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औषधि विभाग की टीम ने खंगाले मेडिकल स्टोर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 11 Jun 2015 12:18 AM IST
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जिला औषधि निरीक्षक दीपक कुमार के नेतृत्व में औषधि विभाग की टीम ने कोसी में मेडिकल स्टोर्स पर छापा मारा तो नशे के इंजेक्शन तो हाथ नहीं लगे, लेकिन कई अनियमितताएं समाने आईं। औषधि विभाग की टीम की सूचना पर पूरे नगर में हड़कंप मच गया। मेडिकल स्टोर संचालक दुकानें बंद कर भाग गए। माना जा रहा है कि गांव बरहाना में बड़ी संख्या में हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव रोगी पाए जाने के पीछे नशे के इंजेक्शन ही हैं। जो कोसी से ही गांव में पहुंच रहे हैं।
नंदगांव रोड स्थित कनिष्का मेडिकल स्टोर पर लाइसेंट रिन्युअल सबंधी कागज चस्पा नहीं कर रखे थे। दुकान पर फ्रिज भी नहीं था। यहां कुछ दवाइयों को नष्ट करवाया गया। इसके बाद रंजना मेडिकल स्टोर पर पहुंची टीम को कारोबारी ने बताया कि उसका लाइसेंस दिसंबर 2012 तक ही रिन्युअल है और उसने आवेदन कर दिया है। इस पर मौखिक आदेशों के तहत दुकान बंद करवाई दी।
इस दुकान से चार प्रकार की दवाएं भी मिली हैं जिनका बिल नहीं दिखाया गया। इनमें कोडीन की मात्रा होती है इनका प्रयोग नशे के लिए भी किया जा सकता है। इनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। दीपक कुमार ने बताया नशे के इंजेक्शनों के संबंध में गोपनीय तरीके जानकारी जुटा रहे हैं। आसपास के मेडिकल स्टोर, परचून विक्रेताओं के यहां तलाशी अभियान जारी रहेगा।
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कोसी से बरहना पहुंच रहे नशे के इंजेक्शन
मथुरा। गांव बरहना में बड़ी संख्या में हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव पाए जाने की एक वजह नशे के इंजेक्शन बताए जा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि उन तक यह इंजेक्शन लोगों तक पहुंच कैसे रहे हैं? बताया जा रहा है कि कोसी के मेडिकल स्टोर्स से यह नशे का सामान झोलाछापों के माध्यम से गांव तक पहुंचाया जाता है।
इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. सत्यमित्र ने इस संबंध में औषधि आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। बुधवार को जिला औषधि निरीक्षक के कोसी के मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी भी की। हालांकि नशे के इंजेक्शन उनके हाथ नहीं लगे।
सोमवार को गांव में निरीक्षण को पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. सत्यमित्र ने बताया था कि इस बीमारी के फैलने की सबसे बड़ी वजह संक्रमित रक्त का किसी अन्य के रक्त के संपर्क में आना है। गांव के युवाओं में नशे के लिए इंजेक्शन लिए जाने का प्रचलन जोरों पर है। ऐसे में एक ही सीरिंज का अलग-अलग लोगों द्वारा प्रयोग बीमारी फैलने का बड़ा कारण हो सकता है। गांव में इन इजेक्शनों की उपलब्धता भी चौंकाने वाली है।
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नंदगांव रोड स्थित कनिष्का मेडिकल स्टोर पर लाइसेंट रिन्युअल सबंधी कागज चस्पा नहीं कर रखे थे। दुकान पर फ्रिज भी नहीं था। यहां कुछ दवाइयों को नष्ट करवाया गया। इसके बाद रंजना मेडिकल स्टोर पर पहुंची टीम को कारोबारी ने बताया कि उसका लाइसेंस दिसंबर 2012 तक ही रिन्युअल है और उसने आवेदन कर दिया है। इस पर मौखिक आदेशों के तहत दुकान बंद करवाई दी।
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इस दुकान से चार प्रकार की दवाएं भी मिली हैं जिनका बिल नहीं दिखाया गया। इनमें कोडीन की मात्रा होती है इनका प्रयोग नशे के लिए भी किया जा सकता है। इनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। दीपक कुमार ने बताया नशे के इंजेक्शनों के संबंध में गोपनीय तरीके जानकारी जुटा रहे हैं। आसपास के मेडिकल स्टोर, परचून विक्रेताओं के यहां तलाशी अभियान जारी रहेगा।
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कोसी से बरहना पहुंच रहे नशे के इंजेक्शन
मथुरा। गांव बरहना में बड़ी संख्या में हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव पाए जाने की एक वजह नशे के इंजेक्शन बताए जा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि उन तक यह इंजेक्शन लोगों तक पहुंच कैसे रहे हैं? बताया जा रहा है कि कोसी के मेडिकल स्टोर्स से यह नशे का सामान झोलाछापों के माध्यम से गांव तक पहुंचाया जाता है।
इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. सत्यमित्र ने इस संबंध में औषधि आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। बुधवार को जिला औषधि निरीक्षक के कोसी के मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी भी की। हालांकि नशे के इंजेक्शन उनके हाथ नहीं लगे।
सोमवार को गांव में निरीक्षण को पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. सत्यमित्र ने बताया था कि इस बीमारी के फैलने की सबसे बड़ी वजह संक्रमित रक्त का किसी अन्य के रक्त के संपर्क में आना है। गांव के युवाओं में नशे के लिए इंजेक्शन लिए जाने का प्रचलन जोरों पर है। ऐसे में एक ही सीरिंज का अलग-अलग लोगों द्वारा प्रयोग बीमारी फैलने का बड़ा कारण हो सकता है। गांव में इन इजेक्शनों की उपलब्धता भी चौंकाने वाली है।