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Mathura News: राधारानी को नारायण भट्ट ने दिया था लाडली नाम
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- दक्षिण भारत से आए श्रील नारायण भट्ट ने ब्रह्मांचल पर्वत से कराया था प्राकट्य
- बेटी के रूप में की राधा जी की उपासना, अपने शिष्य को दिया सेवा का अधिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। श्रीकृष्ण की प्रिय श्रीराधा को लाडली नाम संबोधन राधा के अनन्य भक्त व मानस पिता श्रील नारायण भट्ट ने दिया था। दक्षिण भारत से ब्रज में आकर बरसाना में ब्रहमांचल पर्वत से उनका प्राकट्य करने वाले श्रील नारायण ने राधा रानी की उपासना अपनी बेटी के रूप में की। अपनी अनन्यता को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने राधा को लाडली कह कर पुकारा। इसीलिए ब्रजवासी राधारानी मंदिर को लाडली जी मंदिर के नाम से पुकारते हैं।
नारायण चरितामृत के अनुसार महान संत व चैतन्य महाप्रभु के अन्य शिष्ट नारायण भट्ट ने 1606 में बरसाना में ब्रह्मांचल पर्वत पर राधा जी का प्राकट्य कर तत्कालीन राजाओं से मंदिर की स्थापना करवाई। माध्य संप्रदाय के अनुसार पूजा अर्चना की संहिता बनाई। पर्वत से प्राकट्य के दौरान अपनी भक्ति उपासना में राधा जी को बेटी स्वरूप में लाड लडाते हुए लाडली नाम दिया। कहा जाता है कि दक्षिण भारत से प्रस्थान करने के बाद नारायण भट्ट को गोदावरी परिक्रमा के दौरान स्वयं ठाकुर जी ने प्रकट होकर विलुप्त ब्रज की स्थापना करने का आदेश दिया, तो भट्ट ने कहा कि मैं कैसे जान पाऊंगा कि ब्रज का वह कौन सा स्थल है। ठाकुर जी ने कहा कि मैं तुम्हारे साथ रहूंगा और ठाकुरजी लाडले विग्रह के रूप में उनके साथ ब्रज आ गए। ब्रज आने पर सबसे पहले भट्ट ने सात साल राधाकुंड पर साधना की। इसके बाद बरसाना के निकट ऊंचागांव को अपना स्थाई स्थान बनाया, जो राधारानी की खास सखी ललिता सखी का गांव भी है। यहां आज भी भट्ट के वंशज ब्रजाचार्य पीठ पर निवास करते हैं। काशी के विद्वानों द्वारा ब्रजाचार्य उपाधि से विभूषित श्रील नारायण भट्ट को राधारानी का प्राकट्य करने के अलावा ब्रज के विलुप्त कृष्णकालीन स्थलों की खोजकर उनकी स्थापना, ब्रज के ग्वाल-बालों के माध्यम से रासलीलानुकरण और ब्रज यात्रा शुरुआत कने का श्रेय भी जाता है। इसकी पुष्टि अंग्रेजी शासन में मथुरा के कलेक्टर रहे संस्थापक एफएस ग्राउस ने अपने शोधपरक ग्रंथ डिस्ट्रिक मेमोयर ऑफ मथुरा में की है।
पीठ से दीक्षित गोस्वामी ही कर सकेंगे लाडली जी की सेवा
नारायण भट्ट की 17वीं पीढ़ी के वंशज व ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता गोस्वामी घनश्याम राज भट्ट ने बताया कि राधारानी को हम बेटी के स्वरूप में मानते हैं। हम वहां से कुछ नहीं ले सकते हैं। श्रील नारायण भट्ट ने राधारानी की सेवा अपने शिष्य को दे दी। बताया कि इसके साथ ही एक शर्त भी रखी गई कि सेवा वही कर सकेगा, जो कि बरसाना का गोस्वामी होगा और वह ब्रजाचार्य पीठ से दीक्षित होगा। अब तक वही परंपरा चली आ रही है।
