{"_id":"6a19ec7cd0e8c7caac0a6b4f","slug":"saint-premanand-did-not-visit-saubhari-forest-amidst-devotees-mathura-news-c-161-1-vrn1004-102942-2026-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Premanand: पदयात्रा छोड़ अचानक एकांतवास में चले गए प्रेमानंद महाराज, इसलिए बदल दिया कार्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Premanand: पदयात्रा छोड़ अचानक एकांतवास में चले गए प्रेमानंद महाराज, इसलिए बदल दिया कार्यक्रम
Sat, 30 May 2026 08:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 08:41 AM IST
सार
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज की प्रस्तावित पदयात्रा अचानक स्थगित हो गई और वे भक्तों के दर्शन दिए बिना यमुना किनारे एकांतवास के लिए निकल गए। सुबह शुरू होने वाली यात्रा के बजाय वह कार से आश्रम से रवाना होकर शाम तक यमुना तट की कुटिया में सेवकों के साथ रहे।
विज्ञापन
संत प्रेमानंद महाराज।
विस्तार
दस दिन के बाद संत प्रेमानंद महाराज की शुक्रवार से रमणरेती स्थित आश्रम से सौभरि वन तक पदयात्रा शुरु होनी थी लेकिन संत अपने अनुयायियों को बिना दर्शन दिए कार से यमुना किनारे एकांतवास में चले गए।
यमुना किनारे बनीं कुटिया में वह सुबह से देर शाम तक सेवकों के साथ रहे। रमणरेती स्थित संत प्रेमानंद के आश्रम श्रीहित राधाकेलि कुंज द्वारा बताया गया कि संत दस दिनो के बाद शुक्रवार तड़के यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। तीन बजे सौभरि वन में संत दर्शन भक्तों को होंगे, लेकिन शुक्रवार सुबह अचानक कार्यक्रम में बदलाव हो गया।
संत प्रेमानंद महाराज पदयात्रा कर सौभरि वन नहीं पहुंचे। वह कार से सुबह नौ बजे यमुना किनारे एकांतवास के लिए आश्रम से निकले। यमुना तट पर बनी कुटिया पर संत प्रेमानंद अपने सेवकों के साथ शाम छह बजे तक एकांतवास में रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यमुना किनारे बनीं कुटिया में वह सुबह से देर शाम तक सेवकों के साथ रहे। रमणरेती स्थित संत प्रेमानंद के आश्रम श्रीहित राधाकेलि कुंज द्वारा बताया गया कि संत दस दिनो के बाद शुक्रवार तड़के यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। तीन बजे सौभरि वन में संत दर्शन भक्तों को होंगे, लेकिन शुक्रवार सुबह अचानक कार्यक्रम में बदलाव हो गया।
विज्ञापन
संत प्रेमानंद महाराज पदयात्रा कर सौभरि वन नहीं पहुंचे। वह कार से सुबह नौ बजे यमुना किनारे एकांतवास के लिए आश्रम से निकले। यमुना तट पर बनी कुटिया पर संत प्रेमानंद अपने सेवकों के साथ शाम छह बजे तक एकांतवास में रहे।
विज्ञापन