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हर माह सरकार के 12 लाख कुतर रहे चूहे

Thu, 07 Apr 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 07 Apr 2016 11:17 PM IST
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mice at mathura junction
हर माह सरकार के 12 लाख कुतर रहे चूहे - फोटो : अमर उजाला
वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन के दावे वाले मथुरा जंक्शन की पटरियों से लेकर प्लेटफार्म तक चूहे दौड़ते नजर आते हैं। स्टेशन की साफ सफाई के मद में सरकार बारह लाख रुपये प्रति माह खर्च करती है, लेकिन इसका नतीजा गंदगी, बदबू और उसमें दौड़ते चूहों के रूप में नजर आता है। कहा जा सकता है कि हर माह सरकार के बारह लाख रुपये चूहे कुतर रहे हैं।
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प्रतिमाह 12 लाख रुपये खर्च और 90 से अधिक सफाई कर्मियों के जुटे रहने के बाद भी जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जगह-जगह गंदगी नजर आती है। गंदगी और बचा हुआ खाना इधर-उधर फेंके जाने से स्टेशन और लाइनों पर चूहे दौड़ते रहते हैं। स्वच्छता निरीक्षण व इंजीनियरिंग शाखा की अनदेखी का परिणाम है कि स्टेशन परिसर में चूहों ने बड़े-बड़े बिल बना लिए हैं।
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मथुरा जंक्शन से रोजाना 180 से 200 तक ट्रेन और मालगाड़ी गुजरती हैं। प्रतिदिन हजारों यात्री मथुरा जंक्शन से होकर अपना सफर तय करते हैं। इससे स्टेशन पर होने वाली गंदगी को साफ करने के लिए मुख्य स्वच्छता निरीक्षक की ओर से ठेका उठाया जाता है। फिलहाल यह ठेका सात लाख प्रति माह के हिसाब से उठाया गया है। इसमें ठेकेदार को चार तरह की मशीनों से स्टेशन और रेल ट्रैक की सफाई करने का एग्रीमेंट है।
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इसमें रेट क्लीनिंग मशीन से पूरे स्टेशन की धुलाई सफाई, हाईजैक प्रेशर से रेलवे लाइनों की सफाई, धुलाई और कूड़ा उठाना तय है, लेकिन स्टेशन पर अधिकांश मेन्युअल ही पानी मारकर सफाई की जा रही है। प्लेटफार्म पर कभी-कभी ही मशीन से सफाई की जाती है। सफाई के लिए ठेकेदार के 78 और रेलवे के 20 कर्मचारी दैनिक सफाई काम में लगाए जाते हैं, लेकिन नियमित रूप से 50 लोग भी स्टेशन पर सफाई करते हुए नहीं दिखाई देते हैं। रेल लाइनों की सफाई की मशीन को कभी चलते नहीं देखा गया। 

सीवर लाइनों की सफाई वाणिज्य शाखा के अधीन यांत्रिकी अनुभाग की जिम्मेदारी में है। इसमें ट्रेनों की यार्ड में ले जाकर वाशिंग एप्रेन में सर्फ शैंपू से सफाई, धुलाई, कीटनाशक का पोंछा, पॉलिस और ट्रेन में मिलने वाली गंदगी को नगर पालिका के खत्ता घर तक डालना तय है। इसके लिए यांत्रिकी विभाग का हर माह का पांच लाख का ठेका है। इसके अलावा सर्कुलर ट्रेनों की सफाई-धुलाई, कूड़े को खत्ताघर तक डालने की लोको की जिम्मेदारी है। कुल मिलाकर 12 लाख के खर्च का नतीजा नजर नहीं आता।


हर माह कीटनाशक खरीद का है प्रावधान
रेलवे की लाइनों और स्टेशन पर गंदगी जमी रहती है, मक्खी भिनभिनाती रहती हैं। आवारा पशु गंदगी पर चक्कर लगाते रहते हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार इसे हटाने और सफाई के लिए ठेकेदार को हेल्थ इंस्पेक्टर की संस्तुति पर हर माह डेढ़ लाख रुपये से नालियों में डाला जाने वाला चूना, फिनायल, ब्लीचिंग पाउडर, वैगन ब्लीचिंग, लारवा मारने वाली दवाओं की खरीद की जाती है। इसमें कीटनाशकों का स्प्रे, फॉगिंग आदि कराने का ठेके में प्रावधान है। इसे ठेकेदार के लोगों से कराया जाना तय है, लेकिन स्वच्छता निरीक्षक और ठेकेदार की मिलीभगत से ऐसा कभी-कभी ही होता है। जबकि कीटनाशक दवाओं के बिल पास होते रहते हैं।
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