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नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता का प्रमाण: संदीप सिंह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:57 AM IST
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Opposition to 'Nari Shakti Vandan Adhiniyam' is Proof of the Opposition's Anti-Women Mindset: Sandeep Singh
वृंदावन। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने रविवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों के रवैये पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने वाले अधिनियम से जहां कांग्रेस को अपनी राजनीति खत्म हो जाने का डर है तो वहीं धर्म आधारित आरक्षण की मांग करने वाली सपा महिलाओं को अधिकार दिलाने से पीछे हट रही है। संसद में विपक्ष द्वारा किया गया विरोध उनकी महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। इसका खामियाजा आगामी चुनाव में विपक्षी दलों को भुगतना होगा।
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यह विचार उन्होंने गीता शोध संस्थान में पत्रकार वार्ता के दौरान कहे। उन्होंने आरोप लगाया कि 16-17 अप्रैल को संसद में रखे गए महत्वपूर्ण विधेयक का सपा, कांग्रेस और टीएमसी जैसे दलों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अड़ंगे लगाकर इस संशोधित बिल की राह में बाधा डाली। हंगामे के कारण तीन में से दो प्रमुख विधेयक पारित नहीं हो सके, जिससे देश की करोड़ों महिलाएं अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गई हैं।
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विपक्षी दलों द्वारा परिसीमन को लेकर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि यह केवल तुष्टीकरण की राजनीति और जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इससे किसी भी राज्य के हितों का नुकसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस अधिनियम ने विपक्ष के असली चेहरे को जनता के सामने बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा परिसीमन किए जाने से दक्षिण भारत को नुकसान नहीं है।
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उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर इस विधेयक से विपक्ष को किसी तरह का नुकसान नहीं दिख रही है, लेकिन संसद एवं विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने पर हाथ पीछे खींच लिए हैं। गृहमंत्री अमित शाह के बात का उल्लेख करते हुए संदीप सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक महिलाओं को उनके हक से दूर रखा। वहीं टीएमसी पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा करने में विफल रहने वाली पार्टी अब संसद में महिला अधिकारों की राह रोक रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए सक्रिय हैं। आगामी चुनावों में महिलाएं इस बात का बदला लेंगी।
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