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पाली, परासौली होते श्यामढाक पहुंची ब्रजयात्रा
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Wed, 25 Nov 2015 06:12 PM IST
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श्रीमान मंदिर सेवा संस्थान की ओर से चल रही श्रीराधारानी ब्रजयात्रा बुधवार को मुखराई पड़ाव स्थल से चलकर गांव पाली, परासौली होते राजस्थान के गांव श्याम ढाक पहुंची। राधे-राधे के स्मरण के साथ कठिन डगर पर भी यात्री सहजता के साथ आगे बढ़े चले जा रहे हैं।
यात्रा में चल रहीं भागवताचार्या बालसाध्वी श्रीजी शर्मा ने बताया कि गिरिराज क्षेत्र बहुत से महापुरुषों की भजनस्थली रहा है। गांव यमुनावता अष्टछाप के प्रमुख कवि कुंभनदास की जन्मभूमि है। किसी समय यहां से यमुनाजी की एक धारा प्रवाहित थी। कुंभनदास सिद्ध संत थे।
श्रीनाथजी की भजन गायन की सेवा आप किया करते थे। समान सिंह, अकबर जैसे राजा भी इनके दर्शन करने आते। ऐसे ही चंद्र सरोवर जो सूरदासजी की भजनस्थली है, के दर्शन भी यात्रियों ने किए। महाकवि सूरदास को उनके धामंगमन के समय पुष्टिमार्ग का जहाज इनको गोश्वामीजी ने कहा था। पूंछरी में कृष्ण के बाल सखा पूंछरी के लौठा और श्याम ढाक की महिमा भी श्रीजी शर्मा ने बताई। श्याम ढाक के दोना बड़े प्रसिद्ध थे।
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यात्रा संचालक ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने ब्रज के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ब्रज नष्ट हो रहा है और हम सब बेफिक्र हैं। ब्रज की यमुनाजी के हालात सब को ज्ञात हैं पर क्या सरकार और क्या जनता हम सब को जागना होगा। इस अवसर पर राधाकांत शास्त्री, डा. रामजीलाल शास्त्री, बाबा नृसिंह दास, सुनील सिंह आदि उपस्थित रहे।
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यात्रा में चल रहीं भागवताचार्या बालसाध्वी श्रीजी शर्मा ने बताया कि गिरिराज क्षेत्र बहुत से महापुरुषों की भजनस्थली रहा है। गांव यमुनावता अष्टछाप के प्रमुख कवि कुंभनदास की जन्मभूमि है। किसी समय यहां से यमुनाजी की एक धारा प्रवाहित थी। कुंभनदास सिद्ध संत थे।
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श्रीनाथजी की भजन गायन की सेवा आप किया करते थे। समान सिंह, अकबर जैसे राजा भी इनके दर्शन करने आते। ऐसे ही चंद्र सरोवर जो सूरदासजी की भजनस्थली है, के दर्शन भी यात्रियों ने किए। महाकवि सूरदास को उनके धामंगमन के समय पुष्टिमार्ग का जहाज इनको गोश्वामीजी ने कहा था। पूंछरी में कृष्ण के बाल सखा पूंछरी के लौठा और श्याम ढाक की महिमा भी श्रीजी शर्मा ने बताई। श्याम ढाक के दोना बड़े प्रसिद्ध थे।
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यात्रा संचालक ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने ब्रज के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ब्रज नष्ट हो रहा है और हम सब बेफिक्र हैं। ब्रज की यमुनाजी के हालात सब को ज्ञात हैं पर क्या सरकार और क्या जनता हम सब को जागना होगा। इस अवसर पर राधाकांत शास्त्री, डा. रामजीलाल शास्त्री, बाबा नृसिंह दास, सुनील सिंह आदि उपस्थित रहे।