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‘गैरों’ के सहारे छोड़ गए ‘अपने’

Mon, 26 Dec 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला वृंदावन
अमर उजाला वृंदावन Updated Mon, 26 Dec 2016 11:43 PM IST
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old woman left abondoned in vrindavan
लीलावती खा रहीं दर-दर की ठोकर - फोटो : अमर उजाला वृंदावन
भरा पूरा परिवार बनाकर भी एक वृद्ध महिला को आश्रय पाने के लिए दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही हैं। वृद्धा की असहाय स्थिति को देखते हुए सोमवार को उनकी नातिन आश्रय दिलाने के उद्देश्य से अपनी दादी को कनकधारा फाउंडेशन के पास छोड़ गईं। 
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दिल्ली की मूल निवासी लीलावती (82) ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके कलेजे के टुकड़े कभी उनको खुद से दूर कर देंगे। लेकिन पांच बेटों और दो पुत्रियाें की मां बच्चों की गृहस्थी बसने के बाद बेसहारा हो गईं। उम्र के आखिरी पड़ाव में लीलावती के अपने ही उनको अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है।
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लीलावती आश्रय पाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रही थीं। यह स्थिति देख नेहा (25) अपनी दादी लीलावती को सोमवार को दोपहर में कनकधारा फाउंडेशन की संस्थापक डा. लक्ष्मी गौतम के पास छोड़ गईं। पीड़ित वृद्धा को लक्ष्मी गौतम ने अपने गौतमपाड़ा स्थित घर में आश्रय दिया है। 
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