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‘गेट खुला रखने के लिए दी थी धमकी’
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 03 Jul 2015 11:55 PM IST
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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में मुख्य सचिव और प्रशासनिक अधिकारियों को भोजन कराकर परंपरा तोड़ने और कोर्ट के आदेश की अवहेलना मामले में मंदिर प्रबंध कमेटी की जांच जारी है। प्रबंध कमेटी सेवायतों और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई का मन बना चुकी है। 30 जून की रात में तैनात आठ कर्मचारियों में से दो को गुरुवार को निलंबित करने के बाद कमेटी ने उनके बयान दर्ज किए हैं। कर्मचारियों ने बताया है कि मंदिर का गेट खुला रखने के लिए उन्हें धमकाया गया था।
सूत्रों के अनुसार निलंबित कर्मचारी तोताराम ने प्रबंध कमेटी को बताया कि 30 जून को रात में करीब 10 बजे वह मंदिर के गेट नंबर दो को बंद कर रहे थे। इस दौरान सेवायत आनंद गोस्वामी और जुगल गोस्वामी ने उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के भोजन के लिए आने की जानकारी दी और गेट खुला रखने के लिए कहा। आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वहां आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकाया।
इसके बाद उन्हें बाहर सेवायतों की गद्दी पर बैठा लिया। इसी कारण वह प्रशासनिक अधिकारियों के मंदिर परिसर में भोजन करने की जानकारी मंदिर प्रबंधन को नहीं दे सके। मामले में मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु का कहना है कि रात्रि कर्मचारियों से पूछा जा रहा है कि आखिर उन्होंने किन हालातों में मंदिर का दरवाजा खोला। दबाव वाले प्रश्न पर उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को धमकाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने से मंदिर प्रबंध कमेटी पीछे नहीं हटेगी।
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डाक से भेजा नोटिस
बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी ने शुक्रवार को सेवायतों को डाक से नोटिस भेजा। इससे पहले गुरुवार को कर्मचारियों के हाथ भेजे गए नोटिस को सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल किशोर गोस्वामी ने लेने से इंकार कर दिया था। कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु का कहना है कि अगर सेेवायत नोटिस का जबाव नहीं देते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कमेटी की नियमावली के अनुसार मंदिर की परंपराओं का उल्लंघन करने या नियम तोड़ने पर दोषी सेवायत के खिलाफ कमेटी की बैठक में जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में प्रति व्यक्ति दस हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इस हिसाब से सेवायतों पर 7 लाख 50 हजार का जुर्माना लग सकता है।
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सूत्रों के अनुसार निलंबित कर्मचारी तोताराम ने प्रबंध कमेटी को बताया कि 30 जून को रात में करीब 10 बजे वह मंदिर के गेट नंबर दो को बंद कर रहे थे। इस दौरान सेवायत आनंद गोस्वामी और जुगल गोस्वामी ने उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के भोजन के लिए आने की जानकारी दी और गेट खुला रखने के लिए कहा। आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वहां आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकाया।
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इसके बाद उन्हें बाहर सेवायतों की गद्दी पर बैठा लिया। इसी कारण वह प्रशासनिक अधिकारियों के मंदिर परिसर में भोजन करने की जानकारी मंदिर प्रबंधन को नहीं दे सके। मामले में मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु का कहना है कि रात्रि कर्मचारियों से पूछा जा रहा है कि आखिर उन्होंने किन हालातों में मंदिर का दरवाजा खोला। दबाव वाले प्रश्न पर उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को धमकाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने से मंदिर प्रबंध कमेटी पीछे नहीं हटेगी।
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डाक से भेजा नोटिस
बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी ने शुक्रवार को सेवायतों को डाक से नोटिस भेजा। इससे पहले गुरुवार को कर्मचारियों के हाथ भेजे गए नोटिस को सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल किशोर गोस्वामी ने लेने से इंकार कर दिया था। कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु का कहना है कि अगर सेेवायत नोटिस का जबाव नहीं देते हैं तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कमेटी की नियमावली के अनुसार मंदिर की परंपराओं का उल्लंघन करने या नियम तोड़ने पर दोषी सेवायत के खिलाफ कमेटी की बैठक में जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में प्रति व्यक्ति दस हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इस हिसाब से सेवायतों पर 7 लाख 50 हजार का जुर्माना लग सकता है।