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मथुरा: टीजी-2 कर्मचारियों ने दिया धरना
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मथुरा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के निष्कासित टीजी-2 कर्मचारियों ने शनिवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के आवास का घेराव करते हुए नारेबाजी की। इसके बाद यह कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन, धरना-प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल करने का एलान भी किया गया। धरने के मुख्य संयोजक देश दीपक का कहना है कि विभागीय गलत नीतियों का खामियाजा 603 टीजी-2 कर्मचारियों को भोगना पड़ रहा है, जबकि दोषी और गैर जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हैं।
उनका कहना है कि कनिष्ठ सहायक और आशुलिपिक का शासनादेश जबरदस्ती कर नौकरी से निकाल दिए गए हैं, जोकि गलत और असंवैधानिक है। गाजियाबाद से आए सह संयोजक नेपाल सिंह ने बताया कि आरटीआई के अनुसार विभाग में वर्तमान में करीब 2000 से अधिक रिक्त पद पड़े हैं, जिन पर तीन वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को आज बहाल नहीं किया गया।
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औरैया के पीड़ित कर्मचारी इंद्रजीत पाल ने बताया कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रकरण संज्ञान में होने की बात कहकर समय का इंतजार का आश्वासन दिया था, मगर 160 दिन बीतने के बाद केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। धरने में शामिल नंदलाल ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करके विभाग के दोषी अधिकारियों को सजा दिलवाने की मांग की। जसवीर, बलराम, दीपक, हरेश कुमार, अमित, वीरेंद्र पिप्पल, संतोष पांडेय, राजेंद्र, संजीव, शिवचरन, बच्चू सिंह, सतीश आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
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अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन, धरना-प्रदर्शन एवं भूख हड़ताल करने का एलान भी किया गया। धरने के मुख्य संयोजक देश दीपक का कहना है कि विभागीय गलत नीतियों का खामियाजा 603 टीजी-2 कर्मचारियों को भोगना पड़ रहा है, जबकि दोषी और गैर जिम्मेदार विभागीय अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हैं।
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उनका कहना है कि कनिष्ठ सहायक और आशुलिपिक का शासनादेश जबरदस्ती कर नौकरी से निकाल दिए गए हैं, जोकि गलत और असंवैधानिक है। गाजियाबाद से आए सह संयोजक नेपाल सिंह ने बताया कि आरटीआई के अनुसार विभाग में वर्तमान में करीब 2000 से अधिक रिक्त पद पड़े हैं, जिन पर तीन वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को आज बहाल नहीं किया गया।
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औरैया के पीड़ित कर्मचारी इंद्रजीत पाल ने बताया कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रकरण संज्ञान में होने की बात कहकर समय का इंतजार का आश्वासन दिया था, मगर 160 दिन बीतने के बाद केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। धरने में शामिल नंदलाल ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करके विभाग के दोषी अधिकारियों को सजा दिलवाने की मांग की। जसवीर, बलराम, दीपक, हरेश कुमार, अमित, वीरेंद्र पिप्पल, संतोष पांडेय, राजेंद्र, संजीव, शिवचरन, बच्चू सिंह, सतीश आदि कर्मचारी मौजूद रहे।