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मथुरा पुलिस ने भी माना रामवृक्ष मर गया
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मथुरा। साढ़े पांच साल बाद पुलिस ने भी मान लिया है कि रामवृक्ष यादव मर चुका है। मथुरा पुलिस ने हाईकोर्ट में ऐसा लिखित में दे चुकी है। इसका खुलासा रामवृक्ष के बेटे राजनारायण के पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र मांगने के बाद हुआ है।
गौरतलब है कि २ जून २०१६ को जवाहर बाग को कब्जामुक्त कराते हुए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और तत्कालीन थाना प्रभारी फरह संतोष यादव शहीद हो गए थे। इसके अलावा २७ जानें भी इस हिंसा में चली गई थीं। लेकिन रामवृक्ष यादव के मरने की कोई पुष्टि नहीं हुई थी। ५ दिसंबर २०२० को रामवृक्ष के बेटे राजनारायण निवासी गांव रायपुर, गाजीपुर(उत्तर-प्रदेश) ने हाईकोर्ट प्रयागराज में प्रार्थनापत्र देकर पिता के मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने मथुरा पुलिस से पूछा। मथुरा पुलिस ने भी अपना बयान लिखित में कोर्ट को देकर रामवृक्ष की मौत होने की बात स्वीकार की।
कोर्ट ने नगर निगम को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने को कहा और इसके साथ ही रामवृक्ष की मौत स्वीकारने वाला मथुरा पुलिस का पत्र भी भेजा। लगातार चार दिनों से रामवृक्ष का बेटा राजनारायण पिता के मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग कर रहा था। हालांकि फार्म दो सोमवार को भरकर देने के बाद नगर निगम उसे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर देगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी करीम अख्तर कुरैशी ने बताया कि शनिवार को राजनारायण नहीं आया। सोमवार को फार्म-२ देने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी करके उसे जारी कर दिया जाएगा।
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चर्चा का विषय
शहर व देश के लोगों के बीच काफी समय तर यह चर्चा का विषय रहा कि आखिर रामवृक्ष गया कहा। ना ही कभी पुलिस ने उसकी मौत होने की बात स्वीकार की ना ही किसी अन्य माध्यम से इसकी कोई जानकारी हुई। पुलिस ने कोर्ट में भी स्वीकार तो कर लिया लेकिन इसकी भी किसी को कानो कान खबर तक नहीं हुई।
सीबीआई की जांच पर स्वीकारा रामवृक्ष मरा
जवाहर बाग हिंसा की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने अपनी जांच में रामवृक्ष की मौत होना मान लिया। उसी आधार पर मथुरा पुलिस ने कोर्ट में यह स्वीकार किया कि रामवृक्ष की मौत हो चुकी है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नगर निगम को कार्रवाई करनी है।
-डॉक्टर गौरव ग्रोवर, एसएसपी
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गौरतलब है कि २ जून २०१६ को जवाहर बाग को कब्जामुक्त कराते हुए तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और तत्कालीन थाना प्रभारी फरह संतोष यादव शहीद हो गए थे। इसके अलावा २७ जानें भी इस हिंसा में चली गई थीं। लेकिन रामवृक्ष यादव के मरने की कोई पुष्टि नहीं हुई थी। ५ दिसंबर २०२० को रामवृक्ष के बेटे राजनारायण निवासी गांव रायपुर, गाजीपुर(उत्तर-प्रदेश) ने हाईकोर्ट प्रयागराज में प्रार्थनापत्र देकर पिता के मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने मथुरा पुलिस से पूछा। मथुरा पुलिस ने भी अपना बयान लिखित में कोर्ट को देकर रामवृक्ष की मौत होने की बात स्वीकार की।
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कोर्ट ने नगर निगम को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने को कहा और इसके साथ ही रामवृक्ष की मौत स्वीकारने वाला मथुरा पुलिस का पत्र भी भेजा। लगातार चार दिनों से रामवृक्ष का बेटा राजनारायण पिता के मृत्यु प्रमाणपत्र की मांग कर रहा था। हालांकि फार्म दो सोमवार को भरकर देने के बाद नगर निगम उसे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर देगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी करीम अख्तर कुरैशी ने बताया कि शनिवार को राजनारायण नहीं आया। सोमवार को फार्म-२ देने के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी करके उसे जारी कर दिया जाएगा।
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चर्चा का विषय
शहर व देश के लोगों के बीच काफी समय तर यह चर्चा का विषय रहा कि आखिर रामवृक्ष गया कहा। ना ही कभी पुलिस ने उसकी मौत होने की बात स्वीकार की ना ही किसी अन्य माध्यम से इसकी कोई जानकारी हुई। पुलिस ने कोर्ट में भी स्वीकार तो कर लिया लेकिन इसकी भी किसी को कानो कान खबर तक नहीं हुई।
सीबीआई की जांच पर स्वीकारा रामवृक्ष मरा
जवाहर बाग हिंसा की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने अपनी जांच में रामवृक्ष की मौत होना मान लिया। उसी आधार पर मथुरा पुलिस ने कोर्ट में यह स्वीकार किया कि रामवृक्ष की मौत हो चुकी है। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नगर निगम को कार्रवाई करनी है।
-डॉक्टर गौरव ग्रोवर, एसएसपी