{"_id":"57f6a6164f1c1b807f26fc63","slug":"ramlila-in-mathura-again","type":"story","status":"publish","title_hn":"जे न मित्र दुख होहिं दुखारी...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी...
अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 07 Oct 2016 12:59 AM IST
विज्ञापन
रामलीला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामलीला सभा के तत्वावधान में चित्रकूट मसानी पर चल रही रामलीला में गुरुवार को शबरी के बेर खाने और बालि वध की लीला का मंचन हुआ।
प्रभु श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण और सीता के साथ शबरी के आश्रम में प्रवेश करते हैं। सुंदर भाइयों को देखकर शबरी उनके चरणों में लेट गई। जल से पांव पखारकर आसन पर बैठाया। कंद मूल फल अर्पित किए। प्रभु ने प्रेमपूर्वक उन्हें ग्रहण किया और शबरी को नवधा भक्ति के बारे में बताया। शबरी भगवान राम के प्रेम के वशीभूत होकर उन्हें झूठे बेर खिलाने लगी। भगवान राम ने इन बेरों को आनंदपूर्वक खाया।
इधर ऋष्यमूक पर्वत पर विराजमान वानर सुग्रीव राम और लक्ष्मण को आते देख डर जाते हैं। सुग्रीव हनुमानजी को ब्राह्मण का रूप धारण कर इनके बारे में पता लगाने के लिए कहते हैं। ब्राह्मण रूपी हनुमान प्रभु श्रीराम से पूछते हैं कि आप किसके लिए वन में विचरण कर रहे हो। तक भगवान राम उन्हें सीता हरण की बात बताते हैं।
इसके बाद हनुमान ने प्रभु राम की सुग्रीव से मित्रता कराई। इसके बाद मित्र का दुख दूर करने के लिए राम ने बालि का वध किया और सुग्रीव किष्किंधा के राजा बने। राजा बालि के पुत्र अंगद को युवराज बनाया जाता है। यह लीला देख भक्तों ने खूब आनंद उठाया। मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के अनुसार सात अक्तूबर को सीता खोज और लंका दहन की लीला होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रभु श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण और सीता के साथ शबरी के आश्रम में प्रवेश करते हैं। सुंदर भाइयों को देखकर शबरी उनके चरणों में लेट गई। जल से पांव पखारकर आसन पर बैठाया। कंद मूल फल अर्पित किए। प्रभु ने प्रेमपूर्वक उन्हें ग्रहण किया और शबरी को नवधा भक्ति के बारे में बताया। शबरी भगवान राम के प्रेम के वशीभूत होकर उन्हें झूठे बेर खिलाने लगी। भगवान राम ने इन बेरों को आनंदपूर्वक खाया।
इधर ऋष्यमूक पर्वत पर विराजमान वानर सुग्रीव राम और लक्ष्मण को आते देख डर जाते हैं। सुग्रीव हनुमानजी को ब्राह्मण का रूप धारण कर इनके बारे में पता लगाने के लिए कहते हैं। ब्राह्मण रूपी हनुमान प्रभु श्रीराम से पूछते हैं कि आप किसके लिए वन में विचरण कर रहे हो। तक भगवान राम उन्हें सीता हरण की बात बताते हैं।
विज्ञापन
इसके बाद हनुमान ने प्रभु राम की सुग्रीव से मित्रता कराई। इसके बाद मित्र का दुख दूर करने के लिए राम ने बालि का वध किया और सुग्रीव किष्किंधा के राजा बने। राजा बालि के पुत्र अंगद को युवराज बनाया जाता है। यह लीला देख भक्तों ने खूब आनंद उठाया। मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के अनुसार सात अक्तूबर को सीता खोज और लंका दहन की लीला होगी।
विज्ञापन