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Mathura News: हत्या करने वाले को 14 वर्ष के कारावास की सजा
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मथुरा। युवक की हत्या कर शव को छिपाने वाले को एडीजे अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय ब्रिजेश कुमार द्वितीय की अदालत ने 14 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
जैंत थाना क्षेत्र के थोक सिंघार मोहल्ला निवासी देवेंद्र कुमार ने 24 मार्च 2016 को दर्ज कराई प्राथमिकी में कहा कि उसका भाई राजकुमार दोपहर को खेत पर गया था। देर रात तक वापस नहीं आया। अगले दिन देवेंद्र ने जैंत थाने पहुंच कर बताया कि गांव के कुछ लोगों ने उसके भाई को शाम चार बजे चंद्रपाल, एक नाबालिग व तीन लोगों के साथ चौमुहां अड्डे पर देखा था। देवेंद्र ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उसके भाई की हत्या कर शव को कहीं छिपा दिया है। पुलिस ने नाबालिग व चंद्रपाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने जंगल से राजकुमार के शव को बरामद करा दिया। पुलिस ने दोनों को हत्या कर शव छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था।
मुकदमे की सुनवाई एडीजे अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय ब्रिजेश कुमार द्वितीय की अदालत में हुई। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट, गवाह और साक्ष्यों के आधार पर दोषी नाबालिग को सजा सुनाई है। एडीजीसी क्राइम ने बताया कि वारदात के समय नाबालिग की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इस कारण उसकी पत्रावली को अलग कर दिया गया था। अदालत चंद्रपाल को पूर्व में ही आजीवन कारावास की सजा से दंडित कर चुकी है
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जैंत थाना क्षेत्र के थोक सिंघार मोहल्ला निवासी देवेंद्र कुमार ने 24 मार्च 2016 को दर्ज कराई प्राथमिकी में कहा कि उसका भाई राजकुमार दोपहर को खेत पर गया था। देर रात तक वापस नहीं आया। अगले दिन देवेंद्र ने जैंत थाने पहुंच कर बताया कि गांव के कुछ लोगों ने उसके भाई को शाम चार बजे चंद्रपाल, एक नाबालिग व तीन लोगों के साथ चौमुहां अड्डे पर देखा था। देवेंद्र ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने उसके भाई की हत्या कर शव को कहीं छिपा दिया है। पुलिस ने नाबालिग व चंद्रपाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उन्होंने जंगल से राजकुमार के शव को बरामद करा दिया। पुलिस ने दोनों को हत्या कर शव छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था।
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मुकदमे की सुनवाई एडीजे अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय ब्रिजेश कुमार द्वितीय की अदालत में हुई। कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट, गवाह और साक्ष्यों के आधार पर दोषी नाबालिग को सजा सुनाई है। एडीजीसी क्राइम ने बताया कि वारदात के समय नाबालिग की उम्र 18 वर्ष से कम थी। इस कारण उसकी पत्रावली को अलग कर दिया गया था। अदालत चंद्रपाल को पूर्व में ही आजीवन कारावास की सजा से दंडित कर चुकी है
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