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मथुरा: छात्रवृत्ति घोटाला: मानकहीन मिलीं 540 में से 350 निजी शिक्षण संस्थाएं
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मथुरा। छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त पाईं गईं 540 निजी शिक्षण संस्थाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए दी गई जांच लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें लगभग 350 शिक्षण संस्थाओं को अधिकारियों ने मानकहीन बताया है। इन पर या बिल्डिंग नहीं या फिर स्टाफ नहीं या फिर इनमें से कुछ भी नहीं है। यह रिपोर्ट मिलते ही समाज कल्याण विभाग ने शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट तैयार कर ली है।
दरअसल शासन ने करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त पाईं गईं शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ शुरूआत में ही एफआाईआर दर्ज करा दी। इसके बाद शिक्षण संस्थाओं के संचालक कठोर कार्रवाई न हो इसके लिए न्यायालय चले गए थे। शासन ने घोटाले की जांच के लिए कई नोडल अधिकारी बनाए परंतु नोडल अधिकारियों को शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने सहयोग नहीं किया। जिसकी सूचना मिलने पर शासन ने सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ के निर्देशन में एक कमेटी तैयार की, जिसमें सभी एसडीएम या एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच पूरी करने को कहा गया। जैसे ही एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने जांच शुरू की सच्चाई सामने आने लगी।
एसडीएम द्वारा शनिवार तक 540 शिक्षण संस्थाओं में से 538 की रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी थी। इनमें 350 शिक्षण संस्थाएं इस प्रकार की निकलीं जिनके बारे में एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन शिक्षण संस्थाओं का केवल नाम मात्र के लिए रजिस्ट्रेशन है। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि बाकी जो संस्थाएं बची हैं उनकी भी रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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तीन ने जमा कराई रिकवरी धनराशि
छात्रवृत्ति घोटाले में फंसी शिक्षण संस्थाएं सरकार की जांच के दायरे में आने के बाद अब यह समझ चुकी हैं कि बचना मुश्किल है। ऐसी ही तीन शिक्षण संस्थाओं ने रिकवरी की धनराशि सरकार के खाते में जमा कराई है। जानकारी रहे समाज कल्याण विभाग ने रिकवरी के लिए इसमें शामिल सभी शिक्षण संस्थाओं को नोटिस जारी किए थे। जिनमें से बहुत सी शिक्षण संस्थाओं ने नोटिस को लौटा भी दिया था।
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दरअसल शासन ने करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त पाईं गईं शिक्षण संस्थाओं के खिलाफ शुरूआत में ही एफआाईआर दर्ज करा दी। इसके बाद शिक्षण संस्थाओं के संचालक कठोर कार्रवाई न हो इसके लिए न्यायालय चले गए थे। शासन ने घोटाले की जांच के लिए कई नोडल अधिकारी बनाए परंतु नोडल अधिकारियों को शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने सहयोग नहीं किया। जिसकी सूचना मिलने पर शासन ने सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ के निर्देशन में एक कमेटी तैयार की, जिसमें सभी एसडीएम या एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच पूरी करने को कहा गया। जैसे ही एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने जांच शुरू की सच्चाई सामने आने लगी।
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एसडीएम द्वारा शनिवार तक 540 शिक्षण संस्थाओं में से 538 की रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी थी। इनमें 350 शिक्षण संस्थाएं इस प्रकार की निकलीं जिनके बारे में एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन शिक्षण संस्थाओं का केवल नाम मात्र के लिए रजिस्ट्रेशन है। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि बाकी जो संस्थाएं बची हैं उनकी भी रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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तीन ने जमा कराई रिकवरी धनराशि
छात्रवृत्ति घोटाले में फंसी शिक्षण संस्थाएं सरकार की जांच के दायरे में आने के बाद अब यह समझ चुकी हैं कि बचना मुश्किल है। ऐसी ही तीन शिक्षण संस्थाओं ने रिकवरी की धनराशि सरकार के खाते में जमा कराई है। जानकारी रहे समाज कल्याण विभाग ने रिकवरी के लिए इसमें शामिल सभी शिक्षण संस्थाओं को नोटिस जारी किए थे। जिनमें से बहुत सी शिक्षण संस्थाओं ने नोटिस को लौटा भी दिया था।