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Mathura News: पुरानी वक्फ संपत्तियों का नहीं मिल रहा रिकॉर्ड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 01:11 AM IST
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Records of old waqf properties not available
मथुरा वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करती वक्फ कोऑर्डिनेटर डॉ शबनम कुरैशी।
मथुरा। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का पंजीकरण पांच दिसंबर तक उम्मीद पोर्टल पर कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन अब तक जनपद की 80 प्रतिशत संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। अंतिम तिथि नजदीक आते ही वक्फ संपत्ति के मुतवल्लियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इनका कहना है कि दशकों पुराने कागजात इकट्ठा करने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण वह अब तक संपत्ति का पंजीकरण कराने में नाकाम रहे हैं।
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परेशान मुतवल्ली दस्तावेज जुटाने के लिए तहसील और वक्फ बोर्ड समेत अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 920 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। इनका पंजीकरण पांच दिसंबर तक उम्मीद पोर्टल पर होना है, लेकिन अब तक महज 20 प्रतिशत संपत्तियों का ही पंजीकरण हुआ है। वक्फ कॉर्डिनेटर शबनम कुरैशी का कहना है कि कई संपत्तियों के मुतवल्लियों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है, जिससे इन संपत्तियों के रिकॉर्ड जुटा पाना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। मुतवल्लियों से कई तरह के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिसमें वक्फनामा, खसरा खतौनी, नक्शा प्रमुख हैं। कई संपत्तियों के रिकॉर्ड लोकल स्तर पर मौजूद नहीं हैं। संबंधित लोग लखनऊ स्थित वक्फ बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
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पंजीकरण करते समय पोर्टल पर संपत्ति की सभी दिशाओं से नाप-जोख का लेखा-जोखा मांगा गया है। साथ ही संपत्ति के वक्फ होने के भी दस्तावेज मांगे गए हैं। चूंकि संपत्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है, इसलिए दस्तावेज जुटाने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सदर बाजार में स्थित गुलाब शाह दरगाह का कोई दस्तावेज राजस्व रिकॉर्ड में नही हैं।
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-मौलाना मेराज अली, खादिम
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कैंट क्षेत्र के गोल्फ कब्रिस्तान में स्थित मस्जिद करीब सौ वर्ष पुरानी है। इसके कोई दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। लखनऊ तक दौड़ लगाई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। सैकड़ों वर्ष पुरानी संपत्ति का नक्शा या अन्य दस्तावेज जुटाना सभी के लिए मुश्किल है। रजिस्ट्रेशन की समय सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि लोग अपनी संपत्ति का पंजीकरण कर सकें।
- पप्पू, खादिम
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ये हैं दिक्कतें
कुछ संपत्तियों के मुतवल्लियों का निधन हो गया है।
कई मुतवल्लियों को जानकारी का अभाव है।
वक्फनामा, नक्शा, दफा-37 की रिपोर्ट जैसे दस्तावेज न होने के चलते समस्या आ रही है।
लोगों के पास वक्फ संपत्ति नंबर नहीं हैं, जिससे दस्तावेज भी नहीं मिल पा रहे हैं।
वेबसाइट धीमी होने से फॉर्म नहीं भर पा रहे।
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वेबसाइट पर भी आ रही है दिक्कत
शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव तनवीर अहमद का कहना कि उम्मीद पोर्टल की वेबसाइट काफी धीमी गति से चल रही है। लोगों को पंजीकरण कराते समय घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। लॉग-इन करने पर गांव, वार्ड, शहर आदि खोजने में दिक्कत होती है। सुबह के समय वेबसाइट कुछ ठीक चलती है, लेकिन दोपहर के बाद वेबसाइट काम करना ही बंद कर देती है और मिनटों का काम घंटों में भी पूरा नहीं हो पाता है।

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जो लोग पूरे कागजात के साथ दफ्तर पहुंच रहे हैं, उनके पंजीकरण कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि तय समय सीमा में अधिक से अधिक संपत्ति पंजीकृत हो जाएं। लोड ज्यादा होने से वेबसाइट की रफ्तार कई बार धीमी हो जाती है, लेकिन फिर भी पंजीकरण हो रहे हैं। नीलमा सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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