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दिल्ली में तैयार हुई थी रामवृक्ष की डर्टी कंपनी
पुनीत शर्मा
Updated Thu, 16 Jun 2016 11:26 PM IST
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jawahar bagh
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जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष की डर्टी कंपनी दिल्ली में तैयार हुई थी। दरअसल रामवृक्ष, चंदनबोस, राकेश गुप्ता और वीरेश बाबा जयगुरुदेव के लुधियाना में हुए सत्संग से वापस लौट रहे थे। एक रात के लिए यह लोग दिल्ली में रुके। यहां रामवृक्ष ने कहा था कि वह बाबा जयगुरुदेव का उत्तराधिकारी है और सारी व्यवस्थाएं देखता है। बस यहीं इन चारों का गठजोड़ बन गया।
गाजीपुर जनपद के गांव रामपुर बांगसुर निवासी रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य था। प्रदेश और प्रदेश से बाहर जहां भी बाबा जयगुरुदेव की संगत होती थी वह वहां जाता था। चंदनबोस भी जयगुरुदेव से जुड़ा हुआ था। बदायूं का राकेश गुप्ता और वीरेश भी बाबा के अनुयायी थे। 2010 से ही यह लोग रामवृक्ष के संपर्क में आए। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया कि जब बाबा जयगुरुदेव का निधन हुआ तो रामवृक्ष ने खुद को उनका उत्तराधिकारी साबित करने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी थी। उस वक्त भी यह तीनों रामवृक्ष के साथ थे।
शिवपूजन पटेल ने लगा रखी थी बड़ी रकम
सिद्धार्थ नगर निवासी शिवपूजन पटेल नाम का शख्स रामवृक्ष का सबसे बड़ा मददगार बताया जा रहा है। चंदनबोस ने जो पूछताछ में पुलिस को बताया है उसके मुताबिक चीनी, दाल, मसाले और नमक की व्यवस्था उसने ही कराई थी। शिवपूजन ने ही कहा था कि वह लोग जवाहर बाग में बाजार लगाकर सस्ती चीनी, दाल, फल, मसाले और सब्जी बेचें। इससे मथुरा वालों के दिलों में जगह बना सकेंगे। इससे लोग उनका विरोध करना बंद कर देंगे।
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कई दफा बने जयगुरुदेव आश्रम पर हमले के प्लान
चंदनबोस ने पुलिस को बताया कि रामवृक्ष किसी भी हाल में बाबा जयगुुरुदेव के आश्रम पर काबिज होना चाहता था। इसके लिए कई दफा प्रयास किया। लोगों को इकट्ठा करके आश्रम पर हमला करने तक की योजना थी।
कई जगह जमीनों पर कब्जे की थी तैयारी
बस्ती से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के करीबी चंदनबोस ने जो पुलिस को बताया है वह वाकई चौंकाने वाला है। चंदनबोस के अनुसार रामवृक्ष अपने संगठन को विस्तार देकर प्रदेश में कई जगह सरकारी भूमि या बाग पर कब्जा करने की तैयारी में था। इसके लिए कोशिश भी शुरू हो गई थी। चंदनबोस का कहना है कि बरेली के लखीमपुर में तो आज भी लोग जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। कुछ बड़े आश्रमों पर भी उसकी निगाह थी।
एनसीआर में ढूंढ रहे थे ठिकाना
रामवृक्ष और उसके लोग दिल्ली और आसपास के जिलों में भी ठिकाना ढूंढ रहे थे। उनका मकसद था कि अगर आसपास कोई भूमि कब्जा ली जाएगी तो वह लोग राजधानी में अपनी जगह बना सकेंगे। यहां से दूसरे राज्यों में भी संगठन को खड़ा किया जा सकेगा।
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गाजीपुर जनपद के गांव रामपुर बांगसुर निवासी रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य था। प्रदेश और प्रदेश से बाहर जहां भी बाबा जयगुरुदेव की संगत होती थी वह वहां जाता था। चंदनबोस भी जयगुरुदेव से जुड़ा हुआ था। बदायूं का राकेश गुप्ता और वीरेश भी बाबा के अनुयायी थे। 2010 से ही यह लोग रामवृक्ष के संपर्क में आए। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया कि जब बाबा जयगुरुदेव का निधन हुआ तो रामवृक्ष ने खुद को उनका उत्तराधिकारी साबित करने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी थी। उस वक्त भी यह तीनों रामवृक्ष के साथ थे।
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शिवपूजन पटेल ने लगा रखी थी बड़ी रकम
सिद्धार्थ नगर निवासी शिवपूजन पटेल नाम का शख्स रामवृक्ष का सबसे बड़ा मददगार बताया जा रहा है। चंदनबोस ने जो पूछताछ में पुलिस को बताया है उसके मुताबिक चीनी, दाल, मसाले और नमक की व्यवस्था उसने ही कराई थी। शिवपूजन ने ही कहा था कि वह लोग जवाहर बाग में बाजार लगाकर सस्ती चीनी, दाल, फल, मसाले और सब्जी बेचें। इससे मथुरा वालों के दिलों में जगह बना सकेंगे। इससे लोग उनका विरोध करना बंद कर देंगे।
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कई दफा बने जयगुरुदेव आश्रम पर हमले के प्लान
चंदनबोस ने पुलिस को बताया कि रामवृक्ष किसी भी हाल में बाबा जयगुुरुदेव के आश्रम पर काबिज होना चाहता था। इसके लिए कई दफा प्रयास किया। लोगों को इकट्ठा करके आश्रम पर हमला करने तक की योजना थी।
कई जगह जमीनों पर कब्जे की थी तैयारी
बस्ती से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के करीबी चंदनबोस ने जो पुलिस को बताया है वह वाकई चौंकाने वाला है। चंदनबोस के अनुसार रामवृक्ष अपने संगठन को विस्तार देकर प्रदेश में कई जगह सरकारी भूमि या बाग पर कब्जा करने की तैयारी में था। इसके लिए कोशिश भी शुरू हो गई थी। चंदनबोस का कहना है कि बरेली के लखीमपुर में तो आज भी लोग जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। कुछ बड़े आश्रमों पर भी उसकी निगाह थी।
एनसीआर में ढूंढ रहे थे ठिकाना
रामवृक्ष और उसके लोग दिल्ली और आसपास के जिलों में भी ठिकाना ढूंढ रहे थे। उनका मकसद था कि अगर आसपास कोई भूमि कब्जा ली जाएगी तो वह लोग राजधानी में अपनी जगह बना सकेंगे। यहां से दूसरे राज्यों में भी संगठन को खड़ा किया जा सकेगा।