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राजा हिमवान के द्वार पहुंची शिवजी की बरात
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:01 AM IST
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रामलीला
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर श्रीरामलीला महोत्सव में शिव-पार्वती विवाह की लीला का मंचन किया गया। श्रीरामलीला सभा के तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में सबसे ज्यादा आकर्षक शिवजी की बरात रही।
लीला में हिमालय के राजा हिमवान और रानी मेनावती के यहां पार्वती का जन्म हुआ। नारदजी ने हिमवान से पार्वती के सुलक्षण बताए। इसके बाद नारदजी ने कहा कि इसका विवाह भूत भावन भगवान शिव से होगा। पार्वती ने अपनी माता को बताया कि उन्होंने रात में एक स्वप्न देखा है। स्वप्न में एक बहुत सुंदर श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कहा कि नारदजी ने जो कहा है उसे सत्य मानकर तपस्या कीजिए। इससे मेरे समस्त दोषों का नाश होगा।
पार्वती जी माता-पिता की आज्ञा से वन जाकर कठिन तप करने लगीं। शंकर भगवान समाधि में लीन थे, तब भगवान नारायण ने प्रकट होकर उनसे पार्वती से विवाह करने की प्रार्थना की। उनके सुझाव पर भगवान शंकर ने सप्त ऋषियों को पार्वतीजी की मनोइच्छा जानने को भेजा।
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ऋषियों ने देवी पार्वती के सम्मुख शिवजी की अनेक बुराइयों और अवगुणों की व्याख्या की। पार्वतीजी ने कहा कि भगवान शंकर मेरे स्वामी हैं। विष्णु, ब्रह्मा और इंद्र आदि देवताओं के अनुरोध पर शंकर जी दूल्हा का वेश धारणकर दिगपाल, भूत-प्रेत-पिशाच आदि देवताओं के साथ बारात लेकर राजा हिमवान के यहां पहुंचे। लीला के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो जयकारे लगाते रहे।
इस अवसर पर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, राजकुमार आदित्य कुमार वृंदावन, दिनेश चंद्र उमेश प्रेस वाले, बनवारी लाल गर्ग, सर्वेश शमा, अशोक गुडेरा, अशोक बंसल, अजय मास्टर, राजनारायण गौड़, विपुल पारिक उपस्थित रहे।
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लीला में हिमालय के राजा हिमवान और रानी मेनावती के यहां पार्वती का जन्म हुआ। नारदजी ने हिमवान से पार्वती के सुलक्षण बताए। इसके बाद नारदजी ने कहा कि इसका विवाह भूत भावन भगवान शिव से होगा। पार्वती ने अपनी माता को बताया कि उन्होंने रात में एक स्वप्न देखा है। स्वप्न में एक बहुत सुंदर श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कहा कि नारदजी ने जो कहा है उसे सत्य मानकर तपस्या कीजिए। इससे मेरे समस्त दोषों का नाश होगा।
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पार्वती जी माता-पिता की आज्ञा से वन जाकर कठिन तप करने लगीं। शंकर भगवान समाधि में लीन थे, तब भगवान नारायण ने प्रकट होकर उनसे पार्वती से विवाह करने की प्रार्थना की। उनके सुझाव पर भगवान शंकर ने सप्त ऋषियों को पार्वतीजी की मनोइच्छा जानने को भेजा।
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ऋषियों ने देवी पार्वती के सम्मुख शिवजी की अनेक बुराइयों और अवगुणों की व्याख्या की। पार्वतीजी ने कहा कि भगवान शंकर मेरे स्वामी हैं। विष्णु, ब्रह्मा और इंद्र आदि देवताओं के अनुरोध पर शंकर जी दूल्हा का वेश धारणकर दिगपाल, भूत-प्रेत-पिशाच आदि देवताओं के साथ बारात लेकर राजा हिमवान के यहां पहुंचे। लीला के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो जयकारे लगाते रहे।
इस अवसर पर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, राजकुमार आदित्य कुमार वृंदावन, दिनेश चंद्र उमेश प्रेस वाले, बनवारी लाल गर्ग, सर्वेश शमा, अशोक गुडेरा, अशोक बंसल, अजय मास्टर, राजनारायण गौड़, विपुल पारिक उपस्थित रहे।