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UP: हथियार लेकर नहीं चलता छैमार गैंग, डाॅग स्क्वायड को चकमा देने के लिए करते हैं शाैच; चाैंकाने वाला खुलासा

Mon, 10 Mar 2025 09:18 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अरुन पाराशर Updated Mon, 10 Mar 2025 09:18 PM IST
सार

मथुरा पुलिस ने एक लाख के इनामी गैंगस्टर असद को मुठभेड़ में ढेर किया था। वह छैमार गैंग का सरगना था। कई राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश थी। अब पुलिस ने गैंग के बारे में कई चाैंकाने वाले खुलासे किए हैं।

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Shocking revelations after encounter of Chhaimar gang leader Asad
एनकाउंटर में ढेर हुआ असद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छैमार गैंग का वारदात करने का अपना अलग ही तरीका है। यह गैंग अपने साथ हथियार लेकर नहीं चलता है। क्योंकि हथियार लेकर चलने से रास्ते में पकड़े जाने का डर रहता है। ये अपने पास चाकू, कुल्हाड़ी, लाठी-डंडे और सरिया रखते हैं। इन्हीं से वे डकैती के दौरान हत्याओं को अंजाम देते हैं। 
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डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि छैमार गैंग का वारदात करने का तरीका अलग होता है। यह लोग बावरिया गिरोह की तरह ही काम करते हैं। बावरिया गिरोह के सदस्य भी वारदात करने से पहले घरवालों को बंधक बनाकर मारपीट करते हैं, लेकिन वह घरवालों की हत्या कम करते हैं, लेकिन छैमार गैंग वारदात वाले स्थान पर किसी को जिंदा नहीं छोड़ता है। 

 
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गैंग जब वारदात करने के लिए जाता है तो अपने साथ हथियार लेकर नहीं जाता है। हथियार या तो रास्ते में से एकत्रित किए जाते हैं या फिर पहले से ही वारदात स्थल के पास छिपाकर रख दिए जाते हैं। रेकी के बाद जब घर की छोटी से बड़ी हर जानकारी हो जाती है तो वारदात को अंजाम दिया जाता है। 

 
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हथियार साथ लेकर न चलने के कारण भी उनकी सोच अलग है। गैंग के सदस्य मानते हैं कि रात में यदि उन्हें पुलिस ने देख लिया और रोककर चेकिंग की तो वह पकड़े जा सकते हैं। इसलिए बिना हथियार के चलते हैं और स्वयं को मजदूर बताकर पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर निकल जाते हैं।

 

अपने साथ एक पुराना मिनी ट्रक भी रखते हैं। इसी ट्रक में वारदात के बाद लूटा गया सामान दूसरे शहर में पहुंचाया जाता है। मिनी ट्रक की हालत ऐसी होती है कि कोई शक नहीं कर पाता है। जब माल को दूसरे शहर ले जाते हैं तो मजदूर का वेश धारण कर लेते हैं। वैसे तो यह लोग पूरी प्लानिंग के साथ काम करते हैं, कभी कभार यदि पुलिस चेकिंग में फंस जाते हैं तो मजदूरी करने की बात कहकर बचकर निकल जाते हैं।

 

ऐसे देते हैं डॉग स्क्वायड को चकमा 
पुलिस और डॉग स्क्वायड को भटकाने के लिए गैंग के सभी सदस्य वारदात स्थल से कुछ दूरी पर अलग-अलग स्थान पर शौच करते हैं। पुलिस का डॉग कुछ दूरी का तो पता लगा लेता है, लेकिन इनके शौच करने वाले स्थान के बाद वह भी परेशान हो जाता है। उसे समझ नहीं आता है कि वह आखिर किस ओर जाए। डॉग स्क्वायड को भटकाने के लिए ही छैमार गैंग का यह प्लान होता है।
 
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