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जस दूलहु तस बनी बराता...
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Thu, 08 Oct 2015 12:19 AM IST
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जस दूलहु तस बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।
इहां हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना॥
श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में ‘शिव-पार्वती विवाह’ की लीला देख श्रद्धालु गदगद हो गए। श्रीरामलीला सभा के तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में सबसे ज्यादा आकर्षक शिवजी की बारात रही।
लीला मंचन के दौरान हिमालय के राजा हिमवान और रानी मैनावती के यहां पार्वती का जन्म हुआ। नारदजी ने हिमवान से पार्वती के सुलक्षण बताए, ‘सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी, सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी’। इसके बाद पार्वती के तपस्या की बात जानकर माता-पिता बेहद दुखी हुए।
पार्वती अपने प्राणनाथ महादेवजी के चरणबिंद हृदय में धारण कर वन में तपस्या के लिए चली गईं। महादेव जी ने सप्तऋषियों को पार्वती की परीक्षा के लिए भेजा। सप्तऋषियों ने महादेवजी की जमकर बुराई की लेकिन पार्वती के मन में शिव के प्रति प्रेम को नहीं डिगा पाए।
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सभी देवताओं ने शिवजी के मन में प्रेम जगाने के लिए कामदेव को प्रेरित किया लेकिन कामदेव शिवजी के क्रोध के शिकार हो गए। लीला मंचन के दौरान शिवजी की अलौकिक बारात निकाली गई।
शिवजी ने सर्प जड़ा मुकट पहना था, सर्प के कुंडल, कंगन धारण किए। उनके गण भूत-प्रेत, पिशाच बारात में कौतूहल कर रहे थे। इस अवसर पर गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रविकांत गर्ग, सभापति उमेश अग्रवाल, प्रधानमंत्री बनवारी लाल गर्ग, राजेश, दिनेश, सर्वेश शर्मा, अजय मास्टर, विपुल पारीक आदि मौजूद थे।
आज
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रावण मोह, रावण जन्म लीला का मंचन
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इहां हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना॥
श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में ‘शिव-पार्वती विवाह’ की लीला देख श्रद्धालु गदगद हो गए। श्रीरामलीला सभा के तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में सबसे ज्यादा आकर्षक शिवजी की बारात रही।
लीला मंचन के दौरान हिमालय के राजा हिमवान और रानी मैनावती के यहां पार्वती का जन्म हुआ। नारदजी ने हिमवान से पार्वती के सुलक्षण बताए, ‘सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी, सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी’। इसके बाद पार्वती के तपस्या की बात जानकर माता-पिता बेहद दुखी हुए।
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पार्वती अपने प्राणनाथ महादेवजी के चरणबिंद हृदय में धारण कर वन में तपस्या के लिए चली गईं। महादेव जी ने सप्तऋषियों को पार्वती की परीक्षा के लिए भेजा। सप्तऋषियों ने महादेवजी की जमकर बुराई की लेकिन पार्वती के मन में शिव के प्रति प्रेम को नहीं डिगा पाए।
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सभी देवताओं ने शिवजी के मन में प्रेम जगाने के लिए कामदेव को प्रेरित किया लेकिन कामदेव शिवजी के क्रोध के शिकार हो गए। लीला मंचन के दौरान शिवजी की अलौकिक बारात निकाली गई।
शिवजी ने सर्प जड़ा मुकट पहना था, सर्प के कुंडल, कंगन धारण किए। उनके गण भूत-प्रेत, पिशाच बारात में कौतूहल कर रहे थे। इस अवसर पर गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, रविकांत गर्ग, सभापति उमेश अग्रवाल, प्रधानमंत्री बनवारी लाल गर्ग, राजेश, दिनेश, सर्वेश शर्मा, अजय मास्टर, विपुल पारीक आदि मौजूद थे।
आज
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रावण मोह, रावण जन्म लीला का मंचन