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Mathura News: नियम विरुद्ध पदोन्नति से बना पीए, जांच करवाकर करें कार्रवाई
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मथुरा। नगर निगम में बैकलॉग सफाईकर्मियों की नियम विरुद्ध पदोन्नति के एक मामले में पाषर्दों ने नगरीय विकास मंत्री, नगर आयुक्त और मंडलायुक्त को शिकायत भेजकर जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
पार्षद राजवीर सिंह चौधरी व अन्य ने आयुक्त को दिए ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में नगर आयुक्त के पीए के तौर पर कार्य कर रहे होशियार सिंह की वर्ष 2007 में सफाईकर्मी के तौर पर नियुक्ति हुई थी। लेकिन कथित तौर पर नगर पालिका के तत्कालीन अधिकारियों से साठगांठ कर 2011 में लिपिक के तौर पदोन्नति पा ली। जबकि नियमानुसार पांच साल की सेवा के बाद ही पदोन्नति का प्रावधान है।
इस मामले में क्षुब्ध बैकलॉग कोट से भर्ती अन्य सफाई कर्मियों ने शासन एवं जिला प्रशासन से शिकायत की। इसके बाद जांच बैठाई गई। अपर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने 15 जुलाई 2016 में दी रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर अनियमितता पाते हुए पदोन्नति को नियम विरुद्ध मानते हुए तत्काल निरस्त करने की संस्तुति की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ज्ञापन में आरोप है कि होशियार सिंह को आज भी सफाईकर्मी का ही वेतन मिलता है, लेकिन काम पीए का कर रहे हैं।
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पार्षदों ने बताया कि पीए ने जलकल परिसर में स्थित अवर अभियंता का सरकारी आवास अपने नाम से आवंटित करवा लिया है, जोकि नियमानुसार सही नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर न्यायोचित कार्रवाई करें। शिकायत करने वालों में पार्षद नीरज वशिष्ठ, सुभाष यादव, विकास दिवाकर,नीनू वर्मा, चंदू, रचना शर्मा आदि शामिल रहे।
वर्ष 2007 में बैकलॉग पदों पर सफाई कर्मचारी के तौर पर मेरी नियुक्ति हुई थी। इनमें से 33 कर्मचारियों ने 2011 में लिपिक पद पदोन्नति पा ली। इसमें मेरा नाम भी शामिल था। जलकल परिसर में अनेक कर्मचारियों ने आवास आवंटित करवा रखे हैं, मैं अकेला नहीं हूं।
- होशियार सिंह
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पार्षद राजवीर सिंह चौधरी व अन्य ने आयुक्त को दिए ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में नगर आयुक्त के पीए के तौर पर कार्य कर रहे होशियार सिंह की वर्ष 2007 में सफाईकर्मी के तौर पर नियुक्ति हुई थी। लेकिन कथित तौर पर नगर पालिका के तत्कालीन अधिकारियों से साठगांठ कर 2011 में लिपिक के तौर पदोन्नति पा ली। जबकि नियमानुसार पांच साल की सेवा के बाद ही पदोन्नति का प्रावधान है।
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इस मामले में क्षुब्ध बैकलॉग कोट से भर्ती अन्य सफाई कर्मियों ने शासन एवं जिला प्रशासन से शिकायत की। इसके बाद जांच बैठाई गई। अपर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने 15 जुलाई 2016 में दी रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर अनियमितता पाते हुए पदोन्नति को नियम विरुद्ध मानते हुए तत्काल निरस्त करने की संस्तुति की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ज्ञापन में आरोप है कि होशियार सिंह को आज भी सफाईकर्मी का ही वेतन मिलता है, लेकिन काम पीए का कर रहे हैं।
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पार्षदों ने बताया कि पीए ने जलकल परिसर में स्थित अवर अभियंता का सरकारी आवास अपने नाम से आवंटित करवा लिया है, जोकि नियमानुसार सही नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर न्यायोचित कार्रवाई करें। शिकायत करने वालों में पार्षद नीरज वशिष्ठ, सुभाष यादव, विकास दिवाकर,नीनू वर्मा, चंदू, रचना शर्मा आदि शामिल रहे।
वर्ष 2007 में बैकलॉग पदों पर सफाई कर्मचारी के तौर पर मेरी नियुक्ति हुई थी। इनमें से 33 कर्मचारियों ने 2011 में लिपिक पद पदोन्नति पा ली। इसमें मेरा नाम भी शामिल था। जलकल परिसर में अनेक कर्मचारियों ने आवास आवंटित करवा रखे हैं, मैं अकेला नहीं हूं।
- होशियार सिंह