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ग्वालिन दै जा हमारौ दान...
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 26 Sep 2015 10:49 PM IST
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तीन लोक के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण दुनिया के लिए भगवान होंगे, लेकिन ब्रजवासियों के लिए वह सिर्फ नंद के लाला और माखन चोर के नाम से प्रसिद्ध हैं। द्वापर युग में जब गोपियों ने माखन चोर कन्हैया को दही का दान नहीं दिया तो उन्होंने उनकी मटकी फोड़ दी। आज उसी प्राचीन परंपराओं पर चलते बरसाना में चल रहे बूढ़ी लीला महोत्सव के दौरान सांकरी खोर में मटकी फोड़ लीला का आयोजन किया गया।
चिकसौली की चित्रा सखी अपनी सखियों के संग दूध, दही बेचने के लिए निकसी है, तो रास्ते में ठाड़े श्रीकृष्ण गोपियों से कहते है... ठाड़ी रहै ग्वालिनी दै जा हमारौ दान, यही दान के कारण छोड़ आयौ बैकुंठ सौ धाम। जवाब में सखियां बोलीं.. लाला दूध, दही नाए तेरे बाप कौ, और यह गली भी नाए तेरे बाप की, छाछ हमारी जो पीवै जो टहल करैं सब दिन की.. लीला में हंसी ठिठोली के मध्य छीना-झपटी में यशोदा नंदन ने दही का दान न देने पर वृषभानु नंदिनी और उनकी सखियों की दही से भरी मटकी फोड़ दीं।
प्रेम और माधुर्य की इस अद्भुत लीला को देख श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो गए। मान्यता है कि आज से साढ़े पांच हजार वर्ष पहले माखन चोर श्रीकृष्ण ने सांकरी खोर में ही राधारानी और उनकी सखियों से दही का दान मांगा था। सखियों के दही का दान न देने पर नंदलाल ने उनकी मटकी फोड़ दी थी। सांकरी खोर में शनिवार को द्वापर युगीन ये यादें फिर ताजा हो गईं।
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राधा रानी की सबसे प्रिय सखी चित्रा के गांव चिकसौली और मानपुर के घर-घर में माखन चोरी करने के बाद श्रीकृष्ण अपने ग्वालों के साथ सांकरी खोर की सांकरी गली में पहुंच गए और दूध, दही बेचने मथुरा जा रही सखियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान माखन चोर ने सभी सखियों से एक-एक कर दही का दान मांगा। इस अवसर बरसाना और नंदगांव के गोस्वामीजनों के बीच में पद गायन हुआ।
बरसाने की चली गुजरिया कर सोलह शृंगार, उदविल कान्हा धेनु चरावै लूट लियौ नौलक्खा हार। एक चंचल गूजरी लेके दूध बेचने को निकली, सांकरी गली में मिल गए नंदलाल, दूध खायौ मटकी फोड़ी और दूध की कर दई कीच...
मटकी फोड़ लीला के दौरान इन पदों को सुन कर श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो गए। जब भगवान श्रीेकृष्ण के बार-बार कहने पर गोपियां नहीं मानीं तो उन्होंने अपने ग्वालवालों के साथ मिल कर छीनने का प्रयास किया। इसी छीना-झपटी में राधा और उनकी सखियों की मटकी फूट गई। दही की मटकी फूटते ही हजारों श्रद्धालु दही प्रसाद के लिए टूट पड़े।
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चिकसौली की चित्रा सखी अपनी सखियों के संग दूध, दही बेचने के लिए निकसी है, तो रास्ते में ठाड़े श्रीकृष्ण गोपियों से कहते है... ठाड़ी रहै ग्वालिनी दै जा हमारौ दान, यही दान के कारण छोड़ आयौ बैकुंठ सौ धाम। जवाब में सखियां बोलीं.. लाला दूध, दही नाए तेरे बाप कौ, और यह गली भी नाए तेरे बाप की, छाछ हमारी जो पीवै जो टहल करैं सब दिन की.. लीला में हंसी ठिठोली के मध्य छीना-झपटी में यशोदा नंदन ने दही का दान न देने पर वृषभानु नंदिनी और उनकी सखियों की दही से भरी मटकी फोड़ दीं।
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प्रेम और माधुर्य की इस अद्भुत लीला को देख श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो गए। मान्यता है कि आज से साढ़े पांच हजार वर्ष पहले माखन चोर श्रीकृष्ण ने सांकरी खोर में ही राधारानी और उनकी सखियों से दही का दान मांगा था। सखियों के दही का दान न देने पर नंदलाल ने उनकी मटकी फोड़ दी थी। सांकरी खोर में शनिवार को द्वापर युगीन ये यादें फिर ताजा हो गईं।
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राधा रानी की सबसे प्रिय सखी चित्रा के गांव चिकसौली और मानपुर के घर-घर में माखन चोरी करने के बाद श्रीकृष्ण अपने ग्वालों के साथ सांकरी खोर की सांकरी गली में पहुंच गए और दूध, दही बेचने मथुरा जा रही सखियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान माखन चोर ने सभी सखियों से एक-एक कर दही का दान मांगा। इस अवसर बरसाना और नंदगांव के गोस्वामीजनों के बीच में पद गायन हुआ।
बरसाने की चली गुजरिया कर सोलह शृंगार, उदविल कान्हा धेनु चरावै लूट लियौ नौलक्खा हार। एक चंचल गूजरी लेके दूध बेचने को निकली, सांकरी गली में मिल गए नंदलाल, दूध खायौ मटकी फोड़ी और दूध की कर दई कीच...
मटकी फोड़ लीला के दौरान इन पदों को सुन कर श्रद्धालु आनंद से भाव विभोर हो गए। जब भगवान श्रीेकृष्ण के बार-बार कहने पर गोपियां नहीं मानीं तो उन्होंने अपने ग्वालवालों के साथ मिल कर छीनने का प्रयास किया। इसी छीना-झपटी में राधा और उनकी सखियों की मटकी फूट गई। दही की मटकी फूटते ही हजारों श्रद्धालु दही प्रसाद के लिए टूट पड़े।