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आज बधायौ ब्रजराज कै, रानी जसमत ने जायौ है पूत...
अमर उजाला मथुरा, नंदगांव
Updated Sat, 27 Aug 2016 12:13 AM IST
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नंदभवन
- फोटो : अमर उजाला
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नंदीश्वर पहाड़ी स्थित नंदभवन में शुक्रवार की मध्य रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने लाला के दर्शन कर खुद को धन्य माना। बरसाना से आए गोस्वामी समाज के लोगों ने समाज गायन कर नंदबाबा और यशोदा मैया को लाला के जन्म की बधाई दी।
नंदगांव की परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। दोपहर 12:30 बजे नंदगांव के गोस्वामियों ने नंदभवन में अष्टछाप के कवियों और अन्य की वाणियों का गायन किया, जो तीन घंटे तक चला। शाम को बरसाना के लोग पारंपरिक वेशभूषा धोती, बगलबंदी से सुसज्जित होकर नंदभवन पहुंचे। बृषभान और रानी कीरत बरसाने के गोप और गोपिकाओं के साथ बधाई लेकर आए। परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पहली बधाई राधा के गांव बरसाने से आती है।
इसके बाद संयुक्त समाज गायन का दौर चला। इसमें ‘आज बधायौ, ब्रजराज कै, रानी जसमत ने जायौ है पूत। आज सुहैला नंद महर घर...’ आदि पदों से लाला के जन्म की बधाई गाई गई। समाज गायन के बाद बरसाना से आए गोस्वामी समाज को उपहार स्वरूप बधाई का लड्डू भेंट किया गया।
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रात को 10 बजे मंदिर प्रांगण में ढांढ पुरोहित ने नंदबाबा की वंशावली का बखान किया। मध्यरात्रि को मंदिर के गर्भगृह में गोस्वामियों ने पंचामृत से लाला के श्रीविग्रह का गुप्त अभिषेक किया। अभिषेक के बाद पट खुलते ही भगवान के दर्शनों को श्रद्धालु उमड़ पड़े। नंद के लाला की जय, यशोदा नंदन की जय से वातावरण गुंजायमान हो रहा था। श्रद्धालुओं को धनियां, पंजीरी और पोतरा वितरित किए गए।
नंदोत्सव का क्रम
- नंदगांव-बरसाना के गोपों के बीच संयुक्त समाज गायन
- दोनों गांवों के गोपों के बीच हास-परिहास।
- प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध
- दधि कांधौ
- बांस बधाई
- शंकर लीला
- शाम को ऐतिहासिक दंगल
छूटे भाइयों की कलाई पर बांधी राखी
नंदगांव में जन्माष्टमी पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधती हैं। कस्बे के अधिकांश गोस्वामी परिवार कामकाज के चलते बाहर रहते हैं। इसलिए जो भाई रक्षाबंधन पर अपनी बहन से रक्षासूत्र बंधवाने से छूट जाता है, उसको इस त्योहार पर रक्षासूत्र में बंधने का सौभाग्य प्राप्त हो जाता है। यह नंदगांव की अनूठी परंपरा है। एक मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी के दिन ही नंद के घर कन्हैया का जन्म हुआ। उस समय बहनों ने लाला के जन्म की प्रतीक्षा कर जन्म के दिन राखी बांधने का प्रण लिया था।
नहीं हुए अभिषेक के दर्शन
नंदबाबा मंदिर में अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते हैं। कृष्ण-बलराम का शृंगार कर मां यशोदा के सिर पर प्रसूता की भांति पट्टी बांध दी जाती है। दर्शनों का सौभाग्य सेवायतों को ही प्राप्त होता है। शयन के समय नव प्रसूता के लिए औषधिप्रद वस्तुओं का भोग लगाया जाता है।
जन्म से पहले कार्यक्रम देख गदगद हुए श्रद्धालु
शुक्रवार को शाम साढ़े सात बजे मंदिर के पट बंद कर दिए गए। रात आठ बजे नंदभवन में भजन संध्या का आयोजन हुआ। करीब 10 बजे ढांढी-ढांढन लीला हुई। करीब साढ़े 11 बजे भगवान कृष्ण का गाय के दूध, घी, दही, शहद, खांड से अभिषेक किया गया। रात 12 बजे प्रभु के जन्म के दर्शन हुए। इस दौरान नंदबाबा मंदिर को रंगबिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया था। नंदगांव के विभिन्न मंदिरों और घरों में शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई गई। बंटा वाली कुंज स्थित पुष्टिमार्गीय नवनीत प्रियाजी मंदिर में गुरुवार को जन्माष्टमी मनाई गई। सेवायत श्याम लाल शर्मा, टीकाराम पुजारी, ओमी पुजारी, मूलचंद पुजारी ने अभिषेक कराया। यहां शुक्रवार को नंदोत्सव मना। हैप्पी बर्थ डे कान्हा कह कर शुभकामनाएं दी गईं।
