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Mathura News: रावल में राधारानी के प्राकट्य उत्सव की तैयारी शुरू
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महावन। श्रीराधारानी की प्राकट्य स्थली गांव रावल में राधाष्टमी के आयोजन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। मंदिर के महंत राहुल कल्ला ने बताया पुराणों में मान्यता है कि राधाजी का प्राकट्य पांच हजार वर्ष पूर्व रावल में हुआ था। तब यमुनापार स्थित लक्ष्मी नगर, बल्देव मार्ग से एक किलोमीटर दूर स्थित रावल को छूकर यमुना बहती थीं।
यहां राजा वृषभानु की पत्नी कीर्ति यमुना नित्य स्नान करने जाती थीं और यमुनाजी से पुत्री प्राप्ति की आराधना करती थीं। द्वापरयुग में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन सुबह चार बजे यमुना में स्नान कर जब कीर्ति ने आंखें खोली उन्हें यमुना में तेज प्रकाश दिखाई दिया। नजदीक आने पर देखा कमल पुष्प में एक छोटी सी कन्या थी जिसके नेत्र बंद थे। अब वह स्थान मंदिर का गर्भगृह है। इधर कन्या के मिलने के 11 माह बाद मथुरा में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। दूसरे दिन गोकुल में नंदबाबा के घर कृष्ण जन्मोत्सव में वृषभानु व कीर्ति भी राधाजी को लेकर वहां पहुंचे। यहां राधा कृष्ण के पास पहुंचीं और उनके नेत्र खुल गए। राधाजी ने पहले दर्शन बाल कृष्ण के किए।
तीन दिवसीय होंगे कार्यक्रम
मंदिर के महंत राहुल कल्ला ने बताया 18 सितंबर शुक्रवार को शाम 7 बजे छठ पूजन मनाकर 101 किलो प्रसाद का वितरण किया जाएगा। शनिवार 19 सितंबर को प्राकट्य उत्सव सुबह 4 बजकर 30 बजे से मनाया जाएगा। श्रीराधारानी के विग्रह की मंगला आरती की जाएगी। 5 बजे जन्मोत्सव दर्शन इसके बाद 5 बजकर 30 मिनट से 6:30 बजे अभिषेक किया जाएगा। इसमें 125 किलो दूध, दही, घी, बूरा, शहद से राधारानी के विग्रह का अभिषेक किया जाएगा। सुबह 9 बजे शृंगार आरती और 12 बजे प्रसाद वितरण किया जाएगा। वहीं शाम 7:00 बजे गौड़िया मठ महावन व गोवर्धन से राधारानी के जन्म को लेकर चाव व बधाई गायन होगा। रात्रि 9 बजे शयन आरती होगी। रविवार 20 सितंबर को कलाकारों द्वारा बधाई गायन का आयोजन किया जाएगा।
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यहां राजा वृषभानु की पत्नी कीर्ति यमुना नित्य स्नान करने जाती थीं और यमुनाजी से पुत्री प्राप्ति की आराधना करती थीं। द्वापरयुग में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन सुबह चार बजे यमुना में स्नान कर जब कीर्ति ने आंखें खोली उन्हें यमुना में तेज प्रकाश दिखाई दिया। नजदीक आने पर देखा कमल पुष्प में एक छोटी सी कन्या थी जिसके नेत्र बंद थे। अब वह स्थान मंदिर का गर्भगृह है। इधर कन्या के मिलने के 11 माह बाद मथुरा में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। दूसरे दिन गोकुल में नंदबाबा के घर कृष्ण जन्मोत्सव में वृषभानु व कीर्ति भी राधाजी को लेकर वहां पहुंचे। यहां राधा कृष्ण के पास पहुंचीं और उनके नेत्र खुल गए। राधाजी ने पहले दर्शन बाल कृष्ण के किए।
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तीन दिवसीय होंगे कार्यक्रम
मंदिर के महंत राहुल कल्ला ने बताया 18 सितंबर शुक्रवार को शाम 7 बजे छठ पूजन मनाकर 101 किलो प्रसाद का वितरण किया जाएगा। शनिवार 19 सितंबर को प्राकट्य उत्सव सुबह 4 बजकर 30 बजे से मनाया जाएगा। श्रीराधारानी के विग्रह की मंगला आरती की जाएगी। 5 बजे जन्मोत्सव दर्शन इसके बाद 5 बजकर 30 मिनट से 6:30 बजे अभिषेक किया जाएगा। इसमें 125 किलो दूध, दही, घी, बूरा, शहद से राधारानी के विग्रह का अभिषेक किया जाएगा। सुबह 9 बजे शृंगार आरती और 12 बजे प्रसाद वितरण किया जाएगा। वहीं शाम 7:00 बजे गौड़िया मठ महावन व गोवर्धन से राधारानी के जन्म को लेकर चाव व बधाई गायन होगा। रात्रि 9 बजे शयन आरती होगी। रविवार 20 सितंबर को कलाकारों द्वारा बधाई गायन का आयोजन किया जाएगा।
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