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Mathura News: साथ खेले और एक साथ ही दुनिया छोड़ गए
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- मगोर्रा में एक ही परिवार के तीन बच्चों की डूबने से मौत का मामला- देर शाम तीनों की एक ही अर्थी निकली तो सांत्वना देने पहुंचे लोग भी आंसू नहीं रोक सके
- एक ही चिता पर बड़े भाई ने दी मुखाग्नि
- मेरे लाडलों को ला दो, कहते-कहते बेसुध हो गई मां
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। कोई तो मेरे लाडलों को ला दो...मै उनके बिना अब कैसे रह पाऊंगी...कहते-कहते रूबी देवी बेसुध हो गई। पड़ोस की महिलाओं ने संभाला परंतु उनके भी आंसू नहीं रुक रहे थे। घर के बाहर सांत्वना देने आए लोगों की भीड़ लगी थी। शाम के करीब चार बज रहे थे और तीनों बच्चों के शवों के आने का इंतजार था। घंटे भर बाद जैसे ही बच्चों को शव गांव पहुंचे सुंदर सिंह के घर कोहराम मच गया। लाडलों के शव देखकर पत्नी रूबी देवी का कलेजा फट गया। उनका विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। वह अपने लाडलों के नाम लेकर बार-बार पुकार रही थी, लेकिन नियति को कौन टाल सकता था। कल तक जिस घर में सोनू, मोनू और पंकज की चहलपहल दिखती थी, आज वह आंगन सूना नजर आ रहा था। देर शाम तीनों बच्चों को एक ही अर्थी पर श्मशान घाट ले जाया गया और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े भाई सौरभ ने मुखाग्नि दी।
सुंदर सिंह टेंपो चलाकर और कभी कभार मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं, चार बेटों में सबसे बड़ा सौरभ (14) नानी के घर गया हुआ था। जैसे ही उन्हें सोनू, मोनू और पंकज के पोखर में डूबने के जानकारी मिली वे बदहवास हालत में मौके की ओर दौड़ पड़े। पोखर पहुंचे तो लोग पोखर में उतर कर बच्चों की तलाश में जुटे थे। यह देख वे सिर पकड़कर वहीं बैठ गए। कुछ ही देर में पुलिस ने बच्चों को पोखर से निकाला तो उनकी रूलाई फूट गई। बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
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बड़ा बेटा ननिहाल में था...
तीन सगे भाइयों की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर ग्रामीण चर्चा कर रहे थे कि सौरभ 10 दिन पहले ही राया स्थित नगला गजू में अपनी ननिहाल गया था। वह गांव होता तो शायद वह भी न बच पाता। वह भी अपने भाइयों को बचाने पोखर में उतरता। ग्रामीणों ने बताया कि सौरभ मानसिक तौर पर थोड़ा कमजोर है, लेकिन सोनू, मोनू और पंकज काफी चंचल और होशियार थे। पड़ोसी डॉ. छत्रपाल सिंह ने बताया कि मोनू और पंकज कक्षा दो में पढ़ते थे जबकि सोनू कक्षा चार का छात्र था।
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साथी बच्चे ने मचाया शोर तब हुई जानकारी
पोखर किनारे सुंदर सिंह के तीन बेटे और वकील का पांच वर्षीय प्रशांत भी खेल रहा था। वकील के अनुसार जब तीनों बच्चे पोखर में डूबे तो प्रशांत ने शोर मचा दिया। आसपास के ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से बच्चों की तलाश की, लेकिन जिस स्थान पर वह डूबे थे वह जगह दलदल जैसी थी। इस कारण कोई भी बच्चा बाहर नहीं निकल सका।
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एसआई और हैडकांस्टेबल वर्दी समेत कूदे
उप निरीक्षक संतोष कुमार एवं हैड कांस्टेबल अनूप कुमार वर्दी के साथ ही पोखर में कूद गए। हैड कांस्टेबल ने बताया कि उप निरीक्षक तो स्वयं पोखर में डूबते-डूबते बचे। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान तैराकी सीखी थी, आज जब इस हुनर की जरूरत थी तो वह खुद को तालाब में कूदने से नहीं रोक सके। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार पास ही स्थित बैंक में रूटीन जांच कर रहे थे। यही कारण रहा कि सूचना मिलने के तुरंत बाद वह मौके पर पहुंच गए और बचाव कार्य में जुट गए।
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पोखर के जीर्णोद्धार का चल रहा है कार्य
पिछले कई माह से पोखर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। ग्रामीण प्रदीप चौधरी ने बताया कि योजना के तहत एक ओर पक्का घाट तैयार हो गया है, जबकि जहां बच्चे खेल रहे थे वहां केवल खुदाई हुई है। खुदाई के कारण मिट्टी भी चिकनी हो गई है। इसी कारण बच्चों का पैर फिसला और वह तालाब में गिरे।
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पोस्टमार्टम गृह पर लगी भीड़
शव को जब पोस्टमार्टम के लिए लाया गया तो वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लग गई। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार भी पुलिस बल के साथ पहुंच गए और पंचनामा भरने की कार्रवाई की। पोस्टमार्टम हाउस पर सबसे पहले पंकज का शव आया। इसके बाद सोनू और मोनू के शव लाए गए। तीनों मासूमों के शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान गोवर्धन विधायक मेघश्याम सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह भरंगर, एडीएम वित्त एवं राजस्व योगानंद पांडेय, नायब तहसीलदार मीनू समेत अन्य अधिकारी भी पहुंच गए।