दंगल आज
नंदगांव में 27 अगस्त की शाम को ऐतिहासिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रांतों के पहलवान अपने दांव पेच दिखाएंगे।
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नंदगांव की परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। दोपहर 12:30 बजे नंदगांव के गोस्वामियों ने नंदभवन में अष्टछाप के कवियों और अन्य की वाणियों का गायन किया, जो तीन घंटे तक चला। शाम को बरसाना के लोग पारंपरिक वेशभूषा धोती, बगलबंदी से सुसज्जित होकर नंदभवन पहुंचे। बृषभान और रानी कीरत बरसाने के गोप और गोपिकाओं के साथ बधाई लेकर आए। परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पहली बधाई राधा के गांव बरसाने से आती है।
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इसके बाद संयुक्त समाज गायन का दौर चला। इसमें ‘आज बधायौ, ब्रजराज कै, रानी जसमत ने जायौ है पूत। आज सुहैला नंद महर घर...’ आदि पदों से लाला के जन्म की बधाई गाई गई। समाज गायन के बाद बरसाना से आए गोस्वामी समाज को उपहार स्वरूप बधाई का लड्डू भेंट किया गया।
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रात को 10 बजे मंदिर प्रांगण में ढांढ पुरोहित ने नंदबाबा की वंशावली का बखान किया। मध्यरात्रि को मंदिर के गर्भगृह में गोस्वामियों ने पंचामृत से लाला के श्रीविग्रह का गुप्त अभिषेक किया। अभिषेक के बाद पट खुलते ही भगवान के दर्शनों को श्रद्धालु उमड़ पड़े। नंद के लाला की जय, यशोदा नंदन की जय से वातावरण गुंजायमान हो रहा था। श्रद्धालुओं को धनियां, पंजीरी और पोतरा वितरित किए गए।
नंदोत्सव का क्रम
- नंदगांव-बरसाना के गोपों के बीच संयुक्त समाज गायन
- दोनों गांवों के गोपों के बीच हास-परिहास।
- प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध
- दधि कांधौ
- बांस बधाई
- शंकर लीला
- शाम को ऐतिहासिक दंगल
छूटे भाइयों की कलाई पर बांधी राखी
नंदगांव में जन्माष्टमी पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधती हैं। कस्बे के अधिकांश गोस्वामी परिवार कामकाज के चलते बाहर रहते हैं। इसलिए जो भाई रक्षाबंधन पर अपनी बहन से रक्षासूत्र बंधवाने से छूट जाता है, उसको इस त्योहार पर रक्षासूत्र में बंधने का सौभाग्य प्राप्त हो जाता है। यह नंदगांव की अनूठी परंपरा है। एक मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी के दिन ही नंद के घर कन्हैया का जन्म हुआ। उस समय बहनों ने लाला के जन्म की प्रतीक्षा कर जन्म के दिन राखी बांधने का प्रण लिया था।
नहीं हुए अभिषेक के दर्शन
नंदबाबा मंदिर में अभिषेक के दर्शन नहीं कराए जाते हैं। कृष्ण-बलराम का शृंगार कर मां यशोदा के सिर पर प्रसूता की भांति पट्टी बांध दी जाती है। दर्शनों का सौभाग्य सेवायतों को ही प्राप्त होता है। शयन के समय नव प्रसूता के लिए औषधिप्रद वस्तुओं का भोग लगाया जाता है।
जन्म से पहले कार्यक्रम देख गदगद हुए श्रद्धालु
शुक्रवार को शाम साढ़े सात बजे मंदिर के पट बंद कर दिए गए। रात आठ बजे नंदभवन में भजन संध्या का आयोजन हुआ। करीब 10 बजे ढांढी-ढांढन लीला हुई। करीब साढ़े 11 बजे भगवान कृष्ण का गाय के दूध, घी, दही, शहद, खांड से अभिषेक किया गया। रात 12 बजे प्रभु के जन्म के दर्शन हुए। इस दौरान नंदबाबा मंदिर को रंगबिरंगी विद्युत झालरों से सजाया गया था। नंदगांव के विभिन्न मंदिरों और घरों में शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई गई। बंटा वाली कुंज स्थित पुष्टिमार्गीय नवनीत प्रियाजी मंदिर में गुरुवार को जन्माष्टमी मनाई गई। सेवायत श्याम लाल शर्मा, टीकाराम पुजारी, ओमी पुजारी, मूलचंद पुजारी ने अभिषेक कराया। यहां शुक्रवार को नंदोत्सव मना। हैप्पी बर्थ डे कान्हा कह कर शुभकामनाएं दी गईं।
दंगल आज
नंदगांव में 27 अगस्त की शाम को ऐतिहासिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। इसमें विभिन्न प्रांतों के पहलवान अपने दांव पेच दिखाएंगे।