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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से ठीक पहले उदय होंगे चंद्रमा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:32 PM IST
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भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव इस बार और भव्य होगा। जन्म के दिन अष्टमी और लगभग पूरे समय रोहिणी नक्षत्र के योग के फलस्वरूप जयंती योग ने जन्माष्टमी के दिन को और भी खास बना दिया है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग के साथ जयंती योग की मौजूदगी दुर्लभ संयोग की श्रेणी में आती है।
इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 5 सितंबर को मनाया जाएगा। दृश्य गणित के अनुसार इस दिन आधी रात को 12:26 बजे से रोहिणी नक्षत्र और 3:56 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। रोहिणी नक्षत्र छह सितंबर आधी रात को 12:10 बजे तक और अष्टमी तिथि तड़के 3:02 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि कई दशकों बाद रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी जन्म के दिन लगभग पूरे दिन साथ रहेगी। इसी दुर्लभ योग से जयंती योग बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण को चंद्रमा का वंशज माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से ठीक पहले 11: 51 बजे पर चंद्रमा का उदय सोने पर सुहागा की तरह है।
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द्वापर में श्रीकृष्ण जन्म के समय के मिल रहे योग
भगवान सूर्य नारायन का दक्षिणायन होना, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु, भाद्र पद, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा, उच्च राशि के चंद्रमा, जन्म के समय वृष लगन, सिंह राशि के सूर्य, कन्या राशि के राहु और मीन राशि के केतु का संयोग इस बार भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय का बन रहा है।
5,241 वर्ष के हो जाएंगे कन्हैया
ज्योतिषाचार्य की गणना के अनुसार इस बार भगवान श्रीकृष्ण 5,241 वर्ष के पूर्ण होकर 5,242वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। दृश्य गणित और श्रीमद्भागवत में उल्लेख है कि कलियुग की अवधि 5,116 वर्ष की हो चुकी है जबकि धरती पर भगवान श्रीकृष्ण की अवधि 125 वर्ष मानी गई है। भागवत में उल्लेख है भगवान श्रीकृष्ण के अपने धाम पधारने के साथ ही कलियुग की शुरुआत हो गई थी। ऐसे में गणित का योग (5,116 वर्ष कलियुग के और 125 वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की आयु को जोड़ें) भगवान श्रीकृष्ण की आयु 5,241 वर्ष होने की पुष्टि करता है।
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इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 5 सितंबर को मनाया जाएगा। दृश्य गणित के अनुसार इस दिन आधी रात को 12:26 बजे से रोहिणी नक्षत्र और 3:56 बजे से अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। रोहिणी नक्षत्र छह सितंबर आधी रात को 12:10 बजे तक और अष्टमी तिथि तड़के 3:02 बजे तक रहेगी।
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ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी बताते हैं कि कई दशकों बाद रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी जन्म के दिन लगभग पूरे दिन साथ रहेगी। इसी दुर्लभ योग से जयंती योग बन रहा है। भगवान श्रीकृष्ण को चंद्रमा का वंशज माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से ठीक पहले 11: 51 बजे पर चंद्रमा का उदय सोने पर सुहागा की तरह है।
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द्वापर में श्रीकृष्ण जन्म के समय के मिल रहे योग
भगवान सूर्य नारायन का दक्षिणायन होना, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु, भाद्र पद, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा, उच्च राशि के चंद्रमा, जन्म के समय वृष लगन, सिंह राशि के सूर्य, कन्या राशि के राहु और मीन राशि के केतु का संयोग इस बार भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय का बन रहा है।
5,241 वर्ष के हो जाएंगे कन्हैया
ज्योतिषाचार्य की गणना के अनुसार इस बार भगवान श्रीकृष्ण 5,241 वर्ष के पूर्ण होकर 5,242वें वर्ष में प्रवेश करेंगे। दृश्य गणित और श्रीमद्भागवत में उल्लेख है कि कलियुग की अवधि 5,116 वर्ष की हो चुकी है जबकि धरती पर भगवान श्रीकृष्ण की अवधि 125 वर्ष मानी गई है। भागवत में उल्लेख है भगवान श्रीकृष्ण के अपने धाम पधारने के साथ ही कलियुग की शुरुआत हो गई थी। ऐसे में गणित का योग (5,116 वर्ष कलियुग के और 125 वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की आयु को जोड़ें) भगवान श्रीकृष्ण की आयु 5,241 वर्ष होने की पुष्टि करता है।