फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   Offer water to the Sun and receive blessing

अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर लिया आशीर्वाद

Mon, 07 Nov 2016 12:04 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Mon, 07 Nov 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
Offer water to the Sun and receive blessing
अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देकर लिया आशीर्वाद - फोटो : Amar Ujala
जलाशयों पर गाजे-बाजे के साथ उमड़ा आस्था का सैलाब
विज्ञापन

अर्घ्य के बाद घाटों पर व्रतियों के परिवारवालों ने की आतिशबाजी
केले की डालों, झालरों, आम के पत्तों आदि से सजाए गए घाट

छठ पर्व पर रविवार की शाम व्रती महिलाओं ने आस्था और श्रद्धा के साथ अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर मंगलकामना की। संतान की कामना और अचल सुहाग के निमित्त बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने नहर, गोमती सरोवर और कृत्रिम जलाशयों में खड़े होकर भगवान सूर्य की आराधना की।
महिलाएं दोपहर बाद तीन बजे से घरों से टोली बनाकर घाटों के लिए निकलीं। हाथों में कलश व दीप लिए नंगे पैर ‘कांच ही बांस क बहगिया, बहगी लचकत जाए ...’ जैसे मंगल गीत गाते हुए टोल पूजा के लिए घाटों की ओर जा रहे थे। उनके साथ परिवार का कोई सदस्य सिर पर पूजा सामग्री लिए चल रहा था। घाटों पर भीड़ थी और लोग जयघोष कर रहे थे। महिलाएं वेदी के समक्ष बैठकर सूप में पूजन सामग्री सजाकर तैयार थी। अस्ताचल होते ही सूर्य को महिलाओं ने जल में खड़े होकर विधिवत पूजा-अर्चना कर अर्घ्य दिया और परिक्रमा कर मंगल कामना की। इसके बाद लोगों ने पटाखे फोड़े। जलता हुआ दीपक हाथ में लेकर सुबह फिर घाट पर पहुंचने के संकल्प के साथ महिलाएं घर को लौटीं।
विज्ञापन

महापर्व पर गोमती सरोवर, आगरा कैनाल नहर, रजबहा, पोखरों पर भी गाजे-बाजे के साथ भीड़ देखी गई। घाटों से लौटकर व्रती महिलाओं ने घरों में कोसी भरी। इस दौरान मंगल गीत गूंजते रहे। सोमवार को उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं पारण कर व्रत तोड़ेंगी। आगरा कैनाल, रजबाहों, नहर में प्रदूषित जल देखकर व्रतियों की भावनाएं आहत हुईं। छठ पूजा के लिए जगह-जगह कृत्रिम पोखरों, घाटों और कुंडों को रंग-बिरंगी झालरों, आम के पत्तों और झंडी-पताकाओं से सजाया गया था। केले की डालों से बनाए गए मंडप आकर्षक रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


आगे-आगे परिवार, पीछे-पीछे परिचित  
सूप में सजे कलश पर जलता हुआ दीया लेकर व्रतियों के पति, पुत्र या भाई, भतीजे अर्घ्य दिलाने के लिए आगे-आगे चल रहे थे और उनके पीछे परिवार और परिचित भी रहे। व्रती महिलाओं ने घाटों पर सूर्य की पूजा की। वेदियों पर हल्दी से शुभ के प्रतीक बनाए गए। गन्ने के मंडप के नीचे दीए जलाकर अनार, सेव, संतरा, केला, नारियल, चना, गुड़-आटे का खस्ता भोग के रूप में सूर्य को अर्पित किया गया।

यशस्वी पुत्र के लिए महिलाओं ने रखा व्रत
यशस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए व्रती महिलाओं ने शाम होते ही यमुना तट पर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। यमुनाघाट पर दीपदान किया गया। षष्ठी पूजन के पश्चात् व्रती महिलाओं सरोजदेवी, विनीता आदि ने बताया कि दीपावली पर लंका विजय से लौटकर भगवान रामचंद्र ने सीता सहित षष्ठी केदिन अपने कुलदेवता सूर्यनारायण को प्रसन्न कर पुत्र प्राप्ति हेेतु यह अनुष्ठान किया था, जिससे उन्हेें लव-कुश जैसे यशस्वी पुत्रों की प्राप्ति हुई थी।  

नारियल के पात पर उग हो सूरज ...
यमुना के किनारे, टाउनशिप में मनाया गया पर्व, सूर्य को दिया अर्घ्य
‘नारियल के पात पर उग हो सूरजमल, धावे धुप कर ले सूरज देव हमवो, पुछलि बरतिया हौ बरतिया’। कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठ के पर्व पर यमुना के किनारे, कृत्रिम जलाशयों पर महिलाओं ने पूजा-अर्चना की तथा सूर्य को अर्घ्य दिया।
भारतीय सांस्कृतिक समाज के द्वारा छठ पूजा का आयोजन किया गया। किंवदंती है कि राजा प्रियंवद को कोई संतान नहीं थी तब महर्षि कश्यप ने पुत्र की प्राप्ति के लिए यज्ञ कराकर प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर दी। इससे उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन वो पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। प्रियंवद पुत्र को लेकर श्मशान गए और पुत्र वियोग में प्राण त्यागने लगे। उसी वक्त मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं और उन्होंने राजा प्रियंवद से कहा कि वो सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं और इसी कारण वो षष्ठी कहलातीं हैं। राजा प्रियंवद ने पुत्र की इच्छा से देवी षष्ठी का व्रत किया और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से छठ पूजा पुत्रों की दीर्घ आयु के लिए की जाती है।
रिफाइनरी नगर चौपाल में बड़ी संख्या में महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूरज को अर्घ्य दिया। ये पर्व चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाता है। व्यवस्था में शशि भूषण दुबे, महेश शर्मा, एसएन दुबे, सूरज प्रसाद, भरत महतो, बीबी ओझा, किशोर साह, प्रेम चन्द गुप्ता, बालेश्वर सिंह, विनय सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।


छाता में देवछट का पर्व धूमधाम से मनाया
छाता नगर व छाता देहात की कालोनियों में बसे बिहार के लोगों ने देवछट का पर्व धूमधाम से मनाया। पति व पत्नी छत्तीस घंटे का व्रत करते हैं। इसमें जलाशय में खड़े होकर गंगाजल और दूध से सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं। छाता की गिन्नी कालोनी, लक्ष्मी नगर कालोनी, कृष्णा कालोनी, गोरखधाम कालोनी, बरसाना रोड, पैगांव रोड आदि में जगह जगह देवछट का मेला देखने को मिला। इस मौके पर देवराज सिंह, गिरी बाबा, भगवानदास, राम इकबाल, राजदेव, उमाशंकर आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed