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इच्छा मृत्यु की मांग के बाद जागे पुलिस अधिकारी

Thu, 31 Dec 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 31 Dec 2015 12:03 AM IST
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police have taken action.
उत्पीड़न की इंतहा और पुलिस की बेरुखी से आहत आरटीआई कार्यकर्ता के इच्छा मृत्यु की मांग के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। डीआईजी कार्यालय से आए फोन के बाद पुलिस के अफसरों ने पीड़ित का दर्द जाना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने गुरुवार को फरियादी को अपने कार्यालय बुलाया है।
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शिकायत के अनुसार बुजुर्ग आरटीआई कार्यकर्ता और बैंक कर्मी रहे डा. नेत्रपाल के साथ बैंक में ही मारपीट की घटना हुई थी। उनके अनुसार इस मामले में 30 अप्रैल 2013 को जांच करने आए अधिकारियों ने दूसरे पक्ष के लोगों से झूठी शिकायत लेकर उनका शोषण किया। इसकी सूचना उन्होंने कृष्णा नगर चौकी को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इस मामले में वो थाने, चौकी और आला अफसरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके अलावा बैंक के रीजनल कार्यालय से उन्होंने कोई सूचना मांगी तो पत्रावली गायब बताई गईं। जिन अधिकारियों की अभिरक्षा में पत्रावली थीं उनके खिलाफ थाना हरीपर्वत में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में नेत्रपाल ने डीआईजी आगरा से गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज के तले इच्छा मृत्यु की मांग की।
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पीड़ित के इस दर्द को अमर उजाला ने 30 दिसंबर के अंक में शीर्षक छपी खबर ‘आरटीआई कार्यकर्ता ने मांगी इच्छा मृत्युÓ के बाद पुलिस अधिकारियों ने उनकी सुध ली। पीड़ित ने अमर उजाला को बताया बुधवार को एसपी सिटी ने उनसे मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया है। इधर डीआईजी कार्यालय में उन्हें गुरुवार को बुलाया गया है।


 
मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचकर मानसिक शोषण किया जा रहा है। इसमें बैंक अफसरों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों का घालमेल करने वाले लोग हैं। मेरी मांग है पुलिस दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष जांच करे। न्याय नहीं मिला तो इच्छा मृत्यु के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। मैं गुरुवार को डीआईजी से भी फरियाद करूंगा।
- डा. नेत्रपाल, पीड़ित आरटीआई कार्यकर्ता
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