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Mathura News: अंबाखार नाले के ऊपर नक्शा हो गया पास
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मथुरा। जिम्मेदारों की मिलीभगत से नाले पर कब्जे का मामला सामने आया है। शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले होलीगेट स्थित सुभाष बाजार में अंबाखार नाले को पाटकर नगर निगम से एनओसी और एवीडीए से दुकानों का नक्शा पास हो गया। बेशकीमती जगह पर नक्शा पास होते ही दुकानों का निर्माण शुरू कर बेचने की तैयारी भी कर ली गई। इस मामले की शिकायत होने पर आनन-फानन विभागीय स्तर से काम को रुकवाते हुए जांच टीम गठित कर दी गई।
जांच में सामने आया है कि नगर निगम ने एक जून 2022 को एमवीडीए को जारी एनओसी में शर्त रखी थी कि आवेदक नाले की भूमि को छोड़कर ही निर्माण करेगा। एनओसी की शर्त संख्या 02 में यह भी स्पष्ट था कि नाले की जमीन पर निर्माण मिलने पर नगर निगम की सहमति निरस्त मानी जाएगी। इसके बावजूद एमवीडीए के तत्कालीन अवर अभियंता ने 13 अगस्त 2022 को मानचित्र स्वीकृत कर दिया।
संयुक्त जांच समिति की स्थलीय पैमाइश में स्वीकृत मानचित्र और मौके की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया है। नक्शे में अग्र भुजा 4.88 मीटर दर्शाई गई थी, जबकि मौके पर यह महज 1.80 मीटर मिली। यानी 3.08 मीटर हिस्से को नाले की भूमि पर कब्जा मिला। इसी तरह पार्श्व भुजा नक्शे में 5.94 मीटर थी, जबकि मौके पर 2.90 मीटर मिली। इसमें भी 3.04 मीटर का अंतर सामने आया। गहराई दोनों जगह 7.93 मीटर दर्ज की गई। समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर 2024 में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे।
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शिकायतकर्ता हेमंत अग्रवाल और राजेश सिंह आदि ने खसरा नंबरों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार खसरा संख्या 3373, रकबा 0.62 हेक्टेयर, रास्ते के रूप में दर्ज है। वहीं, 3373अ, रकबा 0.162 हेक्टेयर नाले के रूप में दर्ज है। दूसरी ओर एनओसी का आवेदन खसरा संख्या 3367, रकबा 0.178 हेक्टेयर के आधार पर किया गया था। ऐसे में अभिलेखों और मौके की स्थिति के मिलान की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में है।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शहर की करीब 60 प्रतिशत जल निकासी अंबाखार नाले के जरिए होती है। नाले को संकरा कर पाटने से 50 से अधिक कॉलोनियों में जलभराव का खतरा पैदा हो सकता है और एक लाख से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है।
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स्लैब को हटाकर लगेगा लोहे का जाल
चार सदस्यीय संयुक्त समिति ने स्वीकृत मानचित्र को निरस्त करने, नाले पर डाले गए स्लैब को हटाने और उसकी जगह फोल्डेड लोहे का जाल लगाने की संस्तुति की थी। शिकायतकर्ता हेमंत अग्रवाल का आरोप है कि मई 2024 में ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है। नगर आयुक्त ओजस्वी राज का कहना है कि नाले पर किसी भी हालत में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई होगी।
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जांच में सामने आया है कि नगर निगम ने एक जून 2022 को एमवीडीए को जारी एनओसी में शर्त रखी थी कि आवेदक नाले की भूमि को छोड़कर ही निर्माण करेगा। एनओसी की शर्त संख्या 02 में यह भी स्पष्ट था कि नाले की जमीन पर निर्माण मिलने पर नगर निगम की सहमति निरस्त मानी जाएगी। इसके बावजूद एमवीडीए के तत्कालीन अवर अभियंता ने 13 अगस्त 2022 को मानचित्र स्वीकृत कर दिया।
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संयुक्त जांच समिति की स्थलीय पैमाइश में स्वीकृत मानचित्र और मौके की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया है। नक्शे में अग्र भुजा 4.88 मीटर दर्शाई गई थी, जबकि मौके पर यह महज 1.80 मीटर मिली। यानी 3.08 मीटर हिस्से को नाले की भूमि पर कब्जा मिला। इसी तरह पार्श्व भुजा नक्शे में 5.94 मीटर थी, जबकि मौके पर 2.90 मीटर मिली। इसमें भी 3.04 मीटर का अंतर सामने आया। गहराई दोनों जगह 7.93 मीटर दर्ज की गई। समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर 2024 में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए थे।
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शिकायतकर्ता हेमंत अग्रवाल और राजेश सिंह आदि ने खसरा नंबरों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार खसरा संख्या 3373, रकबा 0.62 हेक्टेयर, रास्ते के रूप में दर्ज है। वहीं, 3373अ, रकबा 0.162 हेक्टेयर नाले के रूप में दर्ज है। दूसरी ओर एनओसी का आवेदन खसरा संख्या 3367, रकबा 0.178 हेक्टेयर के आधार पर किया गया था। ऐसे में अभिलेखों और मौके की स्थिति के मिलान की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में है।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शहर की करीब 60 प्रतिशत जल निकासी अंबाखार नाले के जरिए होती है। नाले को संकरा कर पाटने से 50 से अधिक कॉलोनियों में जलभराव का खतरा पैदा हो सकता है और एक लाख से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है।
स्लैब को हटाकर लगेगा लोहे का जाल
चार सदस्यीय संयुक्त समिति ने स्वीकृत मानचित्र को निरस्त करने, नाले पर डाले गए स्लैब को हटाने और उसकी जगह फोल्डेड लोहे का जाल लगाने की संस्तुति की थी। शिकायतकर्ता हेमंत अग्रवाल का आरोप है कि मई 2024 में ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है। नगर आयुक्त ओजस्वी राज का कहना है कि नाले पर किसी भी हालत में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। टीम भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद कार्रवाई होगी।