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वेदों का संदर्भ लेकर आगे बढ़े विज्ञान- भागवत
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 23 Sep 2015 08:24 PM IST
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संत ज्ञानेश्वर वेद विद्यालय के शुभारंभ अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जहां विज्ञान खत्म हो जाता है, वेद उसके भी आगे भी जाते हैं। विज्ञान को वेदों से होकर चलना पड़ता है। वेद इंद्रिय बोधक ज्ञान दिलाते हैं। विज्ञान ने मनुष्य के अवयक को यंत्र में परिवर्तित कर दिया लेकिन इसके बाद भी वह उसे नहीं बदल पाया। उन्होंने कहा कि विज्ञान को वेदों का संदर्भ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
भागवत बुधवार को रुक्मिणी विहार वृंदावन स्थित महर्षि वेद व्यास प्रतिष्ठान (पुणे) के संत ज्ञानेश्वर वेद विद्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वेद दर्शन और संस्कृति न हो तो भारत नहीं रहेगा। भारत की पहचान इसी से है। स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि भारत के हर एक कण में धर्म जीवित है, भारत को कोई मिटा नहीं सकता है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि बीच के 2000 वर्ष में भारत की पहचान लुप्त करने की कोशिश हुई, परंतु इसकी जड़े इतनी गहरी हैं कि भारत की मूल पहचान आज भी जीवित है। वर्तमान में संत, आचार्य और विद्वानों को बैठ कर देश, काल परिस्थितियों के अनुरूप वेदों की व्याख्या करनी चाहिए। संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के स्रोत वेदों के रूप में मौजूद हैं।
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इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि इस देश की पहचान राजनीति से नहीं, यहां की संस्कृति और जीवन पद्धति से है। इसे पहचान को कायम रखने के लिए अपने विचारों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि निर्माण की अंधाधुंध में आदमी के जिंदा रहने की मूल जरूरतों को खत्म किया जा रहा है। विकास की कड़ी में आदमी के लिए रावण की लंका नहीं राम की अयोध्या बनाइए।
उन्होंने पानीपत में वेद पाठशाला बनाने की घोषणा के साथ ही वृंदावन स्थित ज्ञानेश्वर वेदविद्यालय के लिए राज्यपाल कोष से 10 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की।
कार्यक्रम में विद्यालय के संस्थापक स्वामी गोविंद गिरी महाराज, भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्मभूषण सत्यमित्रानंद गिरी महाराज, श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद महाराज, महामंडलेश्वर नवल गिरी, महंत फूलडोल बिहारीदास, स्वामी राजेश्वरानंद आदि मौजूद रहे।
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भागवत बुधवार को रुक्मिणी विहार वृंदावन स्थित महर्षि वेद व्यास प्रतिष्ठान (पुणे) के संत ज्ञानेश्वर वेद विद्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वेद दर्शन और संस्कृति न हो तो भारत नहीं रहेगा। भारत की पहचान इसी से है। स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि भारत के हर एक कण में धर्म जीवित है, भारत को कोई मिटा नहीं सकता है।
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आरएसएस प्रमुख ने कहा कि बीच के 2000 वर्ष में भारत की पहचान लुप्त करने की कोशिश हुई, परंतु इसकी जड़े इतनी गहरी हैं कि भारत की मूल पहचान आज भी जीवित है। वर्तमान में संत, आचार्य और विद्वानों को बैठ कर देश, काल परिस्थितियों के अनुरूप वेदों की व्याख्या करनी चाहिए। संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के स्रोत वेदों के रूप में मौजूद हैं।
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इस मौके पर हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि इस देश की पहचान राजनीति से नहीं, यहां की संस्कृति और जीवन पद्धति से है। इसे पहचान को कायम रखने के लिए अपने विचारों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि निर्माण की अंधाधुंध में आदमी के जिंदा रहने की मूल जरूरतों को खत्म किया जा रहा है। विकास की कड़ी में आदमी के लिए रावण की लंका नहीं राम की अयोध्या बनाइए।
उन्होंने पानीपत में वेद पाठशाला बनाने की घोषणा के साथ ही वृंदावन स्थित ज्ञानेश्वर वेदविद्यालय के लिए राज्यपाल कोष से 10 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की।
कार्यक्रम में विद्यालय के संस्थापक स्वामी गोविंद गिरी महाराज, भारत माता मंदिर के संस्थापक पद्मभूषण सत्यमित्रानंद गिरी महाराज, श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद महाराज, महामंडलेश्वर नवल गिरी, महंत फूलडोल बिहारीदास, स्वामी राजेश्वरानंद आदि मौजूद रहे।