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Mathura News: कोलकाता-दिल्ली का नहीं...रंगोत्सव में उड़ेगा ब्रज रज का रंग-गुलाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 12:44 AM IST
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Not Kolkata or Delhi...the colors of Braj's sacred dust and gulal will fill the air during the festival of colors.
मथुरा। सारे जहां से निराली ब्रज की होरी में ब्रज की पवित्र रज में उपजाए गए टेसू, गुलाब और गुड़हल के फूलों से तैयार किए रंगों से उल्लास बिखरेगा। विश्व प्रसिद्ध होली को उसके प्राचीन स्वरूप में लौटाने के लिए वन विभाग ने ब्लूप्रिंट तैयार किया है। वर्ष 2027 के रंगोत्सव में ब्रजवासियों और पर्यटकों को कोलकाता या दिल्ली से आए रासायनिक रंग और गुलाल पर निर्भर नहीं रहना होगा। अब ब्रज के हर ब्लॉक के उपवन में पलाश (टेसू), गुलाब और गुड़हल के पेड़ व पौधे विकसित किए जाएंगे। इनकी फूल-पत्तियों से तैयार स्वदेशी गुलाल व रंग से होली खेली जाएगी।
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योजना के अनुसार, ब्रज के प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर विशेष उपवन विकसित किए जाएंगे। इन उपवनों में पलाश (टेसू), गुलाब, गुड़हल और हल्दी के पौधों का रोपण किया जाएगा। पलाश को ब्रज की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माना जाता है, लेकिन लुप्त होते इन पेड़ों को अब पुनर्जीवित व नए पौधों को लगाया जाएगा, ताकि इनसे भारी मात्रा में प्राकृतिक रंग और गुलाल बनाया जा सके। यह गुलाल व रंग पूरी तरह से प्राकृतिक होगा। इसमें मिट्टी, रेती और रासायनिक पदार्थों का मिश्रण नहीं होगा, ताकि लोगों की त्वचा और आंखों को कोई नुकसान न पहुंच सके। फिलहाल वन विभाग इस योजना का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है। डीएफओ वेंकट श्रीकर पटेल का कहना कि प्रत्येक ब्लॉक में उपवन विकसित करने के लिए जगह चिह्नित की जाएगी। साथ ही प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। प्रस्ताव मंजूरी के बाद इस योजना पर कार्य किया जाएगा। ये पेड़-पौधे ऐसे समय पर लगाए जाएंगे, जो रंगोत्सव से एक माह पहले इन पेड़-पौधों की फूल-पंत्तियों उपलब्ध हो सकें और होली के लिए गुलाल व रंग तैयार किया जा सके।
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ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा
यह योजना केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। वन विभाग उपवनों की देखरेख के लिए स्थानीय स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीणों को जोड़ेगा। वह फूलों की देखरेख से लेकर गुलाल बनाने और उसकी पैकिंग तक का कार्य स्थानीय स्तर पर करेंगे। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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वर्तमान में इन शहरों से आते हैं पलाश और गुलाब के फूल
वर्तमान में ब्रज की विश्व प्रसिद्ध होली के लिए कोलकाता, दिल्ली और हाथरस समेत शहरों से गुलाल व रंग मंगाया जाता है। खासकर के हाथरस से अधिक गुलाल और रंग मंगाया जाता है, जबकि कोलकाता और दिल्ली की मंडी से पलाश (टेसू) और गुलाब के फूल मंगाए जाते हैं। इन फूल-पत्तियों से प्राकृतिक गुलाल व रंग बनाकर राधारानी मंदिर, श्रीबांकेबिहारी मंदिर और नंदगांव में होली खेली जाती है।
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