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तेल चोरी में शामिल पुलिस वालों को बचा रहे अफसर
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 04 Mar 2017 10:42 PM IST
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रिफाइनरी की पाइप लाइन से तेल चोरी करने वाले तेल माफिया के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
- फोटो : अमर उजाला
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100 करोड़ रुपये से अधिक की तेल चोरी के मामले में पुलिसकर्मियों की लिप्तता को नजरअंदाज किया जा रहा है। एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी मामले में लिप्त होने के आरोपी छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जालंधर पाइपलाइन से तेल चोरी के 17 आरोपियों में से चार सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। मनोज गोयल समेत 13 आरोपी फरार हैं। तेल चोरी में दो दरोगा और चार सिपाहियों की लिप्तता की बात भी सामने आई थी। तेल माफिया के साथ इनको देखा गया था। इनकी गाड़ी भी तेल माफिया इस्तेमाल कर रहे थे। तेल चोरी के खुलासे को एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक दरोगा प्रदीप यादव का नाम सामने आया था। इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई है। इसके खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। लिप्त होना पाया गया तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा किसी पुलिसकर्मी का नाम प्रकाश में नहीं आया।
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-कुंवर अनुपम सिंह, एएसपी
दरोगा की स्कॉर्पियो गाड़ी में तेल माफिया
2013 में मथुरा में स्वाट टीम प्रभारी रहे दरोगा प्रदीप कुमार यादव से रामहरि प्रधान की दोस्ती थी। दरोगा का उन्नाव तबादला होने के बाद भी ये दोस्ती बरकरार रही। रामहरी दरोगा की स्कॉर्पियो गाड़ी में घूमता था। खास बात यह है कि जिस समय प्रदीप कुमार स्वाट टीम प्रभारी रहे उसकी टीम में शामिल सिपाही भी मथुरा व आसपास के थानों में जमे रहे। वे भी लगातार रामहरी के संपर्क में बने रहे। डेढ़ माह पूर्व प्रदीप कुमार ने मथुरा में फिर से तबादला करा लिया था। उनकी पोस्टिंग बरसाना थाना में ही कर दी गई।
बचे हैं शक के घेरे में आए पुलिसकर्मी
रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंध लगाकर तेल चोरी के मामले में हाइवे थाने के दरोगा, थाना प्रभारी और बीट सिपाही भी शक के घेरे में थे। खुलासे वाले दिन एसएसपी मोहित गुप्ता ने इनकी भूमिका की जांच कराए जाने की बात कही थी। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई या नहीं, अभी तक खुलासा तक नहीं किया गया है।
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जालंधर पाइपलाइन से तेल चोरी के 17 आरोपियों में से चार सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। मनोज गोयल समेत 13 आरोपी फरार हैं। तेल चोरी में दो दरोगा और चार सिपाहियों की लिप्तता की बात भी सामने आई थी। तेल माफिया के साथ इनको देखा गया था। इनकी गाड़ी भी तेल माफिया इस्तेमाल कर रहे थे। तेल चोरी के खुलासे को एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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एक दरोगा प्रदीप यादव का नाम सामने आया था। इसकी रिपोर्ट सौंप दी गई है। इसके खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। लिप्त होना पाया गया तो कार्रवाई होगी। इसके अलावा किसी पुलिसकर्मी का नाम प्रकाश में नहीं आया।
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-कुंवर अनुपम सिंह, एएसपी
दरोगा की स्कॉर्पियो गाड़ी में तेल माफिया
2013 में मथुरा में स्वाट टीम प्रभारी रहे दरोगा प्रदीप कुमार यादव से रामहरि प्रधान की दोस्ती थी। दरोगा का उन्नाव तबादला होने के बाद भी ये दोस्ती बरकरार रही। रामहरी दरोगा की स्कॉर्पियो गाड़ी में घूमता था। खास बात यह है कि जिस समय प्रदीप कुमार स्वाट टीम प्रभारी रहे उसकी टीम में शामिल सिपाही भी मथुरा व आसपास के थानों में जमे रहे। वे भी लगातार रामहरी के संपर्क में बने रहे। डेढ़ माह पूर्व प्रदीप कुमार ने मथुरा में फिर से तबादला करा लिया था। उनकी पोस्टिंग बरसाना थाना में ही कर दी गई।
बचे हैं शक के घेरे में आए पुलिसकर्मी
रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंध लगाकर तेल चोरी के मामले में हाइवे थाने के दरोगा, थाना प्रभारी और बीट सिपाही भी शक के घेरे में थे। खुलासे वाले दिन एसएसपी मोहित गुप्ता ने इनकी भूमिका की जांच कराए जाने की बात कही थी। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई या नहीं, अभी तक खुलासा तक नहीं किया गया है।