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- एक ही चिता पर बड़े भाई ने दी मुखाग्नि
- मेरे लाडलों को ला दो, कहते-कहते बेसुध हो गई मां
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। कोई तो मेरे लाडलों को ला दो...मै उनके बिना अब कैसे रह पाऊंगी...कहते-कहते रूबी देवी बेसुध हो गई। पड़ोस की महिलाओं ने संभाला परंतु उनके भी आंसू नहीं रुक रहे थे। घर के बाहर सांत्वना देने आए लोगों की भीड़ लगी थी। शाम के करीब चार बज रहे थे और तीनों बच्चों के शवों के आने का इंतजार था। घंटे भर बाद जैसे ही बच्चों को शव गांव पहुंचे सुंदर सिंह के घर कोहराम मच गया। लाडलों के शव देखकर पत्नी रूबी देवी का कलेजा फट गया। उनका विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। वह अपने लाडलों के नाम लेकर बार-बार पुकार रही थी, लेकिन नियति को कौन टाल सकता था। कल तक जिस घर में सोनू, मोनू और पंकज की चहलपहल दिखती थी, आज वह आंगन सूना नजर आ रहा था। देर शाम तीनों बच्चों को एक ही अर्थी पर श्मशान घाट ले जाया गया और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। बड़े भाई सौरभ ने मुखाग्नि दी।
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सुंदर सिंह टेंपो चलाकर और कभी कभार मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं, चार बेटों में सबसे बड़ा सौरभ (14) नानी के घर गया हुआ था। जैसे ही उन्हें सोनू, मोनू और पंकज के पोखर में डूबने के जानकारी मिली वे बदहवास हालत में मौके की ओर दौड़ पड़े। पोखर पहुंचे तो लोग पोखर में उतर कर बच्चों की तलाश में जुटे थे। यह देख वे सिर पकड़कर वहीं बैठ गए। कुछ ही देर में पुलिस ने बच्चों को पोखर से निकाला तो उनकी रूलाई फूट गई। बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
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बड़ा बेटा ननिहाल में था...
तीन सगे भाइयों की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर ग्रामीण चर्चा कर रहे थे कि सौरभ 10 दिन पहले ही राया स्थित नगला गजू में अपनी ननिहाल गया था। वह गांव होता तो शायद वह भी न बच पाता। वह भी अपने भाइयों को बचाने पोखर में उतरता। ग्रामीणों ने बताया कि सौरभ मानसिक तौर पर थोड़ा कमजोर है, लेकिन सोनू, मोनू और पंकज काफी चंचल और होशियार थे। पड़ोसी डॉ. छत्रपाल सिंह ने बताया कि मोनू और पंकज कक्षा दो में पढ़ते थे जबकि सोनू कक्षा चार का छात्र था।
साथी बच्चे ने मचाया शोर तब हुई जानकारी
पोखर किनारे सुंदर सिंह के तीन बेटे और वकील का पांच वर्षीय प्रशांत भी खेल रहा था। वकील के अनुसार जब तीनों बच्चे पोखर में डूबे तो प्रशांत ने शोर मचा दिया। आसपास के ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे। सूचना मिलते ही पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से बच्चों की तलाश की, लेकिन जिस स्थान पर वह डूबे थे वह जगह दलदल जैसी थी। इस कारण कोई भी बच्चा बाहर नहीं निकल सका।
एसआई और हैडकांस्टेबल वर्दी समेत कूदे
उप निरीक्षक संतोष कुमार एवं हैड कांस्टेबल अनूप कुमार वर्दी के साथ ही पोखर में कूद गए। हैड कांस्टेबल ने बताया कि उप निरीक्षक तो स्वयं पोखर में डूबते-डूबते बचे। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान तैराकी सीखी थी, आज जब इस हुनर की जरूरत थी तो वह खुद को तालाब में कूदने से नहीं रोक सके। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार पास ही स्थित बैंक में रूटीन जांच कर रहे थे। यही कारण रहा कि सूचना मिलने के तुरंत बाद वह मौके पर पहुंच गए और बचाव कार्य में जुट गए।
पोखर के जीर्णोद्धार का चल रहा है कार्य
पिछले कई माह से पोखर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। ग्रामीण प्रदीप चौधरी ने बताया कि योजना के तहत एक ओर पक्का घाट तैयार हो गया है, जबकि जहां बच्चे खेल रहे थे वहां केवल खुदाई हुई है। खुदाई के कारण मिट्टी भी चिकनी हो गई है। इसी कारण बच्चों का पैर फिसला और वह तालाब में गिरे।
पोस्टमार्टम गृह पर लगी भीड़
शव को जब पोस्टमार्टम के लिए लाया गया तो वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लग गई। थाना प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार भी पुलिस बल के साथ पहुंच गए और पंचनामा भरने की कार्रवाई की। पोस्टमार्टम हाउस पर सबसे पहले पंकज का शव आया। इसके बाद सोनू और मोनू के शव लाए गए। तीनों मासूमों के शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान गोवर्धन विधायक मेघश्याम सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष रामपाल सिंह भरंगर, एडीएम वित्त एवं राजस्व योगानंद पांडेय, नायब तहसीलदार मीनू समेत अन्य अधिकारी भी पहुंच गए।