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एक करोड़ तक पहुंचेगी श्रद्धालुओं की कतार
अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:41 PM IST
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मुड़िया पूर्णिमा मेला कल से
- फोटो : अमर उजाला
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यूं तो ब्रज में गिरिराज महाराज की परिक्रमा साल भर चलती है लेकिन आषाढ़ मास की एकादशी से पूर्णमासी तक गिरिराज परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है। गोवर्धन में यह अवसर ही मुड़िया मेले के नाम से विख्यात है। इस बार 15 जुलाई से 19 जुलाई तक मेले का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचकर गिरिराजजी की आराधना करेंगे। परिक्रमा, भंडारा, भागवत के साथ मुड़िया शोभायात्रा का आयोजन विशेष आकर्षण होंगे। इस बार करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं के मेले में पहुंचने का अनुमान है।
कस्बा गोवर्धन के गिरिराज दानघाटी मंदिर से सात कोस की गिरि परिक्रमा की शुरूआत के बाद श्रद्धालु नगला शेऊ, भीमनगर, आन्यौर, पूंछरी और जतीपुरा होते हुए वापस गोवर्धन आ जाएंगे। यहां से राधाकुंड परिक्रमा मार्ग में प्रवेश कर नगला सपेरा, राधाकुंड, नगला सांखी होकर मुकुटमुखारबिंद मंदिर पर परिक्रमा पूर्ण करेंगे। मान्यता है कि गिरिराज से भक्त जो भी मांगते हैं वह मिल जाता है। मन्नत पूरी होने पर भक्त परिक्रमा लगाने आते हैं।
महंत रामकृष्ण दास के अनुसार एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान कृष्ण का विशेष अनुग्रह माना जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में परिक्रमा करने वालों की संख्या लाखों तक पहुंचती है। भावसेवा में बड़े बड़े शहरों से लोग गिरिराज जी के सामने अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं और पूजन कर मनौती मांगते हैं।
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इस बार मुड़िया पूर्णिमा मेले में एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। 17, 18 और 19 जुलाई को भारी भीड़ रहेगी।19 को गुरु पूर्णिमा पर्व है। 17 को गोवर्धन पहुंचकर लोग 18 की रात से परिक्रमा शुरू कर देंगे। साहित्यकार डा. विनोद दीक्षित का कहना है कि गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और मुड़िया पूर्णिमा एक ही पर्व के पर्याय है। इस दिन का लोग ज्यादा महत्व मानते हैं लिहाजा परिक्रमार्थियों की संख्या बढ़ जाती है।
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कस्बा गोवर्धन के गिरिराज दानघाटी मंदिर से सात कोस की गिरि परिक्रमा की शुरूआत के बाद श्रद्धालु नगला शेऊ, भीमनगर, आन्यौर, पूंछरी और जतीपुरा होते हुए वापस गोवर्धन आ जाएंगे। यहां से राधाकुंड परिक्रमा मार्ग में प्रवेश कर नगला सपेरा, राधाकुंड, नगला सांखी होकर मुकुटमुखारबिंद मंदिर पर परिक्रमा पूर्ण करेंगे। मान्यता है कि गिरिराज से भक्त जो भी मांगते हैं वह मिल जाता है। मन्नत पूरी होने पर भक्त परिक्रमा लगाने आते हैं।
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महंत रामकृष्ण दास के अनुसार एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान कृष्ण का विशेष अनुग्रह माना जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में परिक्रमा करने वालों की संख्या लाखों तक पहुंचती है। भावसेवा में बड़े बड़े शहरों से लोग गिरिराज जी के सामने अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं और पूजन कर मनौती मांगते हैं।
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इस बार मुड़िया पूर्णिमा मेले में एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। 17, 18 और 19 जुलाई को भारी भीड़ रहेगी।19 को गुरु पूर्णिमा पर्व है। 17 को गोवर्धन पहुंचकर लोग 18 की रात से परिक्रमा शुरू कर देंगे। साहित्यकार डा. विनोद दीक्षित का कहना है कि गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और मुड़िया पूर्णिमा एक ही पर्व के पर्याय है। इस दिन का लोग ज्यादा महत्व मानते हैं लिहाजा परिक्रमार्थियों की संख्या बढ़ जाती है।