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Mathura News: तीन माह से महापौर विनोद अग्रवाल नदारद
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मथुरा। नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल करीब तीन माह से अपने निगम स्थित कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। इसके कारण करीब 60 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं
नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने की जिम्मेदारी संभालने वाले महापौर विनोद अग्रवाल की लंबे समय से गैरमौजूदगी शहर की सियासत से लेकर निगम के कामकाज तक चर्चा का विषय बन गई है। बोर्ड बैठक पर भी असमंजस बना हुआ है। महापौर की निगम कार्यालय के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों व भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी गैरमौजूदगी बनी हुई है। 14 अगस्त को शहर में निकाली गई तिरंगा यात्रा, 15 अगस्त को नगर निगम कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी उनकी अनुपस्थिति रही।
यहां तक कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में भी महापौर नदारद रहे। राष्ट्रीय पर्वों पर उनकी गैरमौजूदगी ने पार्षदों और अधिकारियों को हैरान कर दिया। लगातार कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने के कारण उनकी सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पार्षद राजीव सिंह, कुलदीप पाठक और राकेश भाटिया का कहना है कि बोर्ड बैठक के लिए महापौर से संपर्क किया लेकिन उनका जवाब नहीं आया। पार्षदों की मांग पर नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने बोर्ड बैठक व अवस्थापन निधि के प्रस्तावों के संबंध में शासन को पत्राचार किया है। नगर आयुक्त का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में बोर्ड बैठक होने की संभावना है।
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60 करोड़ के प्रस्तावों पर अटकी निगाहें
नगर निगम में अवस्थापना निधि के तहत 60 करोड़ रुपये से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जाने हैं। इनके प्रस्तावों पर महापौर सहित अन्य के आवश्यक हस्ताक्षर नहीं होने के कारण आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पार्षदों का मानना है कि बोर्ड बैठक और प्रस्तावों पर हस्ताक्षर के बाद ही विकास कार्यों को गति मिलेगी।
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विकास कार्यों को गति देने के लिए बोर्ड बैठक होना जरूरी है। अवस्थापना निधि के प्रस्ताव लंबित हैं। महापौर की अनुपस्थिति के कारण कई जरूरी काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। हालांकि महापौर से संपर्क साधकर बोर्ड बैठक कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-मुकेश सारस्वत, उपसभापति, नगर निगम
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नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने की जिम्मेदारी संभालने वाले महापौर विनोद अग्रवाल की लंबे समय से गैरमौजूदगी शहर की सियासत से लेकर निगम के कामकाज तक चर्चा का विषय बन गई है। बोर्ड बैठक पर भी असमंजस बना हुआ है। महापौर की निगम कार्यालय के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों व भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी गैरमौजूदगी बनी हुई है। 14 अगस्त को शहर में निकाली गई तिरंगा यात्रा, 15 अगस्त को नगर निगम कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी उनकी अनुपस्थिति रही।
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यहां तक कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में भी महापौर नदारद रहे। राष्ट्रीय पर्वों पर उनकी गैरमौजूदगी ने पार्षदों और अधिकारियों को हैरान कर दिया। लगातार कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने के कारण उनकी सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पार्षद राजीव सिंह, कुलदीप पाठक और राकेश भाटिया का कहना है कि बोर्ड बैठक के लिए महापौर से संपर्क किया लेकिन उनका जवाब नहीं आया। पार्षदों की मांग पर नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने बोर्ड बैठक व अवस्थापन निधि के प्रस्तावों के संबंध में शासन को पत्राचार किया है। नगर आयुक्त का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में बोर्ड बैठक होने की संभावना है।
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60 करोड़ के प्रस्तावों पर अटकी निगाहें
नगर निगम में अवस्थापना निधि के तहत 60 करोड़ रुपये से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जाने हैं। इनके प्रस्तावों पर महापौर सहित अन्य के आवश्यक हस्ताक्षर नहीं होने के कारण आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पार्षदों का मानना है कि बोर्ड बैठक और प्रस्तावों पर हस्ताक्षर के बाद ही विकास कार्यों को गति मिलेगी।
विकास कार्यों को गति देने के लिए बोर्ड बैठक होना जरूरी है। अवस्थापना निधि के प्रस्ताव लंबित हैं। महापौर की अनुपस्थिति के कारण कई जरूरी काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। हालांकि महापौर से संपर्क साधकर बोर्ड बैठक कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-मुकेश सारस्वत, उपसभापति, नगर निगम