{"_id":"632c7003b6c6d372607d7b87","slug":"rail-track-was-laid-for-the-construction-of-radha-madhav-temple-mathura-news-mtr52433355","type":"story","status":"publish","title_hn":"राधा माधव मंदिर के निर्माण के लिए बिछवाई गई थी रेल पटरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राधा माधव मंदिर के निर्माण के लिए बिछवाई गई थी रेल पटरी
विज्ञापन
वृंदावन। वृंदावन-मथुरा के बीच रेल सेवा शुरूहोने के पीछे ऐतिहासिक तथ्य जुड़ा हुआ है। जब-जब इस रेल का जिक्र आएगा वृंदावन के राधा माधव (जयपुर मंदिर) का नाम लिया जाएगा। इसी मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर ढोने के लिए रेल लाइन बिछाई गई थी।
इतिहासकार लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि जयपुर घराने के राजा सवाई माधव सिंह (द्वितीय) द्वारा वृंदावन में जयपुर मंदिर (राधा माधव) का निर्माण कराया गया था। इसके लिए १९०५ से १९०८ के बीच जयपुर और धौलपुर से लाल पत्थरों की ढुलाई होनी थी। इसके लिए राजा सवाई माधव सिंह द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश शासकों से विशेष स्वीकृति लेकर मीटर गेज लाइन बिछाई गई। मंदिर परिसर में ही अस्थायी रूप से स्टेशन बनाया गया था।
राधा माधव मंदिर के पुजारी रहे रूप नारायण शर्मा का कहना है कि रेल से पत्थरों की ढुलाई के कारण मंदिर का निर्माण २३ मई १९१७ में पूरा हुआ और ठाकुरजी का पाटोत्सव मनाया गया। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के निर्माण में ४० वर्ष का समय लगा। संवाद
विज्ञापन
वृंदावन और मथुरा के बीच चलने वाली रेल बस भले ही १९९८-९९ में शुरू हुई हो इससे पूर्व आठ डिब्बों वाली राधारानी पैसेंजर रेल चला करती थी। इस रेल से सफर करने वाले यात्री मुकुट वल्लभ दुबे एडवोकेट ने बताया कि कोयले से चलने वाले स्टीम इंजन वाली रेल गाड़ी में साधु, संतों के साथ-साथ सैकड़ों दैनिक यात्री और छात्र यात्रा करते थे। रेल गाड़ी का किराया बहुत कम था वहीं साधु-संतों से किराया भी नहीं लिया जाता था। राधारानी पेंसेंजर को बंद करने के पीछे घाटा होना बताया गया। इसके बाद डीजल चलित रेल बस चली और बृहस्पतिवार को आधुनिक सुविधाओं से लैस रेल बस दौड़नी शुरू हो गई।
विज्ञापन
इतिहासकार लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि जयपुर घराने के राजा सवाई माधव सिंह (द्वितीय) द्वारा वृंदावन में जयपुर मंदिर (राधा माधव) का निर्माण कराया गया था। इसके लिए १९०५ से १९०८ के बीच जयपुर और धौलपुर से लाल पत्थरों की ढुलाई होनी थी। इसके लिए राजा सवाई माधव सिंह द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश शासकों से विशेष स्वीकृति लेकर मीटर गेज लाइन बिछाई गई। मंदिर परिसर में ही अस्थायी रूप से स्टेशन बनाया गया था।
विज्ञापन
राधा माधव मंदिर के पुजारी रहे रूप नारायण शर्मा का कहना है कि रेल से पत्थरों की ढुलाई के कारण मंदिर का निर्माण २३ मई १९१७ में पूरा हुआ और ठाकुरजी का पाटोत्सव मनाया गया। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के निर्माण में ४० वर्ष का समय लगा। संवाद
विज्ञापन
वृंदावन और मथुरा के बीच चलने वाली रेल बस भले ही १९९८-९९ में शुरू हुई हो इससे पूर्व आठ डिब्बों वाली राधारानी पैसेंजर रेल चला करती थी। इस रेल से सफर करने वाले यात्री मुकुट वल्लभ दुबे एडवोकेट ने बताया कि कोयले से चलने वाले स्टीम इंजन वाली रेल गाड़ी में साधु, संतों के साथ-साथ सैकड़ों दैनिक यात्री और छात्र यात्रा करते थे। रेल गाड़ी का किराया बहुत कम था वहीं साधु-संतों से किराया भी नहीं लिया जाता था। राधारानी पेंसेंजर को बंद करने के पीछे घाटा होना बताया गया। इसके बाद डीजल चलित रेल बस चली और बृहस्पतिवार को आधुनिक सुविधाओं से लैस रेल बस दौड़नी शुरू हो गई।