फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   rti application about baba jaygurudev

एक और आरटीआई देख चकराए अफसर

Thu, 23 Feb 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 23 Feb 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
rti application about baba jaygurudev
आरटीआई
जिले में पहुंचे एक और आरटीआई (सूचना का अधिकार) प्रार्थना पत्र को देखकर अधिकारी चकरा गए हैं। इसमें प्रार्थी ने जो सवाल पूछे हैं, वे लगभग वही हैं जिन्हें लेकर रामवृक्ष यादव ने अपना कथित सत्याग्रह शुरू किया था। इसके बाद वह जवाहर बाग में कब्जा कर बैठ गया।   
विज्ञापन


उन्नाव के गांव बछौली निवासी विनोद कुमार मौर्य ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सात बिंदुओं पर डीएम से जानकारी मांगी है। इसमें बाबा जयगुरुदेव को आजाद हिंद फौज का नेता सुभाष चंद्र बताया है और राष्ट्रपति की नागरिकता का आधार पूछा है। प्रार्थी ने आजाद हिंद फौज को 10 देशों को समर्थन बताते हुए स्वतंत्र भारत में राष्ट्रपति का निर्वाचन करने वाले शासक और विधिक प्रक्रिया की जानकारी के साथ शासक की प्रमाणित फोटो आईडी भी मांगी है। 
विज्ञापन


प्रार्थी ने यह भी पूछा है कि क्या समस्त निर्वाचित व्यक्तियों को ईश्वर की शपथ कराई जाती है। यदि हां, तो उन ईश्वर का नाम, रूप और स्थान की प्रमाणित प्रति भी उपलब्ध कराएं। निर्वाचन सहित विभिन्न आयोग का गठन करने वाले सम्राट शासक की फोटो आईडी सहित वैध विधिक विधि की प्रमाणित प्रति भी मांगी है। स्वतंत्रता दिवस मनाने का आदेश देने वाले शासक सम्राट की प्रमाणित फोटो आईडी मांगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रार्थना पत्र के अंत में उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के बयान ‘भारत में विधि का शासन है, किसी से डरने की जरूरत नहीं है’ का हवाला देते हुए पूछा है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस उर्फ बाबा जयगुरुदेव कूटरचित तुलसीदास विचाराधीन बंदी (किडनैप बाडी) को क्या रिहा करेंगे। मामले में सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव ने जवाब देते हुए कहा है कि उपरोक्त सूचनाओं से संबंधित कोई अभिलेख नहीं हैं। सूचना नहीं दी जा सकती है। 

बता दें कि राष्ट्रपति की नागरिकता जैसे सवालों को लेकर ही गाजीपुर के रामवृक्ष यादव ने अपना कथित सत्याग्रह शुरू किया था। वह भी खुद को जयगुरुदेव का अनुयायी बताता था। अपने सवालों के जवाब को लेकर उसने मथुरा के राजकीय उद्यान जवाहर बाग में सत्याग्रह के नाम पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद जवाहर बाग को करीब दो साल बाद पुलिस कार्रवाई के जरिए मुक्त कराया जा सका। जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष यादव की मौत का दावा पुलिस ने किया है। ऐसे में एक बार फिर आरटीआई के जरिए वही सवाल उभरने से अफसर चकरा गए हैं।   


जवाहर बाग हिंसा में अब तक 443 की हुई गवाही
जवाहर बाग हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की जांच में अब तक 443 लोगों की गवाही हो चुकी है। बुधवार को 25 पुलिसकर्मी आयोग के समक्ष पेश हुए। अब सात, आठ और नौ मार्च को गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

मथुरा के जवाहर बाग में दो जून को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। 100 से भी ज्यादा घायल हो गए थे। शासन ने मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था। जून से ही न्यायिक आयोग लगातार जांच कर रहा है। पहले सभी के शपथ पत्र लिए गए और उसके बाद बयान दर्ज कराए गए। अब सभी की गवाही कराई जा रही है।


बुधवार को न्यायिक आयोग के समक्ष आपरेशन जवाहर बाग में शामिल रहे 25 पुलिस कर्मी पेश हुए और गवाही दी। अब तक कुल 443 लोगों की गवाही हो चुकी है। न्यायिक आयोग के सचिव पीके गोयल ने बताया कि अब सात, आठ और नौ मार्च को गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। अपना पक्ष रखने के लिए अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed