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मोर बन गए मदन मुरारी, ऐसो नृत्य कियो गिरधारी
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मथुरा। मोर कुटी पर कान्हा स्वरूप मोर बन कर नाचते हुए।
- फोटो : MATHURA
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बरसाना (मथुरा)। बूढ़ी लीला के दौरान गहवर वन स्थित मोर कुटी पर शनिवार को मयूर लीला का मंचन किया गया। राधा जन्म के बाद होने वाली द्वापरकालीन लीलाओं को बूढ़ी लीला का नाम दिया गया है। मयूर लीला को लेकर ब्रज में मान्यता है कि एक बार कृष्ण की प्राण प्रिय श्रीराधा के रूठने पर श्रीकृष्ण ने उन्हें मनाने के अनेक जतन किए, लेकिन राधा जी प्रसन्न नहीं हुईं। अंत में भगवान कृष्ण मोर का रूप धारण कर राधा जी के सामने नृत्य करने लगे। नृत्य देख राधा जी प्रसन्न हो गईं।
इन लीलाओं का शुभारंभ ब्रज के ग्वाल वालों को साथ लेकर 500 साल पहले रासलीला के अनुकरणकर्ता महाप्रभु नारायण भट्ट ने किया था। अष्ट सखियों के गांव में होने वाली इन बूढ़ी लीलाओं का मंचन चिकसौली के बिरजन स्वामी द्वारा परंपरागत रूप से किया जा रहा है।
लीला की झलक पाने के लिए तपती धूप में श्रद्धालु डटे रहे और लीला शुरू होने से पूर्व भजन और कीर्तन के साथ राधाकृष्ण के स्वरूपों के साथ आने का इंतजार करते रहे। लीला की शुरुआत युगल सरकार की आरती के साथ हुई। साल दर साल अपने आराध्य के प्रति यह उत्साह लगातार सैलाब बन कर बढ़ता जा रहा है। देश के दूरस्थ स्थानों से आए श्रद्धालु लीला की एक झलक पाकर अपने को धन्य मानने लगे।
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विलासगढ़ की जोगिन लीला आज
बरसाना। बूढ़ी लीला के चलते आठ सितंबर को बरसाना-चिकसौली के मध्य स्थित विलासगढ़ पर रास विलास एवं जोगिन लीला का आयोजन होगा।
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इन लीलाओं का शुभारंभ ब्रज के ग्वाल वालों को साथ लेकर 500 साल पहले रासलीला के अनुकरणकर्ता महाप्रभु नारायण भट्ट ने किया था। अष्ट सखियों के गांव में होने वाली इन बूढ़ी लीलाओं का मंचन चिकसौली के बिरजन स्वामी द्वारा परंपरागत रूप से किया जा रहा है।
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लीला की झलक पाने के लिए तपती धूप में श्रद्धालु डटे रहे और लीला शुरू होने से पूर्व भजन और कीर्तन के साथ राधाकृष्ण के स्वरूपों के साथ आने का इंतजार करते रहे। लीला की शुरुआत युगल सरकार की आरती के साथ हुई। साल दर साल अपने आराध्य के प्रति यह उत्साह लगातार सैलाब बन कर बढ़ता जा रहा है। देश के दूरस्थ स्थानों से आए श्रद्धालु लीला की एक झलक पाकर अपने को धन्य मानने लगे।
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विलासगढ़ की जोगिन लीला आज
बरसाना। बूढ़ी लीला के चलते आठ सितंबर को बरसाना-चिकसौली के मध्य स्थित विलासगढ़ पर रास विलास एवं जोगिन लीला का आयोजन होगा।