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पीसीएस-जे : आरुषि ने 85वीं और कुशाग्र ने 94 वीं रैंक हासिल की
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संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। मथुरा की बेटी आरुषि शर्मा एवं वृंदावन के होनहार कुशाग्र मिश्रा ने पीसीएस जे परीक्षा में क्रमश: 85वीं व 94वीं रैंक लाकर जिले का नाम रोशन कर दिया है। आरुषि के पिता दिलीप कुमार शर्मा अधिवक्ता हैं। आर्य समाज रोड पर रहने वाली आरुषि की पढ़ाई जयपुर यूनिवर्सिटी से हुई है। एलएलबी के बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया। आरुषि मध्यप्रदेश ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षा भी पास कर चुकी हैं, लेकिन किन्ही कारणों से वहां ज्वाइन नहीं किया। उनकी मां ज्योति शर्मा गृहिणी हैं। आरुषि की इंटर तक की पढ़ाई मथुरा में ही हुई है। उनका भाई पीएचडी कर रहा है जबकि बहन बीडीएस कर रही है। वृंदावन निवासी कुशाग्र मिश्रा एडवोकेट ने जज बनकर अपने दादाजी का सपना पूरा कर दिया है। पिता आशुतोष मिश्रा भी अधिवक्ता हैं। सतीश चंद्र मिश्रा डीजीसी रहे थे। कुशाग्र ने वकालत की पढ़ाई पूरी कर मथुरा बार एसोसिएशन में वर्ष 2021 में अधिवक्ता के तौर पर नामांकन कराया। दिल्ली यूनिवर्सिटी लॉ केंपस से 2020 में उन्होंने एलएलबी की थी। इससे पूर्व बीटेक मैकेनिकल कर चुके हैं। कानून में रुचि और दादाजी के सपने को पूरा करने के लिए न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया। उन्होंने बताया कि लक्ष्य तय कर उसे हासिल करने के लिए पूरे समर्पण से कार्य करें तो निराशा हाथ नहीं लगेगी। न्यायिक सेवा में जाने की तैयारी करने वाले युवाओें के लिए उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में मन लगाकर पढ़ें, संविधान पीठ के आदेशों को पढें। न्यायिक अधिकारियों की जीवनी पढ़ें, इससे मनोबल बढ़ता है और रुचि जगती है। अधिवक्ताओं के दो बच्चों को न्यायिक सेवा में चयन होेने पर बार एसोसिएशन ने खुशी जताई।
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मथुरा। मथुरा की बेटी आरुषि शर्मा एवं वृंदावन के होनहार कुशाग्र मिश्रा ने पीसीएस जे परीक्षा में क्रमश: 85वीं व 94वीं रैंक लाकर जिले का नाम रोशन कर दिया है। आरुषि के पिता दिलीप कुमार शर्मा अधिवक्ता हैं। आर्य समाज रोड पर रहने वाली आरुषि की पढ़ाई जयपुर यूनिवर्सिटी से हुई है। एलएलबी के बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया। आरुषि मध्यप्रदेश ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षा भी पास कर चुकी हैं, लेकिन किन्ही कारणों से वहां ज्वाइन नहीं किया। उनकी मां ज्योति शर्मा गृहिणी हैं। आरुषि की इंटर तक की पढ़ाई मथुरा में ही हुई है। उनका भाई पीएचडी कर रहा है जबकि बहन बीडीएस कर रही है। वृंदावन निवासी कुशाग्र मिश्रा एडवोकेट ने जज बनकर अपने दादाजी का सपना पूरा कर दिया है। पिता आशुतोष मिश्रा भी अधिवक्ता हैं। सतीश चंद्र मिश्रा डीजीसी रहे थे। कुशाग्र ने वकालत की पढ़ाई पूरी कर मथुरा बार एसोसिएशन में वर्ष 2021 में अधिवक्ता के तौर पर नामांकन कराया। दिल्ली यूनिवर्सिटी लॉ केंपस से 2020 में उन्होंने एलएलबी की थी। इससे पूर्व बीटेक मैकेनिकल कर चुके हैं। कानून में रुचि और दादाजी के सपने को पूरा करने के लिए न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाया। उन्होंने बताया कि लक्ष्य तय कर उसे हासिल करने के लिए पूरे समर्पण से कार्य करें तो निराशा हाथ नहीं लगेगी। न्यायिक सेवा में जाने की तैयारी करने वाले युवाओें के लिए उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में मन लगाकर पढ़ें, संविधान पीठ के आदेशों को पढें। न्यायिक अधिकारियों की जीवनी पढ़ें, इससे मनोबल बढ़ता है और रुचि जगती है। अधिवक्ताओं के दो बच्चों को न्यायिक सेवा में चयन होेने पर बार एसोसिएशन ने खुशी जताई।