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मथुरा: श्रीनाम संकीर्तन से ही संभव है भागवत प्रेम की प्राप्ति- चंचलापति दास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 07:45 PM IST
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Mathura: The attainment of Bhagwat love is possible only through Shrinaam Sankirtana - Chanchalapati Das
मथुरा। वृंदावन स्थित चंद्रोदय मंदिर में गौरांग महाप्रभु की 535वीं जयंती गौर पूर्णिमा महोत्सव के अ - फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। होली के उत्सव को गौड़ीय वैष्णव संतों द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमावतार श्री गौरांग महाप्रभु के अवतरण दिवस के रूप में मनाया।
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भक्ति वेदांत स्वामी मार्ग स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में शुक्रवार को गौरांग महाप्रभु की 535वीं जयंती गौर पूर्णिमा महामहोत्सव के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई, जिसमें गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह का दूध, दही, शहद एवं विभिन्न प्रकार के फलों के रसों एवं विभिन्न जड़ी बूटियों से अभिषेक किया गया।
मंदिर में फूलबंगला, छप्पन भोग, झूलन उत्सव, पालकी उत्सव एवं महाभिषेक का आयोजन किया गया। भक्तों द्वारा हरे कृष्ण महामंत्र का नाम संकीर्तन किया गया। श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म 15वीं शताब्दी में फाल्गुन मास की शुक्लपक्ष की पूर्णिमा के दिन पिता जगन्नाथ मिश्र एवं माता शची देवी की संतान के रूप में पश्चिम बंगाल के मायापुर (उस समय का नवद्वीप) नामक गांव में हुआ था।
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नीम के वृक्ष के नीचे जन्म होने के कारण माता-पिता ने उनका नाम निमाई रखा। हालांकि गौरवर्णी होने के कारण वे गौरांग, गौर हरि एवं गौर सुंदर के नाम से भी संबोधित किए जाते हैं।
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उत्सव के दौरान भक्तों को संबोधित करते हुए चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने श्री महाप्रभु एवं सनातन गोस्वामी पाद के वक्तव्य का दृष्टांत देते हुए कहा कि श्री महाप्रभु सनातन गोस्वामी को बताते हैं कि श्रीकृष्ण भजन में भी नवविधा भक्ति (श्रवण-कीर्तनादि) श्रेष्ठ है।

नवविधा में श्रीकृष्ण-प्रेम एवं श्रीकृष्ण को प्राप्त कराने की महाशक्ति है। नवविधा भक्ति में श्रीनाम संकीर्तन सर्वश्रेष्ठ है। अपराध रहित होकर श्रीनाम संकीर्तन करने से प्रेम धन की प्राप्ति होती है। महोत्सव में मथुरा, आगरा, दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, हरियाणा एवं मध्यप्रदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
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