{"_id":"645db0368ef3d8cefc62758595ad7ffc","slug":"relegious-functin-in-vrindavan-chandroday-mandir-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गौर पूर्णिमा पर मनाया चैतन्य महाप्रभु का जन्मोत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौर पूर्णिमा पर मनाया चैतन्य महाप्रभु का जन्मोत्सव
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Fri, 06 Mar 2015 12:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अक्षय पात्र के वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में गुरुवार की देर शाम चैतन्य महाप्रभु का जन्मोत्सव गौर पूर्णिमा के रूप में मनाया गया। एसी भक्तिवेदांत प्रभुपाद की प्रेरणा से आयोजित समारोह में चैतन्य महाप्रभु को 108 भोग अर्पण किए गए।
चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु के श्रीविग्रह का पंचगव्यों से अभिषेक कराया। 51 प्रकार के फूल अर्पित किए। 21 प्रकार की आरती हुई।
मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार चैतन्य महाप्रभु का जन्म पश्चिम बंगाल के नदिया जिला में 15वीं शताब्दी में हुआ। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन का पूरे भारतवर्ष में प्रचार किया।
चंद्रोदय मंदिर के भक्तों को मंदिर के निर्माण कार्य का विवरण प्रस्तुत किया। चैतन्य महाप्रभु के पदचिह्नों पर चलकर आध्यात्मिक जीवन को प्राप्त करने की अपील की। इस अवसर पर महंत फूलडोल बिहारी दास, सुतीक्ष्णदास महाराज, आदित्यानंद महाराज, चित्प्रकाशानंद, सुरेशानंद महाराज, मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, हरिबोल महाराज आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु के श्रीविग्रह का पंचगव्यों से अभिषेक कराया। 51 प्रकार के फूल अर्पित किए। 21 प्रकार की आरती हुई।
मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार चैतन्य महाप्रभु का जन्म पश्चिम बंगाल के नदिया जिला में 15वीं शताब्दी में हुआ। उन्होंने हरिनाम संकीर्तन का पूरे भारतवर्ष में प्रचार किया।
विज्ञापन
चंद्रोदय मंदिर के भक्तों को मंदिर के निर्माण कार्य का विवरण प्रस्तुत किया। चैतन्य महाप्रभु के पदचिह्नों पर चलकर आध्यात्मिक जीवन को प्राप्त करने की अपील की। इस अवसर पर महंत फूलडोल बिहारी दास, सुतीक्ष्णदास महाराज, आदित्यानंद महाराज, चित्प्रकाशानंद, सुरेशानंद महाराज, मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, हरिबोल महाराज आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन