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Mathura News: खाली पड़ी डिस्पेंसरी में दी जा रही आत्मरक्षा की डोज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Apr 2025 01:07 AM IST
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Self-defense doses are being given in the vacant dispensary
मथुरा। छावनी डिस्पेंसरी के बाहर जूडो सीखते बच्चे। संवाद - फोटो : mathura
शुभम शर्मा
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मथुरा। कैंटोनमेंट की खाली पड़ी डिस्पेंसरी में बच्चों को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं। हालांकि यह कैंटोनमेंट की सी वन लैंड है। यहां संचालित होने वाली डिस्पेंसरी रेजीमेंटल बाजार के पास शिफ्ट की जा चुकी है। बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को प्रेमपाल निखारने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।

मयूर विहार से चंदनवन जाने वाले मार्ग पर छावनी परिषद की डिस्पेंसरी काफी समय से बंद है। ऐसे में प्रेमपाल यहां बच्चों को मार्शल आर्ट्स, कराटे और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनका उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा में चार चांद लगाकर उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने का सपना पूरा करना है। यहां पांच वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक की आयु के करीब 40 बच्चे प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं। इनमें से कई बच्चों को वह निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। संवाद
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तीन बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर जीते पदक

प्रेमपाल ने बताया कि बीते वर्ष दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में एंग्जोक रोंगपि ने स्वर्ण पदक जीतकर मथुरा का नाम रोशन किया था। अंशिका धनगर ने रजत और रुशिका श्री फौजदार ने कांस्य पदक पर कब्जा किया था। पिछले साल ही लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में अभिषेक, मानसी चौधरी और बी शिवांशी ने रजत पदक जीते।
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पारंगत होने के बाद बच्चों को दिलाया जाता है ट्रायल

उन्होंने बताया कि अपनी विधा में पारंगत हो जाने के बाद बच्चों को एसोसिएशन की ओर से आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगिता में हिस्सा दिलाने के लिए उनका ट्रायल कराया जाता है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं।




व्यावसायिक गतिविधि के लिए लेनी होगी अनुमति

छावनी परिषद सीईओ दिव्या आर का कहना है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के मामले में छावनी बोर्ड की अनुमति प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना होता है। इस जमीन पर व्यावसायिक गतिविधि तो नहीं हो रही, इसे दिखवाया जाएगा।
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