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Mathura News: समधी की तरह आज गले मिलेंगे नंदगांव-बरसाना के समाजी
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नंदगांव। राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण के शास्वत प्रेम के गवाह नंदगांव और बरसाना के रिश्तों की मिठास एक बार फिर देखने को मिलेगी। राधाष्टमी के अवसर पर होने वाले समाज गायन में नंदगांव और बरसाना के समाजी केवल पदों का गायन ही नहीं करेंगे, बल्कि समधी के रिश्ते की तरह एक-दूसरे से गले मिलकर ब्रज की अनूठी परंपरा को भी जीवंत करेंगे। इस दौरान बरसाना के वयोवृद्ध गोप की ओर से नंदगांव के वयोवृद्ध गोप को समध्यौरा किया जाएगा।
नंदगांव और बरसाना के लोगों के संबंधों को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के प्रेम से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि दोनों गांवों के उत्सवों में आज भी आपसी रिश्तों और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक दिखाई देती है। राधाष्टमी पर बरसाना के गोप, वृषभानु बाबा की ओर से नंदबाबा के प्रतिनिधि गोप को समध्यौरा करते हैं। बारात में कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को दी जाने वाली दक्षिणा की तरह ही इसे ब्रज में समधी मिलनी की परंपरा माना जाता है। नंदगांव-बरसाना की समाज में गाए जाने वाले पदों में राधा-कृष्ण के जन्म से पहले ही दोनों माताओं के बीच सगाई होने का उल्लेख मिलता है ‘कीरति जसुमति के बचन भये सगाई जोग’। इसके बाद गर्ग संहिता में भांडीरवन में राधा-कृष्ण के विवाह का भी उल्लेख मिलता है।नंदबाबा मंदिर के सेवायत लोकेश गोस्वामी ने बताया कि राधाष्टमी के समाज में बरसाना के वयोवृद्ध द्वारा नंदगांव के वयोवृद्ध गोप को बाकायदा समध्यौरा किया जाता है। मिलनी के दौरान दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं तथा दोनों पक्ष एक-दूसरे से गले मिलकर समधी का रिश्ता निभाते हैं। सोहले में दोनों समाधि अंक भर-भर के मिले। यह परंपरा नंदगांव-बरसाना के सदियों पुराने आत्मीय संबंधों की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
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नंदगांव और बरसाना के लोगों के संबंधों को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के प्रेम से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि दोनों गांवों के उत्सवों में आज भी आपसी रिश्तों और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक दिखाई देती है। राधाष्टमी पर बरसाना के गोप, वृषभानु बाबा की ओर से नंदबाबा के प्रतिनिधि गोप को समध्यौरा करते हैं। बारात में कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को दी जाने वाली दक्षिणा की तरह ही इसे ब्रज में समधी मिलनी की परंपरा माना जाता है। नंदगांव-बरसाना की समाज में गाए जाने वाले पदों में राधा-कृष्ण के जन्म से पहले ही दोनों माताओं के बीच सगाई होने का उल्लेख मिलता है ‘कीरति जसुमति के बचन भये सगाई जोग’। इसके बाद गर्ग संहिता में भांडीरवन में राधा-कृष्ण के विवाह का भी उल्लेख मिलता है।नंदबाबा मंदिर के सेवायत लोकेश गोस्वामी ने बताया कि राधाष्टमी के समाज में बरसाना के वयोवृद्ध द्वारा नंदगांव के वयोवृद्ध गोप को बाकायदा समध्यौरा किया जाता है। मिलनी के दौरान दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं तथा दोनों पक्ष एक-दूसरे से गले मिलकर समधी का रिश्ता निभाते हैं। सोहले में दोनों समाधि अंक भर-भर के मिले। यह परंपरा नंदगांव-बरसाना के सदियों पुराने आत्मीय संबंधों की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
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