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भक्ति में थिरकते आदि बद्री धाम पहुंचे ब्रजयात्री
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 29 Nov 2015 11:41 PM IST
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मान मंदिर सेवा संस्थान की ओर से चल रही ब्रज चौरासी कोस यात्रा (श्रीराधारानी ब्रजयात्रा) रविवार को आदि बद्री पहुंच गई। भक्ति, संगीत के बीच भजनों की स्वर लहरियों में थिरकते श्रद्धालु आनंदित हो रहे हैं।
भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने कहा कि पतित पावनी ब्रज वसुंधरा पर श्रीकृष्ण ने समस्त ब्रजवासियों और अपने माता-पिता नंद और यशोदा के तीर्थ दर्शन की प्रबल इच्छा पूर्ति हेतु सभी तीर्थों को स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि यहां विराजमान बद्रीनाथ ही आदि बद्री हैं। मंदिर के पास ही तप्तकुंड है। आगे सघन तरुलताओं में देव सरोवर है, इसका नव निर्माण ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने मान मंदिर के बालक-बालिकाओं के कठोर परिश्रम से इसी वर्ष कराया है।
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ऋषि ने यहीं तपस्या की तब राधामाधव ने उन्हें दर्शन दिए। दर्शन करके ऋषि का शरीर जल रूप हो गया था उसी को पापनाशिनी गंगा कहा गया। सभी यात्रियों से यमुना मुक्तिकरण के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने बद्रीनाथ के चरणों में प्रार्थना की कि वे यमुना महारानी को अविरल और निर्मल करने के प्रयास को सफल बनाएं।
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भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने कहा कि पतित पावनी ब्रज वसुंधरा पर श्रीकृष्ण ने समस्त ब्रजवासियों और अपने माता-पिता नंद और यशोदा के तीर्थ दर्शन की प्रबल इच्छा पूर्ति हेतु सभी तीर्थों को स्थापित किया।
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उन्होंने कहा कि यहां विराजमान बद्रीनाथ ही आदि बद्री हैं। मंदिर के पास ही तप्तकुंड है। आगे सघन तरुलताओं में देव सरोवर है, इसका नव निर्माण ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा ने मान मंदिर के बालक-बालिकाओं के कठोर परिश्रम से इसी वर्ष कराया है।
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ऋषि ने यहीं तपस्या की तब राधामाधव ने उन्हें दर्शन दिए। दर्शन करके ऋषि का शरीर जल रूप हो गया था उसी को पापनाशिनी गंगा कहा गया। सभी यात्रियों से यमुना मुक्तिकरण के संयोजक राधाकांत शास्त्री ने बद्रीनाथ के चरणों में प्रार्थना की कि वे यमुना महारानी को अविरल और निर्मल करने के प्रयास को सफल बनाएं।