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- बेटी के रूप में की राधा जी की उपासना, अपने शिष्य को दिया सेवा का अधिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। श्रीकृष्ण की प्रिय श्रीराधा को लाडली नाम संबोधन राधा के अनन्य भक्त व मानस पिता श्रील नारायण भट्ट ने दिया था। दक्षिण भारत से ब्रज में आकर बरसाना में ब्रहमांचल पर्वत से उनका प्राकट्य करने वाले श्रील नारायण ने राधा रानी की उपासना अपनी बेटी के रूप में की। अपनी अनन्यता को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने राधा को लाडली कह कर पुकारा। इसीलिए ब्रजवासी राधारानी मंदिर को लाडली जी मंदिर के नाम से पुकारते हैं।
नारायण चरितामृत के अनुसार महान संत व चैतन्य महाप्रभु के अन्य शिष्ट नारायण भट्ट ने 1606 में बरसाना में ब्रह्मांचल पर्वत पर राधा जी का प्राकट्य कर तत्कालीन राजाओं से मंदिर की स्थापना करवाई। माध्य संप्रदाय के अनुसार पूजा अर्चना की संहिता बनाई। पर्वत से प्राकट्य के दौरान अपनी भक्ति उपासना में राधा जी को बेटी स्वरूप में लाड लडाते हुए लाडली नाम दिया। कहा जाता है कि दक्षिण भारत से प्रस्थान करने के बाद नारायण भट्ट को गोदावरी परिक्रमा के दौरान स्वयं ठाकुर जी ने प्रकट होकर विलुप्त ब्रज की स्थापना करने का आदेश दिया, तो भट्ट ने कहा कि मैं कैसे जान पाऊंगा कि ब्रज का वह कौन सा स्थल है। ठाकुर जी ने कहा कि मैं तुम्हारे साथ रहूंगा और ठाकुरजी लाडले विग्रह के रूप में उनके साथ ब्रज आ गए। ब्रज आने पर सबसे पहले भट्ट ने सात साल राधाकुंड पर साधना की। इसके बाद बरसाना के निकट ऊंचागांव को अपना स्थाई स्थान बनाया, जो राधारानी की खास सखी ललिता सखी का गांव भी है। यहां आज भी भट्ट के वंशज ब्रजाचार्य पीठ पर निवास करते हैं। काशी के विद्वानों द्वारा ब्रजाचार्य उपाधि से विभूषित श्रील नारायण भट्ट को राधारानी का प्राकट्य करने के अलावा ब्रज के विलुप्त कृष्णकालीन स्थलों की खोजकर उनकी स्थापना, ब्रज के ग्वाल-बालों के माध्यम से रासलीलानुकरण और ब्रज यात्रा शुरुआत कने का श्रेय भी जाता है। इसकी पुष्टि अंग्रेजी शासन में मथुरा के कलेक्टर रहे संस्थापक एफएस ग्राउस ने अपने शोधपरक ग्रंथ डिस्ट्रिक मेमोयर ऑफ मथुरा में की है।
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पीठ से दीक्षित गोस्वामी ही कर सकेंगे लाडली जी की सेवा
नारायण भट्ट की 17वीं पीढ़ी के वंशज व ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता गोस्वामी घनश्याम राज भट्ट ने बताया कि राधारानी को हम बेटी के स्वरूप में मानते हैं। हम वहां से कुछ नहीं ले सकते हैं। श्रील नारायण भट्ट ने राधारानी की सेवा अपने शिष्य को दे दी। बताया कि इसके साथ ही एक शर्त भी रखी गई कि सेवा वही कर सकेगा, जो कि बरसाना का गोस्वामी होगा और वह ब्रजाचार्य पीठ से दीक्षित होगा। अब तक वही परंपरा चली आ रही है।
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