{"_id":"5e78a4168ebc3e768b498261","slug":"shree-krishna-birthplace-closed-mathura-news-agr435106087","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण जन्मस्थान में 31 तक श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में 31 तक श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के दर्शन आम भक्तों के लिए 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। ये निर्णय कोरोना के बढ़ते दायरे से लोगों को बचाने के लिए लिया गया है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर श्रद्धालुओं के हित में यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले संस्थान द्वारा 24 मार्च तक बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश को रोका गया था, लेकिन अब 31 मार्च तक मंदिर को आम भक्तों के लिए रोके जाने का निर्णय लिया गया है।
संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यदि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी हम धर्म की रक्षा एवं कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे। अपनी स्वयं की रक्षा तो करनी ही है अपने साथ-साथ अन्य प्राणियों की रक्षा भी हमारा परम कर्तव्य है। संस्थान के संयुक्त मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव के अनुसार पूर्व में भी जब-जब इस प्रकार की महामारी और विपत्ति मानवता पर आई है तो संपूर्ण संत-समाज, मंदिर-देवालय एवं भक्तजन अपने तन-मन-धन से उस विपत्ति से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहे हैं। आज हमारी प्रभुभक्ति एवं देश के प्रति निष्ठा की परीक्षा का समय है। उन्होंने सभी भक्तों से विपत्ति की इस घड़ी में अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान भी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर श्रद्धालुओं के हित में यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले संस्थान द्वारा 24 मार्च तक बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश को रोका गया था, लेकिन अब 31 मार्च तक मंदिर को आम भक्तों के लिए रोके जाने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन
संस्थान के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यदि शरीर स्वस्थ रहेगा तभी हम धर्म की रक्षा एवं कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे। अपनी स्वयं की रक्षा तो करनी ही है अपने साथ-साथ अन्य प्राणियों की रक्षा भी हमारा परम कर्तव्य है। संस्थान के संयुक्त मुख्य अधिशासी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव के अनुसार पूर्व में भी जब-जब इस प्रकार की महामारी और विपत्ति मानवता पर आई है तो संपूर्ण संत-समाज, मंदिर-देवालय एवं भक्तजन अपने तन-मन-धन से उस विपत्ति से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहे हैं। आज हमारी प्रभुभक्ति एवं देश के प्रति निष्ठा की परीक्षा का समय है। उन्होंने सभी भक्तों से विपत्ति की इस घड़ी में अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान भी किया है।
विज्ञापन