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Mathura News: कैशलेस बीमा देने से मुकरना पड़ा महंगा
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मथुरा। अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज का कैशलेस बिल अदा करने से मना करना स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को 1,47,187 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें इलाज का खर्च, मानसिक एवं आर्थिक परेशानी और वाद व्यय शामिल हैं।
शहर के पदमपुरी निवासी सौरभ गौतम ने 22 अगस्त 2025 को आयोग में कंपनी के प्रबंधक के खिलाफ वाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने दो मार्च 2025 से एक मार्च 2026 तक उनके, उनकी पत्नी नेहा गौतम और पुत्री गौरांशी गौतम के लिए 10 लाख रुपये तक की कैशलेस बीमा पॉलिसी जारी की थी।
सौरभ गौतम के अनुसार, 16 जून 2025 को अचानक सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन ने उन्हें नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया। कंपनी को सूचना देने पर 17 जून को 40 हजार रुपये तक की कैशलेस सुविधा मंजूर की गई, लेकिन अगले दिन इसे वापस ले लिया गया। इसके बाद इलाज पर हुए 1,32,187 रुपये का भुगतान उन्हें स्वयं करना पड़ा।
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मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल ने की। आयोग ने कंपनी को इलाज के खर्च के 1,32,187 रुपये, मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। इस तरह कंपनी को कुल 1,47,187 रुपये का भुगतान करना होगा।
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शहर के पदमपुरी निवासी सौरभ गौतम ने 22 अगस्त 2025 को आयोग में कंपनी के प्रबंधक के खिलाफ वाद दायर किया था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने दो मार्च 2025 से एक मार्च 2026 तक उनके, उनकी पत्नी नेहा गौतम और पुत्री गौरांशी गौतम के लिए 10 लाख रुपये तक की कैशलेस बीमा पॉलिसी जारी की थी।
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सौरभ गौतम के अनुसार, 16 जून 2025 को अचानक सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन ने उन्हें नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया। कंपनी को सूचना देने पर 17 जून को 40 हजार रुपये तक की कैशलेस सुविधा मंजूर की गई, लेकिन अगले दिन इसे वापस ले लिया गया। इसके बाद इलाज पर हुए 1,32,187 रुपये का भुगतान उन्हें स्वयं करना पड़ा।
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मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल ने की। आयोग ने कंपनी को इलाज के खर्च के 1,32,187 रुपये, मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। इस तरह कंपनी को कुल 1,47,187 रुपये का भुगतान करना होगा।