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15 वर्ष बाद सुबह फूल बंगले में विराजे बांकेबिहारी, दर्शन कर भक्त हुए भावविभोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
Updated Thu, 09 Aug 2018 08:02 PM IST
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बांके बिहारी मंदिर में सजाया गया फूल बंगला
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में 15 वर्ष बाद ठाकुर जी जगमोहन में आकर श्रृंगार आरती के समय से राजभोग आरती तक फूल बंगला में विराजे। उसके बाद पूर्ववत सायंकाल भी यही क्रम जारी रहा।
हालांकि इस बार तीन दिन ही राजभोग सेवा में फूल बंगला में बांकेबिहारी के दर्शन हो सकेंगे। गुरुवार की सुबह फूलबंगले में विराजे अपने आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा।
मंदिर के जगमोहन से लेकर चौंक को फूलों और रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया। दिल्ली से आईं महिमा आरोड़ा, दिलीप अरोड़ा ने कहा कि उन्हें मंदिर आकर ही पता चला कि सुबह भी फूलबंगला सजेगा। वो ठाकुरजी के दर्शन पाकर अभिभूत हैं।
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हालांकि इस बार तीन दिन ही राजभोग सेवा में फूल बंगला में बांकेबिहारी के दर्शन हो सकेंगे। गुरुवार की सुबह फूलबंगले में विराजे अपने आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा।
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मंदिर के जगमोहन से लेकर चौंक को फूलों और रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया। दिल्ली से आईं महिमा आरोड़ा, दिलीप अरोड़ा ने कहा कि उन्हें मंदिर आकर ही पता चला कि सुबह भी फूलबंगला सजेगा। वो ठाकुरजी के दर्शन पाकर अभिभूत हैं।
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14 जुलाई 2003 को सजा था फूल बंगला
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत बालकृष्ण गोस्वामी ने बताया कि देवेंद्र गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी की सेवा में 14 जुलाई 2003 को मंदिर में सुबह एक ही दिन फूल बंगला सजाया गया था।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुबह भी फूलबंगला सजाए जाने के बाद वृंदावन में फूलों की बिक्री में उछाल आया है। इसके बाद वृंदावन में फूलबंगला से जुड़े कारोबार को पंख जरूर लग जाएंगे।
बांकेबिहारी महाराज के फूलबंगला की लागत का कारोबार प्रतिदिन लाखों रुपयों में आंका जाता है। जिसमें देशी-विदेशी फूलों के साथ ही बड़ी तादाद में कलाकार और मजदूर सेवाकार्य करते हैं।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुबह भी फूलबंगला सजाए जाने के बाद वृंदावन में फूलों की बिक्री में उछाल आया है। इसके बाद वृंदावन में फूलबंगला से जुड़े कारोबार को पंख जरूर लग जाएंगे।
बांकेबिहारी महाराज के फूलबंगला की लागत का कारोबार प्रतिदिन लाखों रुपयों में आंका जाता है। जिसमें देशी-विदेशी फूलों के साथ ही बड़ी तादाद में कलाकार और मजदूर सेवाकार्य करते हैं।