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वेद संगत विज्ञान से ही भारत का भला: निश्चलानंद सरस्वती
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 13 Oct 2016 12:36 AM IST
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पुरी पीठाधीश्वार
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भारत अंग्रेजों की कूटनीति का मारा हुआ देश है। हमें अंग्रेजों के वेद विहीन विज्ञान का परित्याग कर अपने वेद संगत ज्ञान-विज्ञान को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह बात पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्र और समाज को बाजार का सौदा न बनाएं। देश की उन्नति और आर्थिक लाभ के लिए विश्व में राष्ट्रहित की पैरवी हितकर नहीं है। हालांकि उन्होंने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना और पीएम मोदी को बधाई भी दी।
बुधवार को हरिहर आश्रम में स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि विश्व में भारतीय प्रधानमंत्री विकसित मस्तिष्क के माने जाते हैं, जो आर्थिक दृष्टि से मजबूत होने के लिए भारत को बाजार का सौदा बना देते हैं।
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इस परंपरा को बदलना होगा। 21वीं शताब्दी में भी अंग्रेज टेक्नोलॉजी के बहाने भारतीयों को घुमा रहे हैं। देश की शिक्षा, रक्षा, विज्ञान आदि प्रणाली हमारी खुद की नहीं है। हमारे संविधान की आधारशिला भी अपनी नहीं है। ऐसी स्थिति में भारतीयों को राष्ट्र हित में अपने कर्तव्यों के प्रति जाग्रत होना पड़ेगा।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर शंकराचार्य बोले कि यह समय अनुकूल है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंदिर निर्माण के लिए पहल करनी चाहिए। गंगा-यमुना आदि नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए समाज सामूहिक प्रयास करे।
उन्होंने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेना को बधाई दी। देश में शंकराचार्यों की मान-मर्यादा और वर्तमान स्थिति पर बोले कि भारत की गुरु परंपरा में पहले स्थान पर भगवान श्रीमन्नारायण के साथ 10वें स्थान पर शंकराचार्य आते हैं। आजकल कुछ तथाकथित शंकराचार्य इस प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहे हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध केंद्र सरकार कड़े कदम उठाए।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्र और समाज को बाजार का सौदा न बनाएं। देश की उन्नति और आर्थिक लाभ के लिए विश्व में राष्ट्रहित की पैरवी हितकर नहीं है। हालांकि उन्होंने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना और पीएम मोदी को बधाई भी दी।
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बुधवार को हरिहर आश्रम में स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि विश्व में भारतीय प्रधानमंत्री विकसित मस्तिष्क के माने जाते हैं, जो आर्थिक दृष्टि से मजबूत होने के लिए भारत को बाजार का सौदा बना देते हैं।
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इस परंपरा को बदलना होगा। 21वीं शताब्दी में भी अंग्रेज टेक्नोलॉजी के बहाने भारतीयों को घुमा रहे हैं। देश की शिक्षा, रक्षा, विज्ञान आदि प्रणाली हमारी खुद की नहीं है। हमारे संविधान की आधारशिला भी अपनी नहीं है। ऐसी स्थिति में भारतीयों को राष्ट्र हित में अपने कर्तव्यों के प्रति जाग्रत होना पड़ेगा।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर शंकराचार्य बोले कि यह समय अनुकूल है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंदिर निर्माण के लिए पहल करनी चाहिए। गंगा-यमुना आदि नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए समाज सामूहिक प्रयास करे।
उन्होंने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेना को बधाई दी। देश में शंकराचार्यों की मान-मर्यादा और वर्तमान स्थिति पर बोले कि भारत की गुरु परंपरा में पहले स्थान पर भगवान श्रीमन्नारायण के साथ 10वें स्थान पर शंकराचार्य आते हैं। आजकल कुछ तथाकथित शंकराचार्य इस प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहे हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध केंद्र सरकार कड़े कदम उठाए।