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प्रिया-प्रियतम ने खेली चौसर
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 08 Jul 2015 11:56 PM IST
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सेवाकुंज स्थित बड़ा रासमंडल पर संतों के सानिध्य में अधिकमास के उपलक्ष्य में अष्टयाम लीला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को चौसर लीला और राजभोग लीला का आयोजन किया गया। इसमें सखियां यमुना किनारे भव्य अट्टालिका पर प्रिया-प्रियतम को विराजमान कर उनका भोग लगाती हैं। श्याम सुंदर कमलों के पुष्प से ही राधारानी का शृंगार करते हैं और राधा श्याम सुंदर का शृंगार करती हैं।
प्रिया-प्रियतम की प्रेम वैचित्रय लीला का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके बाद सखियों ने प्रार्थना की कि बसंत ऋतु आ गई है, आप दोनों युगलवर बसंत कुंज में पधारें और कहा यामतवारे मीत सों मिलि चांचर खेलौ री...। प्रेम वैचित्रय लीला में दर्शकों के चेहरे पर करुण रस का भाव दिखाई दिया, वहीं चौसर लीला में दर्शकों के चेहरे खिल उठे।
अष्टयाम लीला का महत्व बताते हुए महंत लाडली शरण दास ने कहा कि प्रिया-प्रियतम राधाकृष्ण की लीलाओं का श्रवण और दर्शन करने से जीव को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और उसके सभी कष्टों का विनाश होता है। इस अवसर पर मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज, महंत किशोरदास, महंत फूलडोल बिहारी दास, मुरली मनोहर दास, अवध किशोर दास, मनोज कुमार गोस्वामी, राकेश मुखिया आदि उपस्थित थे।
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प्रिया-प्रियतम की प्रेम वैचित्रय लीला का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके बाद सखियों ने प्रार्थना की कि बसंत ऋतु आ गई है, आप दोनों युगलवर बसंत कुंज में पधारें और कहा यामतवारे मीत सों मिलि चांचर खेलौ री...। प्रेम वैचित्रय लीला में दर्शकों के चेहरे पर करुण रस का भाव दिखाई दिया, वहीं चौसर लीला में दर्शकों के चेहरे खिल उठे।
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अष्टयाम लीला का महत्व बताते हुए महंत लाडली शरण दास ने कहा कि प्रिया-प्रियतम राधाकृष्ण की लीलाओं का श्रवण और दर्शन करने से जीव को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और उसके सभी कष्टों का विनाश होता है। इस अवसर पर मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज, महंत किशोरदास, महंत फूलडोल बिहारी दास, मुरली मनोहर दास, अवध किशोर दास, मनोज कुमार गोस्वामी, राकेश मुखिया आदि उपस्थित थे।
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