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ग्रामोत्थान को संघ-शांति कुंज साथ-साथ
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/फरह
Updated Mon, 13 Apr 2015 11:59 PM IST
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अंत्योदय के उपासक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली में तीन दिन तक चले अभ्यास शिविर में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को साकार करने का तानाबाना बुना गया। वक्ताओं ने ग्राम संकुल योजना के माध्यम से गांवों को स्वावलंबी बनाने की रूपरेखा तैयार की। इस दौरान युग निर्माण योजना शांति कुंज हरिद्वार के डॉ. चिन्मय पांड्या ने संघ की ग्राम संकुल योजना मेें सहयोग देने की बात कही।
नगला चंद्रभान स्थित दीनदयाल धाम में शुक्रवार से रविवार तक चले शिविर में डॉ. दिनेश, डॉ. रोशनलाल और शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने विचार रखे। ग्राम संकुल योजना के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. महेश शर्मा ने ग्राम संकुलों में आज की स्थिति पर व्याख्यान दिया।
इसमें कृषि, पशुपालन, वानिकी, गौ पालन और जैविक खेती पर चर्चा की गई। शंकरलाल, दिनेश कुलकर्णी, डॉ. गजानन डांगे, धर्मपाल सिंह आदि ने व्यवहारिक तर्क दिए। अध्यक्षता डॉ. जितेंद्र बजाज ने की। लघु-मध्यम ग्रामोद्योग और आज की स्थिति, संभावनाओं पर चिंतन में आलोक गुप्ता, डॉ. ओमपाल, नंदकिशोर अग्रवाल और डॉ. एनएस तोमर ने योजना की गहनता बताई। अध्यक्षीय संबोधन सिद्धिनाथ सिंह का रहा।
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आरएसएस के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने संकुल ग्रामों में आने वाली चुनौतियों पर फोकस किया। तुलसी टावरी, सौरभ गुप्ता, प्रो. वीके विजय, नरेश सिरोही और प्रो. विवक ने तकनीकी लाभ-हानि पर मंथन किया। रविवार को समापन सत्र में ग्राम विकास में अनुभवों से सीख और आगे सुधार पर चिंतन हुआ। डॉ. बजरंग लाल और डॉ. दिनेश ने दिशा-दृष्टि और ग्राम संकुलों की संरचना पर ध्यान केंद्रित किया। गोपीनाथ अग्निहोत्री, जगमोहन पाठक, घनश्याम गुप्ता, डॉ. रमेशपाल सिंह का विशेष सहयोग रहा।
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नगला चंद्रभान स्थित दीनदयाल धाम में शुक्रवार से रविवार तक चले शिविर में डॉ. दिनेश, डॉ. रोशनलाल और शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने विचार रखे। ग्राम संकुल योजना के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. महेश शर्मा ने ग्राम संकुलों में आज की स्थिति पर व्याख्यान दिया।
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इसमें कृषि, पशुपालन, वानिकी, गौ पालन और जैविक खेती पर चर्चा की गई। शंकरलाल, दिनेश कुलकर्णी, डॉ. गजानन डांगे, धर्मपाल सिंह आदि ने व्यवहारिक तर्क दिए। अध्यक्षता डॉ. जितेंद्र बजाज ने की। लघु-मध्यम ग्रामोद्योग और आज की स्थिति, संभावनाओं पर चिंतन में आलोक गुप्ता, डॉ. ओमपाल, नंदकिशोर अग्रवाल और डॉ. एनएस तोमर ने योजना की गहनता बताई। अध्यक्षीय संबोधन सिद्धिनाथ सिंह का रहा।
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आरएसएस के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने संकुल ग्रामों में आने वाली चुनौतियों पर फोकस किया। तुलसी टावरी, सौरभ गुप्ता, प्रो. वीके विजय, नरेश सिरोही और प्रो. विवक ने तकनीकी लाभ-हानि पर मंथन किया। रविवार को समापन सत्र में ग्राम विकास में अनुभवों से सीख और आगे सुधार पर चिंतन हुआ। डॉ. बजरंग लाल और डॉ. दिनेश ने दिशा-दृष्टि और ग्राम संकुलों की संरचना पर ध्यान केंद्रित किया। गोपीनाथ अग्निहोत्री, जगमोहन पाठक, घनश्याम गुप्ता, डॉ. रमेशपाल सिंह का विशेष सहयोग रहा।