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Mathura News: मर्यादा और त्याग के महामिलन पर नम हुईं नर-नारायण की आंखें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Oct 2023 01:02 AM IST
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Nar-Narayan's eyes became moist at the grand union of dignity and sacrifice
कोसीकलां (मथुरा)। प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के मिलन का अद्भुत क्षण, मानों समय थम गया हो। लोगों की निगाहें मान कंधों से गुजरकर पुष्पक विमान में सवार होकर भगवान राम, लक्ष्मण एवं माता जानकी के अयोध्या के गेट पर पहुंचते ही टिक गईं।
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14 वर्ष बाद चारों भाइयों को गले मिलते देख हजारों लीला प्रेमियों के नयन सजल हो गए। मौका था उत्तर भारत के प्रमुख मेले में शुमार प्रसिद्ध भरत मिलाप का।

श्री रामलीला संस्थान द्वारा बुधवार रात आयोजित भरत मिलाप की अद्भुत झांकी देखने के लिए भरत मिलाप चौक, आसपास के घर पूरी तरह दर्शनार्थियों से पटे रहे। एक बार फिर भगवान राम और भरत के मिलाप के 205 साल की लीला का साक्षी बना। मर्यादा और त्याग का महामिलन देखकर नर-नारायण के नयन छलक उठे। क्षण भर की लीला में चारों भाइयों के मिलन का साक्षी बनने को जन-जन आतुर था।
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बुधवार रात में भक्ति का भाव ऐसा छाया कि कोसीकलां में अयोध्या ही उतर आई। हर तरफ स्वत: श्रद्धालुओं के हाथ अपरंपार आस्था की कहानी खुद-ब-खुद बयां कह रहे थे। परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े, नव राजीव नयन जल बाढ़े...। भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे हैं। कृपासिंधु भगवान राम ने उन्हें उठाकर हृदय से लगा लिया। इसके साथ ही चारों भाइयों का भावपूर्ण मिलन देख श्रद्धालु भावुक हो उठे।
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पुष्पक विमान की सवारी निकाली
चित्रकूट के प्रतीक ब्राह्मण सभा धर्मशाला से पुष्पक विमान के प्रतीक रथ पर बुधवार रात 8 बजे श्रीराम, जानकी एवं लक्ष्मण की सवारी हनुमान सहित निकाली गई। इससे पूर्व राम परिवार की आरती की गई। श्रीराम की सवारी को भरत मिलाप चौक पहुंचने में लगभग दो घंटे से अधिक का समय लगा। रास्ते में स्थान-स्थान पर पुष्पवर्षा हुई तथा आरती उतारी गई।
नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया, रोशनी की गई और तोरण द्वारा बनाए गए। रात में श्रीराम की सवारी जब भरत मिलाप चौक में पहुंची तो श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से वातावरण राममय हो चुका था। श्रीराम के पास भरत-शत्रुघ्न के जाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने कंधों से मानव सड़क का निर्माण कर दिया।

हर किसी की एक ही सोच थी कि अगर आज भरत जी उनके कंधों से गुजरकर और उनके शरीर से छू भर गए तो उनका जीवन धन्य हो जाएगा। इस मानव सड़क से भरत एवं शत्रुघ्न अयोध्या के द्वार तक पहुंचे तथा वहां पहुंचकर रामजी से गले मिले। चारों भाइयों के गले मिलते ही ब्रज मंडल का अलौकिक भरतमिलाप रात्रि में संपन्न हो गया।
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