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Mathura News: 2014 में ‘राम’ ने लगाई पार, 2024 में क्या ‘कृष्ण’ बनेंगे खेवनहार
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मथुरा। श्रीराम जन्मभूमि जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा को बल दे दिया है कि भाजपा 2024 का चुनाव श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर लड़ेगी। दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद कोर्ट में लंबित है। दिन प्रतिदिन यह मुद्दा बड़ा और चर्चित होता जा रहा है। अब यह बहस छिड़ गई है कि जिस प्रकार 2014 में भाजपा राम जन्मभूमि के मुद्दे पर सत्ता में आई थी। क्या 2024 में सत्ता पाने के लिए वह कृष्ण जन्मभूमि को चुनावी मुद्दा बनाएगी।
दरअसल, श्रीकृष्ण अपने जन्मस्थान को पाने की लड़ाई 191 वर्ष से लड़ रहे हैं। कोर्ट में तारीख दर तारीख वह इतिहास के पन्नों को पलटते हैं। किसी तारीख पर ठाकुर केशवदेव तो किसी तारीख पर श्रीकृष्ण विराजमान बनकर पेश होते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण में अब तक 18 वाद दायर हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कृष्ण जन्मभूमि जाकर पूजन-दर्शन किया। उन्होंने परिसर का भ्रमण भी किया। इस दौरान उनकी निगाह भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पड़ रही ईदगाह मजिस्द की छाया पर पड़ी होगी।
इधर, बीजेपी के कार्यकर्ता नारे लगाने लगे हैं कि ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी और मथुरा बाकी है’। काशी में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का काम पूरा हो चुका है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अब रिपोर्ट तैयार कर रही है। इधर, कृष्ण जन्मभूमि के संबंध में एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराए जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में है। चार दिसंबर को अगली तिथि सुनवाई को प्रस्तावित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि पीएम मोदी के कृष्ण जन्मभूमि जाने के पीछे साफ संदेश है कि ‘राम’ के बाद ‘कृष्ण’ बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे में हैं। बीजेपी इसी बहाने हिंदुत्व की धार बनाए रखना चाहती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकारों के लिए यह अच्छे संकेत भी हैं, जिस प्रकार श्रीराम जन्मभूमि की लड़ाई में सत्ता का सहयोग मिला। उसी प्रकार इस लड़ाई में भी सत्ता का सहयोग मिल सकता है।
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दरअसल, श्रीकृष्ण अपने जन्मस्थान को पाने की लड़ाई 191 वर्ष से लड़ रहे हैं। कोर्ट में तारीख दर तारीख वह इतिहास के पन्नों को पलटते हैं। किसी तारीख पर ठाकुर केशवदेव तो किसी तारीख पर श्रीकृष्ण विराजमान बनकर पेश होते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान-ईदगाह प्रकरण में अब तक 18 वाद दायर हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कृष्ण जन्मभूमि जाकर पूजन-दर्शन किया। उन्होंने परिसर का भ्रमण भी किया। इस दौरान उनकी निगाह भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर पड़ रही ईदगाह मजिस्द की छाया पर पड़ी होगी।
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इधर, बीजेपी के कार्यकर्ता नारे लगाने लगे हैं कि ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी और मथुरा बाकी है’। काशी में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का काम पूरा हो चुका है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अब रिपोर्ट तैयार कर रही है। इधर, कृष्ण जन्मभूमि के संबंध में एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराए जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में है। चार दिसंबर को अगली तिथि सुनवाई को प्रस्तावित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि पीएम मोदी के कृष्ण जन्मभूमि जाने के पीछे साफ संदेश है कि ‘राम’ के बाद ‘कृष्ण’ बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे में हैं। बीजेपी इसी बहाने हिंदुत्व की धार बनाए रखना चाहती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकारों के लिए यह अच्छे संकेत भी हैं, जिस प्रकार श्रीराम जन्मभूमि की लड़ाई में सत्ता का सहयोग मिला। उसी प्रकार इस लड़ाई में भी सत्ता का सहयोग मिल सकता है।
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