी को चांदी के रथ की जगह फूलों के रथ पर विराजमान किया गया था।
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आनंद निकुंज चैरिटेबिल ट्रस्ट ने कराया था निर्माण
विशाल चांदी के शेषनाग सिंहासन का निर्माण चंद्र आनंद निकुंज बिहारी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रयास व भक्तों के सहयोग से किया गया था। शेषनाग में करीब 80 किलो चांदी और 200 किलो लकड़ी का प्रयोग किया गया था। वर्ष 2019 के श्रावण मास में इसी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को विराजमान किया गया।
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सावन के पहले सोमवार को जहां वृंदावन में शिवालयों में धूम रही तो वहीं ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए भी भक्तों का सैलाब उमड़ा। ठाकुरजी को नीले रंग की भव्य पोशाक पहनाई गई। उनके सिंहासन के पीछे फूलों का शेषनाग बनाया गया, जिस पर ठाकुर जी को विराजित किया गया।
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ठाकुरजी के शेषनाग पर दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। यहीं कुछ लोगों ने कहा कि पहले तो ठाकुर जी चांदी के शेषनाग पर विराजे थे लेकिन इस उन्हें फूलों पर विराजमान किया गया। इससे पूर्व जगन्नाथ रथयात्रा में ठाकुरजी को चांदी के रथ की जगह फूलों के रथ पर विराजमान किया गया था।
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आनंद निकुंज चैरिटेबिल ट्रस्ट ने कराया था निर्माण
विशाल चांदी के शेषनाग सिंहासन का निर्माण चंद्र आनंद निकुंज बिहारी चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रयास व भक्तों के सहयोग से किया गया था। शेषनाग में करीब 80 किलो चांदी और 200 किलो लकड़ी का प्रयोग किया गया था। वर्ष 2019 के श्रावण मास में इसी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को विराजमान किया गया।